गलियों में सन्नाटा, घरों में लटके ताले, पलायन से सूना हो गया गोपालपुरा गांव

मनरेगा के तहत भी नहीं मिला हर हाथ को काम

By: rafi ahmad Siddqui

Published: 16 May 2018, 10:17 AM IST

छतरपुर। गलियों में पसरा सन्नाटा, घरों में लटके ताले, सूना गांव, ग्रामीणों के मुर्झाए चेहरे...। ये हकीकत है बड़ामलहरा जनपद पंचायत क्षेत्र के गोपालपुरा की। सूखा की मार के बाद पलायन से गांव के हालात पूरी तरह बदल गए हैं। कभी चौपालों में ग्रामीणों से गुलजार रहने वाला गोपालपुरा गांव अब सूना हो गया है। दरअसल गांव में अधिकांश लोग पलायन कर गए हैं। मनरेगा के क्रियांवयन में ध्यान नहीं दिए जाने से ग्रामीणों केा गांव में काम नहीं मिला। जिससे हर हाथ को काम मुहैया कराने वाली मनरेगा योजना के फ्लॉप हो जाने से ग्रामीणों को आर्थिक दिक्कतों से जूझते हुए दिल्ली के लिए पलायन करना पड़ा।
अन्नदाता किसान एक तो प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। वहीं केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना मनरेगा का भी ग्रामीणों को लाभ नहीं पा रहा है। यही वजह है कि अपने बच्चों का पेट पालने के लिए किसान महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं। बुंदेलखंड के इस गांव में करीब दस फीसदी ही ग्रामीण शेष बचे हैं। ९० फीसदी आबादी रोजगार की तलाश में अपनी पत्नी व बच्चों को गांव में छोड़कर उनके भरण पोषण के लिए दिल्ली में रहकर मजदूरी करने को मजबूर हैं। हालात यह हैं कि ग्रामीणों को गांव में काम नहीं मिल पा रहा है। जिससे ग्रामीणों को आर्थिक तंगी से जूझते हुए पलायन करना मजबूरी बन गया है।
पापा गए परदेश
मैं गांव में अपने दादा दादी के साथ रह रहा हूं। पापा को कुछ समय पहले ही दिल्ली चले गए थे। मम्मी भी उन्हीं के साथ गई हैं। मम्मी व पापा जब से दिल्ली गए हैं उनकी बहुत याद आती है। दादी पापा से मोबाइल से बात करा देती हैं लेकिन पापा हमेश यही कहते हैं कि जल्द ही आ जाएंगे। ये कहना है गोपालपुरा गांव के नितिन कुमार का।
मनरेगा में मिलता काम तो काय करत पलायन
गांव में रहने वाले शिवराज सिंह ने बताया कि मनरेगा से ग्रामीणों को काम नहीं मिल रहा है। पंचायत के तहत काम नहीं मिलता। सभी लोग बाहर दिल्ली में रहकर काम कर रहे हैं। मनरेगा योजना काम में ९० फीसदी पलायन, बीस फीसदी ग्रामीण ही गांव में मौजूद हैं।
सूखे के कारण बंजर हो गए खेत
गांव की बिशना का कहना है कि गांव में काम नहीं मिलता। फसल भी नहीं हुई। सूखा के कारण खेत बंजर पड़े हैं। जिससे स्थिति बहुत खराब है। पेट पालने के लिए रोजगार का कोई जरिया नहीं है। ऐसे में बच्चों के पेट पालने में परेशानी आती है। खेती भी की लेकिन उसमें घाटा लग गया। लोगों का कर्ज भी देना है। ऐसे में मनरेगा के तहत काम न मिलने से पलायन करना मजबूरी है।

rafi ahmad Siddqui Desk/Reporting
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