स्कूलों को खेल सामग्री के लिए मिली राशि, नहीं खरीदी गई सामग्री, कैसे खेलेंगे बच्चे

शिक्षण सत्र समाप्त होने की कगार पर

By: Sanket Shrivastava

Published: 19 Mar 2020, 10:18 PM IST

बक्स्वाहा. पहले कहा जाता था कि खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब लेकिन अब खेलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एक सैकड़ा से अधिक माध्यमिक व प्राथमिक शालाओं के लिए साढ़े 11 लाख रूपए खेल सामग्री हेतु आवंटित किए गए थे। ज्यादातर स्कूलों में खेल सामग्री ही नहीं खरीदी गई। जब सामग्री नहीं खरीदी जाएगी तो बच्चे कैसे खेल सकेंगे। शिक्षण सत्र भी समाप्ति की ओर है।
जानकारी के मुताबिक 109 प्राथमिक शाला में पांच हजार रूपए तथा 60 माध्यमिक शालाओं में 10 हजार रूपए प्रत्येक शाला के मान से राशि खातों में सिर्फ खेल सामग्री खरीदने के लिए भेजी गई लेकिन एक सैकड़ा से अधिक ऐसे विद्यालय हैं जहां सामग्री ही नहीं खरीदी गई।
कई स्कूलों में तो सिर्फ जनपद शिक्षा केन्द्र से सामग्री भेजकर बिल दे दिए गए हैं। जब विद्यालयों में खेल सामग्री ही नहीं है तो फिर बच्चों को खेलने के अवसर कैसे मिलेंगे। खेलों में बच्चों की रूचि भी शायद इसीलिए नजर नहीं आ रही। चार माह गुजरने के बाद भी खेल सामग्री नहीं खरीदी गई जबकि मार्च के अंत तक वित्त वर्ष का लेखा-जोखा भी तैयार होना है। जानकारों की मानें तो जबसे माध्यमिक शिक्षक फरजाना कुरैसी बीआरसीसी बनकर आई हैं तब से शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। न तो शिक्षकों के अंदर उनको लेकर कोई डर है न ही वह सक्षम शिक्षकों के खिलाफ लिख पाती हैं। ब्लॉक के तीस प्राथमिक, माध्यमिक विद्यालयों में खेल सामग्री हेतु आवंटित होने वाली राशि गलत खातों के हवाला देते हुए। अब तक आवंटित ही नही की गई जबकि अन्य विद्यालयों में नवंबर - दिसंबर में ही राशि तो आवंटित कर दी गई पर अधिकांश विद्यालय अब तक खेल सामग्री विहीन है।
169 स्कूलों ने नही बताई है उपयोगिता
बीआरसीसी फरजाना कुरैसी ने बताया कि यह बात सही है कि हमने करीब 169 स्कूलों को खेल सामग्री क्रय करने के लिए 60 माध्यमिक शाला को प्रति शाला 10 हजार और 109 प्राथमिक शाला को प्रति शाला 5 हजार रुपए आवंटित किए थे। इन सभी स्कूलों से हमने उपयोगिता प्रमाण पत्र भी मांगा था, परंतु अभी तक एक भी स्कूल ने उपयोगिता प्रमाणपत्र नही दिया। उन्होंने खेल सामग्री ली या नहीं, जानकारी नहीं आई है।
जानकारी ली जाएगी
&कितने स्कूलों में खेल सामग्री खरीदी गई और कितने बाकी हैं इसकी जानकारी अभी नहीं है लेकिन मैं इसकी जानकारी लेता हूं।
आरपी लखेर, डीपीसी, छतरपुर

Sanket Shrivastava
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