पूरे जिले में केवल 110 किसान ही पहुंचे केन्द्र
4 अप्रेल से विधिवत शुरु हुए गेहूं खरीद केन्द्रों पर अब तक केवल 110 किसान ही पहुंचे। जिनसे 5 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हुई है। जबकि इस अवधि में 50 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद होती रही है। न केवल गेहूं चना, मसूर, सरसों के किसान भी खरीद केन्द्रों पर नहीं आ रहे हैं। चना में मटरी की मात्रा को लेकर खरीद केन्द्रों के नियम के चलते किसान नहीं आ रहे हैं। वहीं सरसों व मसूर के दाम बाजार में अच्छे मिलने से सरकारी प्रक्रिया की झंझटो से बचने किसान बाजार का रुख कर रहे हैं।
पंजीयन के बाद भी नहीं आ रहे किसान
समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराने के बाद भी किसान खरीद केन्द्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं। बाजार में समान दाम मिलने और नकद भुगतान की सुविधा के चलते किसान सरकारी खरीद केन्द्रों से दूरी बनाए हुए हैं। सरकारी केन्द्रों पर लगने वाले समय, हम्माली खर्च और खाते में बाद में भुगतान के चलते किसान बाजार में नकद में उपज बेचने में रुचि दिखा रहे हैं।
रविवार को बंद हो गई स्लॉट बुकिंग
17 अप्रेल तक समर्थन मूल्य पर उपज बेचने के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख थी। लेकिन जिले के किसानों ने स्लॉट बुकिंग ही नहीं कराई। 98 फीसदी किसानों ने ओटीपी वेरीफिकेशन तक नहीं कराया है। समर्थन मूल्य पर उपज बेचने के लिए इस बार लागू किए गए नियमों के चलते भी किसान सरकारी प्रक्रिया से बच रहे हैं।