हॉस्टल में छात्रों को नहीं मिल रहा था ढंग का खाना, अधीक्षक देते थे गालियां

हॉस्टल में छात्रों को नहीं मिल रहा था ढंग का खाना, अधीक्षक देते थे गालियां

Neeraj soni | Publish: Oct, 14 2018 10:03:26 AM (IST) Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

- रात में कलेक्टर के पास पहुंच गए छात्र, सुबह होते ही अधीक्षक का तबादला
- शराब पीकर उत्पात मचाने वाले भृत्य के खिलाफ भी कार्रवाई प्रस्तावित

छतरपुर। जिले के सरकारी हॉस्टल में बच्चों के साथ किस हद तक अमानवीयता हो रही है, इसका ताजा मामला शहर के ही एक शासकीय जूनियर बालक छात्रावास का निकलकर सामने आया है। हॉस्टल का भृत्य हर दिन शराबखोरी करके जहां छात्रों को परेशान कर रहा था, वहीं यहां के वार्डन का बर्ताव बच्चों के साथ अच्छा नहीं था। बच्चों को नाश्ता-खाना भी रुचि अनुसार नहीं मिल रहा था। पलंग-गद्दे खराब थे, इसलिए बच्चों के शरीर में खुजली हो गई थी। समस्या ज्यादा बढ़ी तो शुक्रवार को हॉस्टल के छात्र कलेक्टर के यहां शिकायत लेकर पहुंच गए। इसके बाद पूरा मामला उजागर हो गया। कलेक्टर के निर्देश पर तत्काली वार्डन को यहां से हटाकर सटई पदस्थ कर दिया गया। वहीं सटई के वार्डन केडी अग्निहोत्री को तत्काल प्रभाव से हॉस्टल के वार्डन का चार्ज दे दिया गया। शनिवार को ही नए वार्डन की हॉस्टल में ज्वाइनिंग करा दी गई।
शहर के महोबा रोड स्थित शासकीय जूनियर बालक छात्रावास में रहने वाले ५० बच्चों को शासन से मिलने वाली तमाम सुविधाओं के बाद भी न तो ठीक से खाना मिल रहा था और न ही सोने के लिए अच्छा विस्तर था। टॉयलेट गंदगी से भरे थे। सफाई की स्थिति खराब थी। तीन दिन से खराब खाना मिलने और नाश्ता नहीं मिलने के कारण छात्र तीन दिन से भूखे थे। इसलिए शुक्रवार को दिन में कलेक्टर के पास पहुंच गए। तीन घंटे कलेक्टर को समस्या बनाते के लिए परेशान रहे, आश्वासन मिला, लेकिन शाम को खाना नहीं मिला तो रात 11 बजे फिर से कलेक्टर के बंगले पर सभी छात्र एकत्र होकर पहुंच गए। आखिरकार कलेक्टर ने उनकी पीड़ सुनी और आदिम जाति विभाग के क्षेत्र संयोजक डॉ. नारायण सिंह को निर्देश दिए कि वह बच्चों की तुरंत स्थिति जाकर देखे और उन्हेें खाना बनवाकर खिलवाए। रात में ही एसडीएम कमलेश पुरी और नारायण सिंह ने हॉस्टल में बच्चों को ले जाकर जब स्थिति देखी तो वहां भोजन में इल्ली, कीड़े मिले। यहां की अव्यवस्थाएं देखकर खुद एसडीएम भी हैरान रह गए। उन्होंने यहां के वार्डन पीएल कोरी को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए। इसके बाद रात में छात्रों को अच्छा खाना मिला। यह मामला तूल पकड़ता, इससे पहले ही प्रशासन ने सुबह हॉस्टल के वार्डन की छुट्टी कर दी।
हॉस्टल में बदहाली और अव्यवस्था का आलम :
बच्चों के हॉस्टल में दो आयु वर्ग के बच्चों को दाखिला दिया गया है। 50 सीटर और 20 सीटर हॉस्टल की गैलरी में बल्व नहीं था। टॉयलेट में अंधेरा था और जब बच्चे वार्डन से इसके बारे में शिकायत करते थे तो उनको पीटा जाता था। छात्रों का आरोप था कि वार्डन उनके साथ गाली-गलौच करके उनकी मारपीट करते हैं। जर्जर टॉयलेट और बाथरूम में गंदगी के कारण वे परेशान है। कई कमरों के पंखा ही नहीं चलते थे। पलंग टूटे और बिना मच्छरदानी या गद्दे के उन्हें मजबूर होकर लेटना पड़ता था। वहीं छात्रों ने बताया कि हॉस्टल का भृत्य रमेशचंद्र अहिरवार हॉस्टल परिसर में ही शराबखोरी करके छात्रों को परेशान करता है। वार्डन उससे भी कुछ नहीं कहते हैं।
एडमिशन के बदले लिए गए रुपए :
हॉस्टल में अनुसूचित जाति वर्ग के बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिया जाता है। लेकिन इस सत्र में ९ बच्चों को रुपए लेकर प्रवेश दिया गया। इसकी शिकायत भी कलेक्टर और एसडीएम से की गई है। छात्रों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल के वार्डन पीएल कोरी ने उन्हें हॉस्टल में प्रवेश देने के बदले परिवार के लोगों से रुपए लिए हैं। छात्र विजय अहिरवार, अरुण अहिरवार, नरेंद्र अहिरवार और दीपक अहिरवार से प्रवेश के बदले तीन-तीन हजार रुपए लिए गए। वहीं महेश प्रजापति से 2500 रुपए, अमित अहिरवार से 1500 रुपए और साहिल, मोहित व गजेंद्र अहिरवार से 500-500रुपए प्रवेश शुल्क जमा कराया गया। बदले में कोई रसीद भी नहीं दी गई। इस बारे मेंं वार्डन का कहना था कि उन्होंने किसी से भी रुपए नहीं लिए। भृत्य रमेशचंद्र अहिरवार ने ही वसूली की है।

सुबह होते ही वार्डन का तबादला, भृत्य पर कार्रवाई प्रस्तावित :
शासकीय जूनियर बालक छात्रावास की बदहाल स्थिति के सामने आते ही कलेक्टर रमेश भंडारी ने तत्काल प्रभाव से महोबा रोड हॉस्टल के वार्डन पूरनलाल कोरी को यहां से हटा दिया। उन्होंने सुबह ही आदेश जारी करते हुए कोरी को विमुक्त जाति बालक छात्रावास सटई स्थानांतरित करते हुए सटई हॉस्टल के वार्डन केडी अग्निहोत्री को प्रभार सौंपने के आदेश जारी कर दिए। उन्होंने तुरंत केडी अग्निहोत्री को हॉस्टल में ज्वाइन करवाने के लिए भी निर्देश दिया। इस पर सुबह 11 बजे लवकुशनगर हॉस्टल के वार्डन जीडी सौनकिया को महोबा रोड हॉस्टल भेजकर केडी अग्निहोत्री को ज्वाइन करवाया। उधर हॉस्टल के भृत्य रमेशचंद्र के खिलाफ भी कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। मामले की जांच पूरी होने के बाद भृत्य को भी हटाया जाएगा।
शराब पीकर हॉस्टल में उपद्रव करता है भृत्य :
शासकीय जूनियर बालक छात्रावास महोबा रोड के भृत्य रमेशचंद्र अहिरवार पर भी छात्रों और यहां के वार्डन ने आरोप लगाया है कि शराब पीकर वह हॉस्टल में उपद्रव करता है। शुक्रवार की रात जब एसडीएम हॉस्टल में पहुंचे थे, तब भी रमेशचंद्र अहिरवार शराब के नशे में था। वार्डन का कहना था कि रमेशचंद्र ही छात्रों को बरगलाकर जबरन उनके खिलाफ शिकायत करवा रहा था। बच्चों को खाना अच्छे से दिया जाता रहा, लेकिन रमेशचंद्र अहिरवार ही बच्चों को भड़काता रहा। उधर यहां काम करने वाली रसोईयों ने बताया कि रमेशचंद्र अपने पूरे परिवार को हॉस्टल की मेस में ही खाना खिलाता है। हॉस्टल में ही शराब पीकर वह लोगों से गाली-गलौच करता है। इस कारण यहां की स्थिति बदहाली की ओर पहुंच गई है।
नए वार्डन ने पहुंचकर ठीक कराई व्यवस्थाएं :
हॉस्टल में नए वार्डन ने चार्ज लेते ही यहां की व्यवस्थाएं ठीक कराने के लिए पहले ही दिन से काम लगा दिया। स्वीपर को बुलाकर उन्होंने टॉयलेट की सुफाई करवाई। छात्रों के कक्ष ठीक करवाए। साइकिलों को व्यवस्थित करवाया। परिसर में सफाई करवाई। किचिन ठीक करवाया। छात्रों के लिए अच्छा भोजन पकाने की व्यवस्था करवाई। कलेक्टर ने हॉस्टल का निरीक्षण करने की बात कही थी, इसलिए उनके आने से पहले ही दिनभर हॉस्टल में साफ-सफाई कराई जाती रही।

छात्रों की समस्या सुलझा दी गई है।
- हॉस्टल के छात्र कुछ अव्यवस्थाओं से परेशान थे। उनकी शिकायत की जांच कराई गई। अव्यवस्था मिलने पर गंभीरता से पूरा मामला लेते हुए तत्काल वार्डन को वहां से हटा दिया गया। नए वार्डन को प्रभार देकर व्यवस्थाएं ठीक करने के निर्देश दिए हैं। अब छात्रों की समस्या सुलझ गई है।
- रमेश भंडारी, कलेक्टर

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