मोबाइल एसेसरीज में की जा रही की टैक्स चोरी

मोबाइल एसेसरीज में की जा रही की टैक्स चोरी

Unnat Pachauri | Publish: Apr, 16 2019 05:05:00 AM (IST) Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

- बिना बिल तिल रहे ब्रांडेड मोवाइल व एसेसरीज

, ग्राहकों को नहीं दिया जाता है बिल

छतरपुर। एसेसरीज की मदद से स्मार्ट फोन को और भी ज्यादा स्मार्ट बनाए जाने का क्रेज इन दिनों युवाओं में बढ़ता जा रहा है। अपने फोन को और भी आकर्षक बनाने और सुरक्षा के युवाओं द्वारा कई प्रकार की मोबाइल एसेसरीज खरीदी जाती है। वहीं बेहतर कंपनियों की एसेसरीज मंहगी होने के कारण युवाओं द्वारा कम कीमत वाली एसेसरीज खरीदी जाती है। जिसका फायदा दुकानदारों द्वारा उठाया जा रहा है। जिलेभर में संचालित मोबाइल एसेसरीज की सैकडों दुकानों पर मोबाइल एसेसरीज बेचे जाने के नाम पर लाखों की टैक्स चोरी की जा रही है। मोबाइल एसेसरीज खरीदने पर दुकानदारों द्वारा ग्राहकों को किसी भी प्रकार का बिल नहीं दिया जाता है। एसेसरीज का बिल नहीं होने से दुकानदारों को टैक्स भी नहीं चुकाना पड़ता है। क्योंकि बिल नहीं होने के कारण खरीदी और बिक्री का कोई रिकॉर्ड नहीं रहता। ऐसे में दुकानदारों द्वारा ग्राहकों के साथ-साथ शासन को भी राजस्व की चपत लगा रहे हंै। कोई रिकॉर्ड नहीं होने के कारण दुकानदारों को टैक्स नहीं देना पड़ता है और इस तरह से मोबाइल एसेसरीज बेचने वालों द्वारा खुलेआम मनमानी के अनुसार मोबाइल एसेसरीज बेचे जाने का कारोबार किया जा रहा है।
मोबाइल एसेसरीज बेचने वाले दुकानदारों द्वारा नकली कंपनियों की एसेसरीज बेचे जाने का काम किया जा रहा है। जिसके एवज में दुकानदारों द्वारा ग्राहकों को किसी भी प्रकार का बिल नहीं दिया जाता है। वहीं मोबाइल एसेसरीज कम दाम की होने के कारण युवाओं द्वारा भी बिल की चिंता नहीं की जाती है वह उन्हें तो केवल कम कीमत में एसेसरीज मिलनी चाहिए। फिर चाहे वह कंपनी की हो या नहीं।
कम कीमत में मिल जाती है एसेसरीज
एसेसरीज के लिए व्यापारी अपने दुकानों के साथ साथ मेलों और फुटपाथ का भी रुख कर रहे हैं। जहां पर सस्ते दामों में हैडफोन, स्क्रीन गार्ड, कवर आदि एसेसरीज की बिक्री कर रहे हैं। बताया गया कि इसमें ज्यादातर चीनी आइटम होते हैं। बाजार में कई प्रतिष्ठित कंपनियों सहित कई चायनिज कंपनियों के फोन 10 गुना तक कम कीमत में मिल जाते है। हालांकि ये फोन और एसेसरीज ऑरिजनल होंगे इसकी कोई गांरटी नहीं हैं। मार्केट में फोन की सैंकड़ों दुकानें हैं, जहां पर खुलेआम बिना बिल के डुप्लीकेट एसेसरीज बेचे जाने का काम किया जा रहा है। दुकानें फुटपाथ पर भी चलने लगी है। सड़क पर लगने वाली दुकानों पर फिक्स शॉप से ज्यादा सस्ती एसेसरीज मिल जाती है। जैसे किसी मोबाइल का कवर दुकान पर 150 से 200 रुपए कीमत का होता है वह सड़क पर महज ५० से ८0 रुपए में मिल जाता है। इसी के साथ ही दुकानों पर मोबाइल ग्रिप, पावर बैंक, इयरफोन, ममोरी कार्ड, पेन ड्राइव, मोबाइल चार्जर, डाटा केबल, बैटरी सहित अन्य एसेसरीज आसानी से मिल जाती है।
डुप्लीकेट मोबाइल एसेसरीज से सेहत को खतरा
बाजार में बिना बिल और कम कीमत में मिलने वाली डुप्लीकेट मोबाइल एसेसरीज से लोगों की सेहत को भी खतरा रहता है। क्योंकि डुप्लीकेट मोबाइल एसेसरीज से खतरनाक रेडिएशन निकलता है जो सीधे तौर पर मोबाइल यूजर के दिमाग पर प्रभाव डालता है। साथ ही कई मामलों में तो बैटरी फटने जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं। जिसका असर लोगों पर पड़ा है। लेकिन लोग सस्ती एसेसरीज के लालच में सेहत की भी परवाह नहीं करते।
यहां लगाई जा रहीं फुटपाथ में दुकानें
शहर के विभिन्न स्थानों में मोबाइल एसेसरीज की दुकानें फुटपाथ में भी लगाई जा रही हैं। ये दुकानें शहर के जवाहर रोड, कॉलेज तिराहा से पुराना पन्ना नाका, बस स्टेंड, सागर रोड विराज गार्डन के सामने अस्थाई रूप से दुकानें लगाई जा रही है। जहां पर कोई भी एसेसरीज खरीदने पर किसी प्रकार का बिल नहीं दिया जाता है। यहां पर दुकानदारों द्वारा काफी सस्ते दामों में सामान बेज दिया जाता है। जिससे लोगों का रुझान ऐसे स्थानों में अधिक रहता है।
ग्राहकों ने कहा
शहर के रहने वाले अरविंद शर्मा का कहना है कि वह अपने मोवाइल के लिए कवर, टेंपर्ड ग्लास, चार्जर आदि लेने के लिए गए जहां पर मात्र ब्रांडेड सामान पर की बिल दिया गया। लेकिन जो ब्रांडेड सामान नहीं था उसका बिल नहीं दिया गया और न ही कोई गारंटी दी गई। वहीं आरके बादल का कहना है कि उन्होंने घर के लिए एक मोवाइल फोन खरीदा था। लेकिन दुकानदार द्वारा बिल देने से मना कर दिया। वह मोवाइल ब्रांडेड कम्पनी का होने के बाद भी दुकानदार ने बिल नहीं दिया। बिल की मांग करने पर अधिक राशि चुकाने की बात कही गई।
फैक्ट फाइल
शहर में मोबाइल एसेसरीज की कुल दुकानें- ३५०
बडी दुकानें- ५०
फुटपाथ की दुकानें- ५०
इनका कहना है
हमारे यहां पर जब भी कोई शिकायतें आती हैं तो उस पर कार्रवाई की जाती है। इसको लेकर जैसे ही उच्चाधिकारियों के निर्देश आते हैं हमारी ओर से कार्रवाई की जाएगी।
पीसी मार्काे सेल्स टैक्स अधिकारी

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