जिले में सबसे ज्यादा निकल रहे टीबी के मरीज, जागरूकता की कमी

जिले में सबसे ज्यादा निकल रहे टीबी के  मरीज, जागरूकता की कमी

Rafi Ahamad Siddiqui | Publish: Sep, 16 2018 12:24:03 PM (IST) | Updated: Sep, 16 2018 12:24:04 PM (IST) Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

साल भर में जिले में 3600 से ज्यादा निकल रहे टीबी के मरीज

रफी अहमद सिद्दीकी
छतरपुर। जिले में टीवी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभाव वाले क्षेत्रों में खोली गई यूनिटें केवल रिकॉर्ड पर ही चल रही हैं। ऐसे में मरीजों को न तो इलाज मिल रहा है और न ही इस रोग पर काबू हो पा रहा है। लवकुशनगर क्षेत्र की पत्थर खदानों, क्रेशरों में काम करने वाले मजदूर से लेकर क्षेत्र में बड़ी संख्या में टीवी के रोगी निकल रहे हैं। लेकिन यहां की यूनिट रिकॉर्ड पर ही चल रही है। यही हाल बिजावर की टीबी यूनिट का है। इस तरह की गंभीर लापरवाही और लंबे समय से चल रही है। ऐसे में मजबूर होकर मरीजों को इलाज के लिए यूपी के कानपुर या फिर भोपाल-ग्वालियर में इलाज कराने जाना पड़ रहा है। कानपुर में तो टीबी अस्पताल के डॉक्टर और पूरा प्रबंधन छतरपुर जिले से जाने वाले सबसे ज्यादा मरीजों से परेशान हो गए हैं।

जिले की आबादी १७ लाख ६२८५७ है। टीबी जैसी बीमारी से निपटने के लिए जिले में तीन यूनिट बनाई गई हैं। पांच लाख की आबादी पर एक यूनिट बनाई गई है। जिसमें नौगांव, बिजावर व लवकुशनगर आता है। नौगांव यूनिट में हरपालपुर, महाराजपुर, ईशानगर व नौगांव के टीबी के मरीजों का इलाज होता है। वहीं नौगांव में मरीजों की भर्ती होने की भी व्यवस्था है और टीबी के डॉक्टरों की भी नियुक्ति है। दूसरी यूनिट लवकुशनगर में है। जहां पर चंदला, लवकुशनगर, राजनगर, गढ़ीमलहरा के मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। वहीं बिजावर में भी एक यूनिट है जिसमें बिजावर, सटई, बड़ामलहरा, बकस्वाहा के मरीज अपना इलाज कराने के लिए आते हैं। जमीनी तौर पर देखा जाए तो नौगांव यूनिट में ही मरीजों का के इलाज के लिए व भर्ती होने की व्यवस्था है। वहीं दो यूनिट बिजावर व लवकुशनगर में न तो टीबी के मरीजों को भर्ती होने के लिए कोई व्यवस्था और या न तो टीबी के कोई डॉक्टर हैं। लवकुशनगर व बिजावर में बीएमओ द्वारा ही ऐसे मरीजों का इलाज किया जाता है। इन्हीं के द्वारा मरीजों को दवा दे दी जाती है। अगर कोई गंभीर मरीज आता है तो उसे तुरंत जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। कुल मिलाकर जिले में नौगांव यूनिट ही ऐसी है जिसे हर कोई जानता है और मरीज भी यहीं पर अपना इलाज कराने के लिए आते हैं। लवकुशनगर क्षेत्र के लोगों से जब यह जानना चाहा कि लवकुशनगर में टीबी का कोई अस्पताल है तो लोगों के द्वारा ये भी बताया गया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र तो ठीक है लवकुशनगर में रहने वाले लोगों तक को इसकी जानकारी नहीं है। ऐसे में टीबी के मरीज अपना इलाज कैसे करा पाएंगे और उन्हें इलाज कैसे मिल पाएगा ये तो समझ के परे है। लवकुशनगर में भगवान भरोसे ही टीबी के मरीजों की व्यवस्था चल रही है।
लवकुशनगर बीएमओ डॉ. एसपी शाक्यवार से इस संबंध में बात की गई तब पता चला कि लवकुशनगर में टीबी के मरीजों के लिए एक यूनिट है। जिसमें चंदला, लवकुशनगर, राजनगर व गढ़ीमलहरा के टीबी के मरीजों का इलाज होता है। बीएमओ से जब अस्पताल और डॉक्टरों की व्यवस्था के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि टीबी के मरीजों के लिए अलग से व्यवस्था नहीं है। लवकुशनगर स्वास्थ्य केंद्र में ही उनका इलाज किया जाता है। वह स्वयं टीबी के मरीजों को देखते हैं और दवा देते हैं। यही आलम बिजावर यूनिट का है। यहां भी टीबी के मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और न ही इसकी जानकारी क्षेत्र के लोगों को है। बिजावर बीएमओ नरेशन त्रिपाठी से बात की गई तो उनका कहना है कि सटई, बिजावर, बड़ामलहरा हर जगह स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी की दवा उपलब्ध है। कोई भी टीबी से पीडि़त या ग्रसित मरीज जब अस्पताल आता है तो उसे देखकर दवा दे दी जाती है। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।

ऐसे फैलती है बीमारी :
बिजावर बीएमओ नरेश त्रिपाठी ने बताया कि टीबी की बीमारी संक्रामक बीमारी है। यह बीमारी अगर किसी एक को होती है तो और उसका समय पर इलाज न होने के कारण यह बीमारी धीरे-धीरे अन्य लोगों को भी हो जाती है। टीबी वाले मरीज छींकने व खांसने से यह बीमारी दूसरों तक पहुंच जाती है। जिस कारण मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जिले में जिला अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी की दवा उपलब्ध है। अगर किसी को यह बीमारी है तो वह अस्पताल आकर अपनी जांच कराए और इसकी दवा मुफ्त में दी जाती है। इसका कोर्स रहता है। जिसे पूरा करना पड़ता है।

क्या है मल्टी ड्रग रेजिस्ट्रेंट टीबी बैक्टीरिया :
मल्टी ड्रग रेजिस्ट्रेंट टीबी बैक्टीरिया के बारे में जब डॉ. नरेश त्रिपाठी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जब टीबी के मरीज को दवा देने पर उस पर दवा का असर नहीं होता उसको टीबी के बैक्टीरिया खत्म नहीं होते, ऐसे मरीज मल्टी ड्रग रेजिस्ट्रेंट टीबी बैक्टीरिया का शिकार होते हैं। ऐसे मरीजों को भोपाल जांच के लिए भेजा जाता है। इसके बाद उनकी दवा शुरू होती है।

जिले से ढाई माह में सात सौ मरीज पहुंचे नौगांव :
जिले में नौगांव टीबी अस्पताल में इस समय सबसे ज्यादा टीबी के मरीज निकल रहे हैं। जिसके चलते नौगांव टीबी अस्पताल में इस समय तीन सौ से ज्यादा मरीज निकल रहे हैं। जिससे नौगांव टीबी अस्पताल में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। यहां जिले भर के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। बिजवार व चंदला टीबी यूनिट के मरीज भी नौगांव पहुंचाए जा रहे हैं। जिससे नौगांव टीबी अस्पताल में सर्वाधिक टीबी के मरीज निकल रहे हैं। एक जनवरी २०१८ से लेकर जुलाई माह तक नौगांव टीबी अस्पताल में २०८८ आ चुके हैं।

साल में निकलने वाले मरीज :
नौगांव- ३६००
लवकुशनगर- ९८०
बिजावर- १०३

जिले में आबादी की स्थित जनगणना २०११ के अनुसार
जिले की कुल आबादी- १७ लाख ६२८५७
पुरुष- ९ लाख ३५९०६
महिलाएं- ८२६९५१
ग्रामीण आबादी- १३ लाख ६३६०४
शहरी आबादी- ३९९२५३

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