राजस्व के पांच हजार मामले निपटाने के लिए तहसील को दो हिस्सों में बांटा

5 हजार पेंडिंग आवेदनों में से 1500 निटपटे, साढ़े तीन हजार अभी भी लंबित
नायब तहसीलदार व राजस्व निरीक्षकों की कमी के कारण अटके है मामले

By: Dharmendra Singh

Published: 08 Apr 2021, 07:34 PM IST

छतरपुर। कोरोना कालखण्ड के कारण राजस्व अधिकारियों के बचाव कार्य में रही व्यस्तता एवं स्टाफ की कमी के कारण जिले भर की तहसीलों में लंबित प्रकरणों की संख्या लगातार बढ़ती रही है। अब इन मामलों को सुलझाने के लिए कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह के निर्देश पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। लगभग दो महीने पहले छतरपुर तहसील में बंटवारा, नामांतरण जैसे पांच हजार मामले लंबित थे लेकिन नवागत एसडीएम संतोष चंदेल के कार्यभार संभालने के बाद लंबित प्रकरणों को निराकृत किए जाने में तेजी आई है। एक महीने में लगभग 1500 मामले निराकृत कर दिए गए हैं। हालांकि अब भी छतरपुर तहसील में साढ़े तीन हजार से ज्यादा मामले लंबित पड़े हुए हैं।

एसडीएम संतोष चंदेल ने बताया कि लंबित प्रकरणों के जल्द से जल्द से निपटाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शेष लंबित मामलों को तीन महीने में निराकृत कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देश पर एक लाख से पांच लाख की आबादी के बीच के तहसील क्षेत्रों में कार्य को विभाजित करने की दिशा में भी कदम उठाया गया है। एक अप्रेल से छतरपुर तहसील को दो भागों में विभाजित कर शहरी क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी अलग-अलग तहसीलदारों को दी गई है।

इस तरह हुआ तहसील क्षेत्र का विभाजन
एसडीएम ने बताया कि शहरी तहसील क्षेत्र में छतरपुर, ब्रजपुरा, सौंरा जैसे क्षेत्र को शामिल किया गया है। इसकी जिम्मेदारी तहसीलदार रविशंकर शुक्ला को सौंपी गई है जबकि ग्रामीण क्षेत्र में ईशानगर, महेबा और मातगुवां सर्किल को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि एक अप्रैल से यह नई व्यवस्था शुरू हो गई है। तहसील क्षेत्र में 76 पटवारी 83 हल्कों की जिम्मेदारी संभाले हैं। उन्हें जल्द से जल्द मामलों के निराकरण के निर्देश दिए गए हैं। स्टाफ की कमी के कारण भी मामलों के निराकृत होने में समस्या सामने आ रही है। उन्होंने बताया कि हमें 6 सर्किल के लिए 6 राजस्व निरीक्षकों की आवश्यकता होती हैै जबकि हमारे पास 4 राजस्व निरीक्षक है। इसी तरह नायब तहसीलदारों की कमी के कारण भी प्रकरण लंबित हैं।

कॉलोनाइजर्स पर दवाब बनाने रोके थे नामांतरण
छतरपुर तहसील में कोरोना काल में करीब 5000 नामांतरण के प्रकरण पेंडिंग हो गए थे। जिनमें से 4000 मामले लॉकडाउन के पहले के थे। तहसीलदार संजय शर्मा का कहना है कि बिना सुविधाओं वाली अवैध कॉलोनी बसाकर लोगों की कमाई लूटने वाले कॉलोनाइजरों पर दवाब बनाने के लिए नामांतरण पर अस्थाई रोक लगाई गई थी। ताकि कॉलोनाइजर रेरा के नियमानुसार कॉलोनी में सुविधाएं मुहैया कराएं। इसके साथ ही नई बसने वाली कॉलोनियों में लोगों को सुविधाएं मिल सकें।

अवैध कॉलोनी में प्लॉट बेचकर भाग जाते हैं कॉलोनाइजर
छतरपुर शहर में कॉलोनाइजर द्वारा कृषि भूमि पर आवासीय प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं। शासन द्वारा नियम के मुताबिक केवल 60 फीसदी भूमि पर ही प्लॉटिंग करना है, लेकिन अवैध कॉलोनियों में पूरी जमीन पर ही प्लॉटिंग कर दी जाती है। इन प्लॉटों को खरीदने वाले लोग अगल-अलग आवेदन लगाकर जमीन का डायवर्सन और नामांतरण कराते हैं। तहसील में इन प्लॉटों का डायवर्सन और नामांतरण होने पर कॉलोनाइजर कॉलोनी में सुविधाएं नहीं देते हैं। यहां तक कि नाली, बिजली और पानी की सुविधा भी इन कॉलोनियों में नहीं दी जाती है। एक अवैध कॉलोनी में दर्जनों लोग अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर प्लॉट लेते हैं। लेकिन उन्हें सुविधाएं नहीं मिल पाती है। डायवर्सन और नामांतरण होने के बाद प्रशासन भी कॉलोनाइजर पर कार्रवाई नहीं कर पाता है।

ये सुविधाएं है जरूरी
रेरा लागू होने के बाद जिले में जो भी कॉलोनी या प्रोजेक्ट है उनमें बिक्री करने से पहले की सीसी रोड, बिजली, पानी, नाली, पार्क आदि का निर्माण कराना आवश्यक हैं जिसके बाद ही वहां पर प्लॉट या मकान बनाकर बेचने की इजाजत होती है। यह सुविधाएं बिना दिए ही अगर कोई कॉलोनाइजर, बिल्डर या व्यापारी प्लॉट-मकान की बिक्री करता है तो उसपर कार्रवाई करने का प्रावधान है।

Dharmendra Singh
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