पानी की कमी से १९ हजार हेक्टेयर में बोई गई मूंगफली पर दीमक का हमला


नौगांव ब्लॉक में बाई गई मूंगफली बीमारी का शिकार, दवा भी नहीं मिल मुश्किल से
जिले में ८० हजार हेक्टेयर में बोई गई उड़द की फसल भी प्रभावित

By: Dharmendra Singh

Published: 13 Sep 2021, 06:24 PM IST


छतरपुर। पानी की कमी इस बार जिले के मूंगफली और उड़द के किसानों के लिए भारी पड़ रही है। नौगांव ब्लॉक के हरपालपुर के आसपास १९००० हेक्टेयर में बाई गई मूंगफली की फसल दीमक की चपेट में है। सोयाबीन की खेती छोड़कर मूंगफली की खेती शुरु करने वाले किसानों को दीमक की दवाई भी नहीं मिल पा रही है। वहीं, जिले में करीब ८० हजार हेक्टेयर में बोई गई उड़द भी पानी की कमी के चलते सूख गई है। जिले में अब तक ४२ इंच औसत बारिश की तुलना में केवल २६ इंच ही बारिश हुई है। ये बारिश भी फसल की जरूरत के मुताबिक सही समय पर नहीं हुई है।

दीमक चट कर रही किसान की मेहनत
जिले में इस बार बड़े पैमाने पर मूंंगफली की बुवाई हुई है। किसानों ने उड़द, मूंग और तिल भी लगाई है। मूंगफली में कीट और रोगों की समस्या नहीं होती है। इसलिए प्राकृतिक आपदाओं से त्रस्त से किसानों ने मूंगफली की खेती शुरु की, लेकिन मूंगफली बोने वाले किसान दीमक के हमले से परेशान हैं। फसल को दीमक ने अपनी चपेट में ले लिया है.। हरपालपुर के साथ ही दीमक की बीमारी ने छतरपुर तहसील के गांवो में असर डाला है। जहां किसान फसल को बचाने को लेकर चिंतित है। सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि किसानों को दीमक की दवा भी पर्याप्त नहीं मिल पा रही है। कृषि विभाग के पास दीमक के बचाव के लिए दवा वितरण का स्टॉक नहीं है। बाजार में भी दवा की कमी बनी हुई है।

ये कहना है किसानों का
इमलिया के किसान दीपचंद राजपूत का कहना है कि मूंगफली में दीमक लग रही है। जिससे मूंगफली के दाने खत्म हो रहे हैं। फसल सूखने लगी है। चपरन के किसान मनी कुशवाहा ने बताया कि पहले माहू का प्रकोप हुआ था, लेकिन चार दिन पहले बारिश होने से माहू की समस्या तो खत्म हो गई, लेकिन दीमक फसल का खा रही है। सरसेड़ के किसान घासीराम यादव का कहना है कि दीमक की दवाई भी बाजार में नहीं मिल पा रही है। कृषि विभाग भी दीमक की दवा उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।

बोबनी पहले से है प्रभावित
जिले में १ हजार ९९५ हेक्टेयर में अनाज की बोबनी हुई है। जबकि ७ हजार ३०० हेक्टेयर में धान, ज्वार, मक्का जैसे अनाज की बोबनी का लक्ष्य है। वर्ष २०२० में जिले में २हजार २०० हेक्टेयर में धान, ४ हजार ५०० हेक्टेयर में ज्वार की बोबनी हुई थी। वहीं, इस साल दलहन की बोबनी भी कम हुई है। अरहर, उड़द और मूंग की सिर्फ ४२ हजार ९५२ हेक्टेयर में ही बोबनी हुई है। जबकि पिछले साल ६३ लाख ३८ हजार हेक्टेयर में दलहन बोई गई थी। जिसमें उड़द २.२८ लाख हेक्टेयर में बोई गई थी। इस साल अब तक ८० हजार हेक्टेयर में ही उड़द बोई जा सकी है।

Dharmendra Singh
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