प्रशासन ने अवैध कब्जा होने पर पटवारी को हटाया, लेकिन नहीं रोका अवैध निर्माण

हाईकोर्ट ने वर्ष 2004 में श्मशान की भूमि खाली कराने के दिए थे निर्देश

हाईकोर्ट के आदेश पर राजस्व विभाग ने 2017 में दिए थे स्थगन आदेश

By: Dharmendra Singh

Published: 29 Mar 2019, 07:00 AM IST

छतरपुर। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा पर कार्रवाई के मामले में राजस्व विभाग की ढिलाई के कारण अवैध निर्माण बढ़ते ही जा रहे हैं। नया अवैध निर्माण बगौता हल्के के पुराना खसरा नंबर 1731/6 और नया खसरा नंबर 1731/128 में पानी टंकी के बगल में पहाड़ को 62 वाई 50 वर्गफीट इलाके में 15 फीट गहरा खोदकर अवैध निर्माण तहसीलदार के शासकीय निवास के बगल में किया जा रहा है। इसी अवैध निर्माण को न रोकने पर पूर्व एसडीएम ने बगौता पटवारी अखिलेश पटेल को हटा दिया था। इसके बाद बगौता हल्के का चार्ज ग्रामीण आरआइ जयप्रकाश शुक्ला को दिया गया। इसके बाद अवैध निर्माण की जांच के लिए दल बनाया गया। जांच दल नजूल आरआइ, राजस्व आरआइ और बगौता पटवारी की टीम के जांच प्रतिवेदन में यह साफ तौर पर लिखा गया कि पन्ना रोड पर तहसीलदार निवास के समीप भू-माफिया प्रेमी जैन के द्वारा शासकीय जमीन पर कब्जा कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इधर तहसीलदार खुद मान रहे हैं, कि अवैध निर्माण किया जा रहा है। लेकिन आरआइ का प्रतिवेदन का इंतजार करने की बात कह रहे हैं, जबकि जांच टीम का कहना है कि वे प्रतिवेदन सौंप चुके हैं। राजस्व अधिकारियों के इस रवैये का लाभ भूमाफिया उठा रहे हैं, जो हाईकोर्ट की रोक बाद भी श्मशान भूमि पर बिल्डिंग तान रहे हैं।
एफआइआर पर भी गोलमाल
हाईकोर्ट की रोक बाद इसी जमीन पर दूसरे अवैध निर्माण पर वर्ष 2017 में स्थगन आदेश के बाद भी अवैध निर्माण कर लिया गया। खसरा क्रमांक 1731 के बटांक 6 में भूमाफिया प्रेमचंद्र जैन के पुत्र विजय कुमार और विनय जैन ने पन्ना नाका इलाके के डेरा पहाड़ी में श्मशान की भूमि पर वर्ष 2017 में दुकानों का अवैध निर्माण शुरु कराया गया। हाईकोर्ट की रोक बावजूद कराए जा रहे निर्माण पर तहसीलदार न्यालायय से 10 मार्च 2017 को स्थगन आदेश जारी किया गया। लेकिन फिर भी निर्माण कार्य कराया गया। इस मामले में नायब तहसीलदार श्रीपत अहिरवार ने 7 मार्च 2019 को पत्र लिखकर थाना प्रभारी सिविल लाइन को आइपीसी की धारा 188 के तहत अवैध निर्माण कराने वाले लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में आरोपियों पर एफआइआर कराने के आदेश दिए गए थे। उधर सिविल लाइन थाना प्रभारी विनायक शुक्ला का कहना है कि, हमारे पास ऐसा कोई पत्र आया ही नहीं। तहसीलदार खुद मौके पर खड़े हों तो हम अवैध निर्माण गिरवा देंगे। इस तरह से प्रशासन भूमाफिया पर कार्रवाई करने के बजाए मामले को रफा-दफा कर रहे हैं।
याचिका पर हाईकोर्ट ने दिए थे ये आदेश
पन्ना नाका पर कलेक्टर बंगला के सामने डेरा पहाड़ी जैन मंदिर के गेट से लेकर रेडियो कॉलोनी के नाला तक खसरा नंबर 1731, रकबा 14 एकड़ 52 डिसीमल, श्मशान भूमि थी, जिसका सन 1956 में पट्टा सुरेन्द्र जैन के नाम बनाया गया। फिर प्रेमचंद्र जैन ने ये जमीन खरीदकर प्लॉटिंग कर दी। रेडियो कॉलोनी के आगे नाला खसरा नंबर 1809, रकबा 1 एकड़ 24 डिसीमल में 1822 की रजिस्ट्री वाले लोगों को प्रेमचंद्र जैन ने कब्जा दे दिया। वहीं डेरा पहाड़ी के खसरा नंबर 3214 और 3215, रकबा 3 एकड़ 65 डिसीमल जमीन पर प्रेमी जैन ने खसरा नबंर 1731 की रजिस्ट्री करवाने वाले लोगों को कब्जा दे दिया। इस मामले में सन 2000 में हाईकोर्ट में 6876 नंबर की जनहित याचिका लगाई गई। याचिका के आधार पर एक अप्रैल 2004 को हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन एवं राज्य प्रशासन को डेरा पहाड़ी पर स्थित अवैध भवनों को ढहाने का आदेश दिया , इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने इस भूमि घोटाले में लिप्त भू-माफियाओं एवं उनका साथ देने वाले राजस्व अधिकारियों पर एफआइआर दर्ज करने के भी आदेश दिए।
एफआइआर के लिए लिखा था
स्थगन के आदेश के बाद भी निर्माण कराया गया, इसलिए आइपीसी की धारा 188 के तहत विजय कुमार जैन व विनय कुमार जैन के खिलाफ एफआइआर कराने के लिए थाना प्रभारी सिविललाइन को पत्र लिखा गया था। हाईकोर्ट का आदेश भी है, कि इस जमीन पर किसी प्रकार का निर्माण नहीं कराया जा सकता है।
श्रीपत अहिरवार, नायब तहसीलदार
अवैध निर्माण कराए जाने की जानकारी है। इस मामले की जांच कर रहे पुराने पटवारी अखिलेश पटेल के द्वारा विलंब किए जाने पर उन्हें हटा दिया गया था। अब इस हल्का के नए पटवारी और आरआई को जांच सौंपी गई है। जैसे ही जांच प्रतिवेदन आता है कार्रवाई की जाएगी।
जन्मेजय मिश्रा, तहसीलदार
हमारे पास एफआइआर के लिए कोई पत्र नहीं आया है। सरकारी जमीन पर कब्जा हो रहा है तो तहसीलदार खुद खड़े होकर कब्जा हटवाएं, हम तैयार हैं।
विनायक शुक्ला, टीआइ, सिविल लाइन

Dharmendra Singh
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