युवा पीढ़ी को महापुरूषों से जोडऩे पिता ने शुरू की थी पेंटिंग, पिता की हसरत को पूरा करने बेटे ने थामी तूलिका

Neeraj Soni

Updated: 15 Aug 2019, 06:16:04 PM (IST)

Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। पिता का सपना था कि देश के महान शहीदों और महापुरूषों के बारे में युवा पीढ़ी को जोडऩे की जरूरत है यदि महापुरूषों के बारे में नई पीढ़ी को नहीं बताया जाएगा तो उन्हें इतिहास कैसे मालूम होगा। पिता ने महापुरूषों की मूर्तियां बनानी शुरू की लेेकिन अचानक उनके संसार से जाने के बाद उनकी हसरत पूरी करने बेटे ने बु्रश थाम लिया। अब तक सैकड़ों महापुरूषों की मूर्तियां बना चुके राजेश खरे संजू इस क्रम को जारी रखे हैं।
शहर के जाने-माने चित्रकार राजेश खरे संजू बताते हैं कि उनके पिता स्व. प्रेमकिशोर खरे ने 15 साल पहले महापुरूषों की मूर्तियों की चित्रकारी की थी उनका सपना था कि युवा पीढ़ी महापुरूषों के बारे में जाने। इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने 60-65 पेंटिंग तैयार की थीं जिसमें सरदार भगत सिंह, सुभाषचन्द्र बोस, स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरूष शामिल हैं। संजू ने बताया कि उनके पिता ही उनके गुरू रहे हैं, उनके मार्गदर्शन में पेंटिंग सीखी और आज वे अपने पिता के संकल्प को पूरा करने में लगे हैं। राजेश खरे संजू ने कहा कि युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों से जोड़े रखने के लिए वे लगातार इनकी पेंटिंग बनाने में लगे हैं। अब तक रविन्द्रनाथ टैगोर, राजाराम मोहन राय, लालबहादुर शास्त्री, तात्या टोपे, महात्मा गांधी, मुंशी प्रेमचन्द्र, रानी लक्ष्मीबाई, मंगल पाण्डेय, सरदार पटेल, डॉ. अम्बेडकर जैसे महापुरूषों की पेंटिंग तैयार कर चुके हैं। संजू ने अपने घर में महापुरूषों की पेंटिंग को सजाकर रखा है ताकि वहां आने वाले लोग भी पेंटिंग को देखें और महापुरूषों के जीवन से जुड़ी कथाओं को जानने के लिए उत्सुकता दिखाएं। उन्होंने कहा कि आज देश के वीर सपूतों, स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरूषों को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हम सबकी है।

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