VIDEO जो शिक्षक खुद हल कर सकेंगे 10वीं के प्रश्न पत्र, वही पढ़ाएंगे विद्यार्थियों को

Dharmendra Singh

Publish: May, 27 2019 06:00:00 AM (IST)

Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। माध्यमिक शिक्षा मण्डल भोपाल के 10वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणाम की समीक्षा की गई है। समीक्षा में पाया गया कि, कई स्कूलों में पास होने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत बेहद निराशाजनक रहा। ऐसे स्कूलों की समस्याओं को जांचने एवं शिक्षकों को बेहतर बनाने के लिए आगामी शिक्षण सत्र के लिए नई कार्ययोजना बनाई जा रही है। परीक्षा परिणाम बेहतर बनाने के लिए निर्णय लिया गया कि, बोर्ड परीक्षा के विद्यार्थियों को वहीं, शिक्षक पढ़ाएंगे जो पिछल चार साल के बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्रों की परीक्षा में पास होंगे। जो शिक्षक कुशल नहीं पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
60 प्रतिशत का रखा लक्ष्य
जिला शिक्षा अधिकारी संतोष शर्मा ने बताया कि ऐसे शिक्षक और प्राचार्य जिनके विद्यालयों में हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी के परीक्षा परिणाम बेहतर नहीं रहे उन स्कूलों के प्राचार्यों की वेतनवृद्धि रोकी जाएगी। उन्होंने बताया कि हर हाल में 60 प्रतिशत से अधिक छात्र उत्तीर्ण होने चाहिए। यदि किसी विद्यालय में संसाधनों की कमी है या शिक्षकों का अभाव है तो इसे भी दूर किया जाएगा। शर्मा ने सभी प्राचार्यों से साफ तौर पर कहा कि विद्यालयों में आगामी सत्र के लिए यह सुनिश्चित करें कि विद्यार्थियों की उपस्थिति ज्यादा से ज्यादा रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे स्कूल जहां शिक्षक समय पर नहीं पहुंचते उन शिक्षकों पर भी कड़ी कार्यवाही की जाएगी। बैठक की समीक्षा रिपोर्ट कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। जिन शिक्षकों का कार्य कुशल नहीं रहा उनके विरूद्ध कार्यवाही प्रस्तावित होगी।
129 स्कूलों का परिणाम घटा
जिला शिक्षा अधिकारी ने ऐसे 38 प्राचार्यों की एक-एक वेतन वृद्धि रोकने की कार्यवाही भी की जिनका कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष 20 प्रतिशत से अधिक गिरा है। समीक्षा बैठक में ये भी पाया गया कि, इस वर्ष कक्षा 10वीं का शासकीय स्कूलों का परीक्षा परिणाम 5.4 प्रतिशत गिरा है। 129 विद्यालय ऐसे है जिन्होंने गतवर्ष की तुलना में इस वर्ष अपना परिणाम कम दिया है। 81 स्कूलों ने अपना रिजल्ट बेहतर किया है।
इन कारणों से गिरा रिजल्ट
समीक्षा बैठक में चर्चा के दौरान परीक्षा परिणाम को कम करने वाले निम्न कारण निकलकर सामने आए हैं। पिछली कक्षाओं के छात्रों का ज्ञान स्तर न्यून तथा मिडिल स्कूलों में अंग्रेजी तथा गणित के शिक्षकों की कमी, विद्यालयों में छात्रों की अनियमित उपस्थिति, विद्यालयों का वातावरण शैक्षिक एवं सहानुभूति पूर्ण न होना, विद्यालयों में नियमित प्राचार्य एवं पर्याप्त शिक्षकों की पदस्थापना न होना, भौतिक संसाधनों की कमी, मजदूर वर्ग के परिवारों की काम की तलाश में अन्य स्थानों पर जाना जैसे कारणों ेसे सरकारी स्कूलों का रिजल्ट गिरा है।
नई कार्ययोजना बनाने के निर्देश
जिला शिक्षा अधिकारी ने समस्त प्राचार्यों को निर्देशित किया कि वे अपने विद्यालय का परीक्षा परिणाम बेहतर लाने की एक विस्तृत कार्य योजना तैयार कर 28 मई तक अपने बीईओ के पास जमा करें। जिसके आधार पर जिले की कार्य योजना तैयार कर उस पर स्कूल खुलते ही अमल किया जा सके। बैठक में सहायक संचालक शिक्षा जेएन चतुर्वेदी, डीपीसी एचएस त्रिपाठी, एडीपीसी आरएमएसए एचएस दीक्षित स्टेनो केके खरे, एपीसी रामहित व्यास भी उपस्थित रहे।
बना रहे नई कार्ययोजना
स्कूलों के परिणाम की समीक्षा की गई है, किन कारणों से रिजल्ट गिरा या जिन स्कूलों में रिजल्ट बेहतर रहा तो किन कारणों से बेहतर रिजल्ट आया। समीक्षा के बाद रिजल्ट सुधारने के लिए नई कार्ययोजना बनाई जा रही है, ताकि सभी स्कूलों का रिजल्ट कम से कम 60 प्रतिशत रहे।
एसके शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी

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