scriptThe tradition has been kept alive from generation to generation | पीढिय़ों दर पीढ़ी जीवित रखे है परंपरा, कई जिलों में दीपावली पर घरों को करते है रौशन | Patrika News

पीढिय़ों दर पीढ़ी जीवित रखे है परंपरा, कई जिलों में दीपावली पर घरों को करते है रौशन


नौगांव की कुम्हारटोली के कलाकार गढ़ रहे लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां, डिजाइनर दिए भी
छतरपुर के अलावा टीकमगढ़, झांसी, महोबा जिले तक होती सप्लाई

 

छतरपुर

Published: October 29, 2021 06:19:45 pm


नौगांव। रोशनी के महा पर्व में महज कुछ ही दिन शेष बचे हुए है। नौगांव शहर से लगी बिलहरी पंचायत के एक छोटे से गांव कुम्हार टोली में लगभग एक सैकड़ा कुम्हार परिवार दीपक व मूर्तियों को अंतिम रुप देने में जुटे हैं। पीढिय़ों से परंपरा को जीवित रहे कुम्हार टोली के कलाकार मिट्टी के सभी तरह के दीपक और लक्ष्मी गणेश मूर्तियों को बना रहे हैं, जिनकी मांग न केवल छतरपुर जिले में है, बल्कि आसपास के कुछ जिलों तक दीपावली के दिन इनके दिए जगमग रौशनी करते हैं।
पूरे परिवार की मेहनत से तैयार होते हैं दीए
पूरे परिवार की मेहनत से तैयार होते हैं दीए
पूरे परिवार की मेहनत से तैयार होते हैं दीए
कुम्हार टोली के कलाकार परिवार सहित दीपावली पर्व के दो तीन माह पहले से ही करवा,दीपक के अलावा लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां बनाने का कार्य शुरू कर देते है। इस काम मे हाथ बंटाने के लिए 5 साल के बच्चे से लेकर 75 साल के बुजुर्ग दिन रात मिट्टी से हाथापाई कर दूसरों के घरों में उजाला करने दीपक बनाने में जुटे रहते हैं। दीपावली के नजदीक आते ही दीपक व गणेश,लक्ष्मी,ग्वालन की मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए है। मटका, कुल्हड़,करवा,दीपक लक्ष्मी,गणेश की मूर्ति अगरबत्ती दान के अलावा मिट्टी के खिलोने बनाए जा रहे हैं। इनको बनाने में परिवार के सभी छोटे बड़े सदस्य एक दूसरे की मदद करते हैं। बच्चे मिट्टी छानते व गूंधते हैं तो बड़े गुंधी हुई मिट्टी से चाक के माध्यम से यह सारी वस्तुएं बनांते हैं। महिलाएं इनमे रंग रोगन भरने से लेकर सामग्री को उठाने रखने का कार्य मे लगी रहती है ।
महंगाई का पड़ रहा असर
मिट्टी का सामान नौगांव नगर सहित छतरपुर, महाराजपुर, टीकमगढ़,पलेरा, कुलपहाड़,बेलाताल,राठ,झांसी सहित अन्य शहरों में माल सप्लाई होता है लेकिन इस बार महंगाई बढऩे से हमारे रोजगार पर भी असर पड़ा है। कुम्हार टोली निवासी बबलू प्रजापति,राकेश राममिलन,नंदू,ब्रजकिशोर,बैजनाथ,सुरेन्द्र,राजू,रमेश ने बताया की इस साल महंगाई का ज्यादा असर देखा गया जो मिट्टी लाने से लेकर तैयार माल ले जान के लिए ट्रैक्टर के भाड़ा में बढ़ोतरी हुई है। वारिश का मौसम समाप्त होते ही मिट्टी को खरीदकर लाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा हमारे काम को बढ़ावा देकर हमे मूलभूत सुविधाओं को मुहैया कराने में मदद करेगी। तो हम इस काम को और बेहतर करने के प्रयास करेंगे फिर भी हम सभी यही कोशिश करते है कि हमारा माल ज्यादा से ज्यादा सप्लाई हो सके। जिससे अपने यहां चाइना व चिमनी मिट्टी से बना समान हावी न हो सके ।

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