जनवरी में ही आने लगी जल संकट की आहट, नहीं चेते तो होगा भीषण जलसंकट

जनवरी में ही आने लगी जल संकट की आहट, नहीं चेते तो होगा भीषण जलसंकट

Unnat Pachauri | Publish: Jan, 14 2019 08:01:22 PM (IST) Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

कई गांवों में अभी से करनी पड़ रही पानी के लिए कड़ी मशक्कत

उन्नत पचौरी

छतरपुर। कम बारिश के कारण जिले में जनवरी माह में ही जल संकट अपने पांव पसारने लगा है। अभी से ही जिले की ४७ नल-जल योजनाएं और ४१६ हैंडपंप बंद हो गए हैं। यदि ऐसी ही स्थ्तिी रही तो जिले में जल संकट की स्थिति विकराल हो सकती है। हालाकि विभाग ने कमर कस ली है। विभाग द्वारा आगामी 15 जनवरी से एक महीने तक बंद हैंडपंपों को चालू करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं हो रहा है। बीते साल जिले में कम बारिश होने के भूजल स्तर में कमी है। इससे इस बात की आशंका पहले से थी कि जिले में इस बार गर्मी शुरू होने के पहले से ही जल संकट की स्थिति निर्मित हो जाएगी। गांवों में पेयजल की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। जल स्तर में लगातार गिरावट आने के कारण हैंडपंप और नल-जल योजनाओं के जल स्रोत लगातार जवाब देते जा रहे हैं। जिले के ग्रामीण अंचलों में 1०२१२ हैंडपंप हैं और इनमें से ४१६ अभी से बंद हो गए हैं। इनमें जल स्तर कम होने के कारण कई हैंडपंप बंद हैं। इसी तरह जिले की ३४८ नल-जल योजनाओं में से ४७ बंद पड़ी है। इनमें से जल स्रोत असफल होने के कारण 1५ योजनाएं बंद हैं। जिले में जल स्तर कितनी तेजी से गिर रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1 अप्रैल से अभी तक दो सौ से अधिक हैंडपंपों में राइजर पाइप बढ़ाए जा चुके हैं। इसके साथ ही कई नए बोर भी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद यह स्थिति सोचनीय बनी हुई है। हालाकि विभाग द्वारा २५ नई नल-जल योजनाओं का प्रस्ताव भेजा है जिसमें से कुछ पर कार्य किया जा रहा है और कुछ पर जल्द की कार्य शुरू कराने के लिए टैंडर प्रक्रिया चल रही है।
अभी से सूख गए बोर :
जिले में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। यही कारण है कि हैंडपंप और जल स्रोत लगातार दम तोड़ते जा रहे हैं। खासतौर से बकस्वाहा, बड़ामलहरा, गौरिहार, नौगांव व बिजावर ब्लॉक में हालत अभी से बेहद खराब है। यहां के गांव की स्थिति यह है कि यहां नल-जल योजना के अधिकांश बोर सूख चुके हैं। इसके चलते यहां पर नया बोर खनन करने की तैयारी है। इसी तरह कई स्थानों में नल-जल योजना के बोर से कम पानी आ रहा है। इसलिए इसे भी साफ करने की तैयारी ग्राम पंचायत द्वारा की जा रही है। अन्य कई गांवों में भी पानी की स्थिति खराब होती जा रही है।
जरूरत पड़ी तो गहरे बोर होंगे :
सूखे की संभावना को देखते हुए विभाग ने सूखा राहत के तहत नई योजनाओं व हेंडपंपों का प्रस्ताव भिजवाया था। हर साल की तरह इस साल भी इसके बदले तो कोई राशि नहीं मिली है। लेकिन विभाग को यह अनुमति जरुर मिल गई है कि जल स्तर गिरने से यदि जरूरत पड़ी तो विभाग और फीट गहरे बोर तक कर सकेगा। इसके साथ ही गहरे जल स्तर वाले हैंडपंपों से पानी निकालने के लिए सिंगल फेस सब मर्सिबल पंप भी मुहैया कराए जा रहे हैं।
विभाग हुआ अलर्ट, अभियान चलाकर सुधारेंगे हैंडपंप :
पीएचई विभाग ने अभी से जल संकट की स्थिति को काबू में रखने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। विभाग आगामी 15 जनवरी से 15 फरवरी तक हैंडपंप व नल-जल योजनाओं का विशेष संधारण अभियान चलाएगा। इसमें बंद हैंडपंपों को सुधार कर चालू किया जाएगा। जो हैंडपंप चालू हैं उनकी ग्रीसिंग और आवश्यक मरम्मत की जाएगी। असुधार योग्य हैंडपंपों को निकालकर बंद किया जाएगा। फूट या खराब राइजर पाइपों को बदला जाएगा, जल स्तर में गिरावट को देख कर राइजर पाइप बढ़ाए जाएंगे। इस अभियान के साथ-साथ ही योजनाओं का भौतिक सर्वेक्षण भी किया जाएगा।
ये रहे आंकड़े :
जिले में हैंडपंपों की स्थिति
कुल हैंडपंप- १०२१२
चालू हैंडपंप- ९७९६
बंद हैंडपंप- ४१६
सुधार योग्य- ६१
जल स्तर गिरने से बंद- ०
अन्य कारण से बंद- ३५५
जिले में नल-जल योजनाओं की स्थिति :
कुल योजनाएं- ३४८
चालू योजनाएं- ३०१
बंद योजनाएं- ४७
जल स्तर गिरने से बंद- १५
स्थाई कनेक्शन नहीं- ५
मोटर पंप खराब होने से- ५
कई कारणों से बंद- १७
नए प्रस्ताव- २५
इनका कहना है :
आगामी दिनों में जल संकट की स्थिति को देखते हुए विभाग पूरी तरह सतर्क है और जल संकट से निपटने के लिए अभी से जमीनी स्तर पर कार्य शुरू कर दिया है। साथ ही एक विशेष अभियान चलाकर हैंडपंपों और नल-जल योजनाओं के सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं नए बोर भी खनन किए जाएंगे।
- एसके जैन, ईई पीएचई छतरपुर

जल संकट की आहट

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