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छतरपुर

रिश्वतखोर ग्राम पंचायत सचिव को तीन साल की कठोर कैद

पटवारी के द्वारा किसान से सीमांकन के एवज में 15 हजार रूपए की रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होने के बाद उसे सस्पेंड कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने के बाद कलेक्टर ने एसडीएम को निर्देशित करते हुए पटवारी को सस्पेंड करा दिया।

छतरपुरJun 15, 2024 / 11:06 am

Dharmendra Singh

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रिश्वत की रकम गिनता पटवारी

छतरपुर. साल 2019 में खेत में बाउंड्रीवॉल निर्माण करने के एवज में 10 हजार की रिश्वत लेते लोकायुक्त पुलिस ने ग्राम पंचायत सचिव को रंगेहाथ पकड़ा था। कोर्ट ने आरोपी सचिव को रिश्वत के मामले में तीन साल की कठोर कैद के साथ दो हजार रुपए के जुर्माना की सजा दी है।
एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि फरियादी रहमान बक्ष सौदागर ने 3 अप्रेल 2019 को लोकायुक्त पुलिस में शिकायत की थी कि ग्राम पंचायत खौंप (निवारी) का सचिव मनोज खरे खेत में बाउंड्रीवॉल बनाने के एवज में 10 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है। वह सचिव को रिश्वत नही देना चाहता और उसे रंगे हाथो पकड़वाना चाहता है। लोकायुक्त पुलिस ने रहमान को वॉयस रिकॉर्डर देकर सचिव मनोज खरे की रिश्वत मांगने की बात रिकॉर्ड कराई। 4 अप्रेल 2019 को ट्रेप दल फरियादी रहमान को लेकर छतरपुर आया। मोटे के महावीर मंदिर के पास सचिव मनोज खरे ने जैसे ही रहमान से रिश्वत की राशि ली तभी ट्रेप दल ने घेरा बंदी करके सचिव मनोज को रंगे हाथो गिरफ्तार किया।

न्यायाधीष अरविंद कुमार जैन की कोर्ट ने सुनाई सजा


अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजन केके गौतम ने पैरवी करते हुए दलील रखी कि भ्रष्टाचार से जनता की नजर में लोकसेवको की विश्वसनीयता कम हो रही है। भ्रष्टाचार से व्यक्ति का नैतिक और चारित्रिक पतन होता है। भ्रष्टाचार ने जनता की दृष्टि में अधिकारियों की विश्वसनीयता को कम कर दिया हैं। भ्रष्टाचार से देश की आर्थिक विकास की दिशा अवरुद्ध हो जाती है। इस समस्या ने समाज में सभी साधारण व्यक्तियों के जीवन को कष्टप्रद बना दिया है और गरीब व्यक्तियों के जीवन जीने के प्राकृतिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए आरोपी को कठोर से कठोर सजा दी जाए। विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार जैन की अदालत ने फैसला सुनाया कि भ्रष्टाचार किया जाना एक विकराल समस्या हो गई है, जो समाज को खोखला कर रही है। भ्रष्टाचार लोकतंत्र और विधि के शासन की नींव को हिला रहा है। ऐसे मामलो में आरोपी को सजा देते समय नरम रुख अपनाया जाना विधि की मंशा के विपरीत है। कोर्ट ने आरोपी सचिव मनोज को दोषी ठहराते हुए भ्रश्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तीन साल की कठोर कैद के साथ दो हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई।

रिश्वत लेते पटवारी का वीडियो वायरल, निलंबित किया


जिले की घुवारा तहसील में पदस्थ एक पटवारी के द्वारा किसान से सीमांकन के एवज में 15 हजार रूपए की रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होने के बाद उसे सस्पेंड कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने के बाद कलेक्टर ने एसडीएम को निर्देशित करते हुए पटवारी को सस्पेंड करा दिया।

ये है मामला


बीते रोज छतरपुर जिले के घुवारा तहसील क्षेत्र में कुड़ेला हल्का में पदस्थ पटवारी वीरसिंह सेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें पटवारी के द्वारा एक किसान से सीमांकन के एवज में 15 हजार रूपए रिश्वत मांगी गई थी और वे 7 हजार रूपए पहले ले चुके थे जबकि 7 हजार रूपए गिनते हुए कैमरे में कैद हुए थे। इस वीडियो के सामने आने के बाद कलेक्टर संदीप जीआर ने एसडीएम बड़ामलहरा प्रशांत अग्रवाल को मामले की जांच के लिए निर्देशित किया है। एसडीएम ने सबसे पहले तो पटवारी को निलंबित कर दिया और अब मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया गया है कि इस वीडियो में पटवारी कुड़ेला निवासी कन्हैयालाल किसान से उसकी भूमि का सीमांकन करने के एवज में रिश्वत ले रहा था।


इनका कहना है


वीडियो के सामने आने के बाद पटवारी को निलंबित किया गया है। पूरे मामले की जांच कर उचित कार्यवाही की जाएगी।
प्रशांत अग्रवाल, एसडीएम, बड़ामलहरा

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