scriptTractor trolleys without numbers are proving fatal on the highway | हाइवे पर जानलेवा साबित हो रहीं धूल-मिट्टी सनी बिना नंबर की ट्रैक्ट्रर ट्रॉलियां | Patrika News

हाइवे पर जानलेवा साबित हो रहीं धूल-मिट्टी सनी बिना नंबर की ट्रैक्ट्रर ट्रॉलियां


रेडियम पट्टी न होने से सड़क पर ट्रॉलियों के खड़े होने का पता न चलने से हो रहे हादसे

छतरपुर

Updated: April 03, 2022 07:12:32 pm


छतरपुर। जिला मुख्यालय से लेकर गांव-गांव और हाइवे पर धूल-मिट्टी से सनी बिना नंबर की ट्रैक्ट्रर ट्रॉलियां जानलेवा हादसे का कारण बन रही है। जिले में हर साल 700 सड़क हादसों में 200 लोगों की मौत हो रही है। इन हादसों में 20 फीसदी हादसे ट्रैक्ट्रर-ट्रॉलियों से हो रहे हैं। इन ट्रॉलियों में न तो लाइट होती है न ही रेडियम स्ट्रीप का इस्तेमाल हो रहा है। जिसके चलते सड़क पर अंधेरे में मौजूद ये ट्रॉलियां सड़क दुर्घटना का कारण बन रही हैं। ज्यादातर ट्रैक्टर ट्रॉली बिना परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराए चल रहे हैं। परिवहन विभाग में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक कागजों में ये ट्रैक्टर-ट्राली कृषि कार्य के लिए हैं, लेकिन इनका ज्यादातर इस्तेमाल सड़कों पर माल ढोने में किया जा रहा है।
 जिले में हर साल 700 सड़क दुर्घटनाएं, 200 मौतें, 20 फीसदी की वजह बन रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली
जिले में हर साल 700 सड़क दुर्घटनाएं, 200 मौतें, 20 फीसदी की वजह बन रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली

हर साल सड़क हादसे में मारे जा रहे 200 लोग
यातायात पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2021 में जनवरी से लेकर दिसंबर तक कुल 731 सड़क दुर्घटनाएं जिले भर में घटित हुई हैं। इन हादसों में जिले भर में 247 लोगों की मौतें हुईं जबकि 628 लोग जख्मी हुए हैं। वहीं, वर्ष 2020 में जनवरी से दिसम्बर तक 741 दुर्घटनाएं सामने आयीं थीं जिसमें 641 लोग घायल हुए जबकि 270 लोगों की जान चली गई थी। वर्ष 2019 में जिले भर में 760 दुर्घटनाएं घटित हुईं जबकि 273 लोगों की मौत हुई। 2019 में दुर्घटनाओं के कारण 696 लोग जख्मी भी हुए थे। इस साल केवल दो महीने में 121 हादसों में 53 की मौत हुई है और 94 लोग घायल हुए हैं।

बिना नंबर लिखवाए चलते है ट्रैक्टर
अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉली पर नंबर नहीं लिखे हैं। परिवहन विभाग के मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक कोई भी वाहन एजेंसी से रजिस्ट्रेशन होने के बाद ही वाहन स्वामी ट्रैक्टर ले जा सकता है। लेकिन बिना नंबर लिखवाए कोई भी गाड़ी सड़क पर नहीं चल सकती है। बिना नंबर लिखवाए गाड़ी चलने पर 2000 रुपए जुमार्ना लगता है। इंश्योरेंस नहीं होने पर 3000 रुपए तथा रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर 2000 रुपए जुर्माना के साथ वाहन की जब्ती और राजसात की कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते कार्रवाई नहीं होती है।
छतरपुर में मात्र 122 ट्रैक्टर दे रहे टेक्स, बाकी कर रहे टेक्स चोरी
मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में केन नदी की रेत के कारण चर्चित छतरपुर जिले में लगभग हर सड़क पर रेत लादे ट्रैक्टर घूमते मिल जाएंगे। लेकिन पूरे जिले में मात्र 122 टै्रक्टर ही व्यवसायिक श्रेणी में रजिस्टर्ड हैं। बाकी के 18 हजार 137 टै्रक्टर केवल खेती का काम करने के लिए परिवहन कार्यालय में पंजीकृत हैं। इससे साफ है कि ज्यादातर टै्रक्टर टेक्स की चोरी कर शासन को चूना लगा रहे हैं। जिले में टै्रक्टरों से खेती के काम के अलावा कई लोग उनका खुलेआम व्यवसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं। इन टै्रक्टरों से रेत, ईंट, गिट्टी, बोल्डर, मुरम आदि की भाड़े पर ढुलाई की जा रही है। व्यवसायिक श्रेणी में टै्रक्टरों का रजिस्ट्रेशन कराने पर 6 प्रतिशत टेक्स देना पड़ता है। जबकि कृषि कार्य के लिए रजिस्ट्रेशन में टै्रक्टरों को कर मुक्त रखा गया है।

फैक्ट फाइल
तीन साल में हादसे- 2232
तीन साल के हादसों में मौत- 790
तीन साल में घायल- 1965

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