ट्रैफिक जाम बन गया शहर की पहचान, यातायात थाना में बल की कमी से नही हो पा रहा समाधान

पत्रिका अभियान- जाम से कैसे मिले राहत
जाम से शहर का ट्रैफिक बेजार, कदम- कदम पर थम जाती है वाहनों की रफ्तार
बेतरतीब पार्किंग एवं सड़कों तक दुकान का सामान बड़ी वजह

By: dharmendra singh

Published: 19 Jan 2019, 09:00 AM IST

छतरपुर। जिला मुख्यालय की सड़कों पर जाम से ट्रैफिक व्यवस्था बेजार है। प्रमुख मार्ग हो या बाजार की सड़कें सभी पर ट्रैफिक जाम से लोग हलाकान है। शहर के एक कोने से दूसरे कोने में जाने के लिए अधिकतम 30 मिनट की बजाए एक घंटा तक समय लग रहा है। ट्रैफिक की इस खराब हालत से इमरजेंसी में मुसीबत ज्यादा हो जाती है। अस्पताल पहुंचना हो, बस या ट्रैन पकडऩा हो, ट्रैफिक जाम के कारण परेशानी बढ़ जाती है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयास भी किए गए। बाजार की सड़क को वन-वे किया गया, प्रमुख मार्ग का चौड़ीकरण करके डिवाइडर बनाए गए, लेकिन व्यवस्था सुधर नहीं सकी। वन-वे का पालन नहीं होने और डिवाइडर बनाने के बाद सड़क से बिजली के खंभे नहीं हटाए जाने के कारण ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या बन गई है।
यहां दिनभर रहता है ट्रैफिक जाम :
शहर के सभी इलाके में ऐसे स्थान हैं,जहां ट्रैफिक जाम हर घंटे लगता है। खासकर बाजार वाले इलाके में समस्या ज्यादा है। बाजार में सुबह से लेकर देर रात तक जाम की स्थिति रहती है। वहीं बस स्टैंड रोड पर भी जाम लगना आम बात हो गई है। इसके साथ ही चौक बाजार, कोतवाली के पास, महलन, स्टेट बैंक मैन ब्रांच के समाने, पीएनबी बैंक के सामने, कल्याण मंडपम के सामने, डाकखाना चौराहा, हटवारा बाजार में हर समय जाम से गुजरना पड़ता है। शहर के दोनों प्रमुख मार्ग कानपुर -सागर नेशनल हाइवे और रीवा-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कभी भी जाम लग जाता है। शहर के सभी चौराहे और तिराहे से बिना जाम का सामना करे गुजरना मुश्किल है। जहां सुबह के समय शहर की सड़कें खाली रहती है, वहीं दोपहर और शाम को वहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है। सड़क पर वाहनों की भारी संख्या, सड़क तक पसरी दुकानें और पार्किंग की जगह नहीं होने से बेतरतीब वाहन पार्किंग के कारण जगह-जगह जाम लगता है। शहर के लोगों का कहना है कि ट्रैफिक के लिए जरूरी पांच सुधार कर लिए जाए तो,शहर के ट्रैफिक को रफ्तार मिल सकती है। जाम लगने के पीछे पार्किंग, ट्रैफिक सिग्नल, सड़क पर दुकानों का सामान, सड़क पर बिजली के खंभे और 3000 गौवंश का सड़क पर रहना प्रमुख कारण है। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन ने अभी तक जाम को लेकर कोई कारगार उपाय नहीं किए हैं। यही वजह है कि जाम की समस्या नगर में दिन प्रतिदिन गहराती जा रही है। जाम के कारण लोगों का समय बर्बाद हो रहा है।
स्टाफ की कमी बनी बाधक :
शहर की आबादी और वाहनों की संख्या बढऩे के साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए यातायात पुलिस थाना शुरु किया गया। थाना के साथ ही स्टाफ के लिए पद भी स्वीकृत किए गए, लेकिन कभी यातायात थाना को पूरा स्टाफ मिल नहीं पाया। यही वजह है, कि शहर में ट्रैफिक के लिए बनाए गए 20 प्वॉइंटों पर यातायात पुलिस के जवान तैनात नहीं हो पाते हैं। अधिकतम 10 प्वॉइंट पर ही पुलिस के जवान ट्रैफिक व्यवस्था संभालते हैं, बाकी 10 जगह खाली ही रहती है। इसके अलावा वीआइपी ड्यूटी में भी स्टाफ की ड्यूटी लगती है। इस वजह से यातायात थाना पुलिस के जवान ट्रैफिक व्यवस्था संभाल ही नहीं पाते, इसलिए ट्रैफिक जाम और ट्रैफिक से जुड़ी अन्य तरह की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
जल्द मिलेगा स्टाफ :
अभी हाल ही में दो सूबेदार यातायात थाना में पदस्थ किए गए हैं, वरिष्ठ अधिकारियों से स्टाफ की मांग की गई है, जल्द ही स्टाफ की कमी दूरी हो जाएगी। पर्याप्त स्टाफ रहने पर ट्रैफिक के सभी प्वॉइंट की व्यवस्था सुधर जाएगी।
पूर्णिमा मिश्रा, प्रभारी यातायात थाना
फैक्ट फाइल
स्वीकृत पद उपलब्ध स्टाफ खाली पद
टीआइ 1 1 0
सूबेदार 3 2 1
सब इंस्पेक्टर 1 0 1
एएसआइ 6 2 2
प्रधान आरक्षक 9 6 3
आरक्षक 44 20 24
फैक्ट फाइल
रजिस्टर्ड वाहन- 2.50 लाख
ट्रकों की संख्या- 2500
बसों की संख्या-500
नेशनल हाइवे पर ट्रैफिक दबाव- 10 हजार वाहन प्रतिदिन
एक्सीडेंट- 4 से 5 रोजाना

 

dharmendra singh Desk
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