ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक स्थल, सडक किनारे रोपे गए पौधे नहीं बन पाए पेड़


तार फेंसिंग पर भी हुआ खर्च, लेकिन सरंक्षण ने होने से पौधारोपण में खर्च करोड़ो रुपए हुए बेकार
बड़ामलहरा विकासखंड में इस बार अंकुर अभियान में रोपे 36 हजार पौधे

By: Dharmendra Singh

Updated: 04 Oct 2021, 06:02 PM IST



बड़ामलहरा। पर्यावरण को बढाना और हितग्राहियों की आजीविका को सुरक्षित करने के उद्देश्य से जनपद क्षेत्र में अंकुर अभियान अंतर्गत पौधा रोपण कराया जा रहा है। विकासखंड क्षेत्र में 40 हजार से अधिक पौधे रोपनें का लक्ष्य तय किया गया है। विभाग के अनुसार सार्वजनिक स्थल, सडक के मुख्य मार्ग, गौशालाओं व नंदन फलोद्धान में अभी तक 36 हजार से अधिक पौधे रोपित हो चुके है। इसमें छाया व फलदार पौधे शामिल है। अंकुर अभियान में हजारों पौधे रोपनें के लिए सरकार ने ग्राम पंचायतों को लाखों रुपये का बजट आवंटित किया है। पौधे रोपकर पर्यावरण को संरक्षित करना और हितग्राहियों की आय को बढाकर उनकी आजीविका को सुरक्षित करने की इस योजना पर समुचित ढंग से काम किया गया तो निश्चित की इसके दूरगामी परिणाम हितकारी होगें। लेकिन पौधा रोपण के पिछले परिणाम देखें तो वह संतोषजनक नहीं रहे। विकाखंड अंतर्गत ग्राम पंचायतों में हर वर्ष हजारों की तादाद में पौधे रोपे जाते है और उनकी सुरक्षा के लिए तार बाडी का इंतजाम भी किया गया है। रोपड से लेकर सुरक्षा हेतु लाखों रुपये का बजट खर्च किया जा चुका है फिर भी गांव के मुख्य मार्ग, शाला परिसर, पंचयात भवन या फिर अन्य सार्वजनिक स्थलों पर हरियाली नजर नहीं आ रही।

अंकुर अभियान एक अच्छी पहल
पर्यावरण व अभियान से जुडे हितग्राहियों के लिए सरकार की यह एक अच्छी पहल है। शासन की नीति के अनुसार हितग्राही व अधिकारी काम करें तो निश्चित ही पर्यावरण में वृद्धि व ग्रामीणों की आय बढेगी। योजना अनुसार विकासखंड क्षेत्र में कंजी, शीशम, महुआ, नीबू, आवला, जामुन के पौधे रोपे गये है। एपीओ दिनेश गुप्ता बताते है कि, अंकुर अभियान के अंतर्गत फलदार पौधों में लंगडा, चौसा व दशहरी आम एवं ताइवानी पिंक अमरूद, एप्पल बेर के पौधे भी हितग्राहियों को दिये गये हैं। हाईब्रिड के फलदार पौधों का अगर उचित रखरखाव रहा तो यह निश्चित ही ग्रामीणों की आय वृद्धि का स्रोत होंगे। वह बताते है कि, यह अन्य पौधों की अपेक्षा जल्दी फल देनें लगते है। वर्ष 2021-22 के पौधारोपण में नरेगा अंतर्गत 71 हितग्राहियों के यहां नंदन फलोद्धान लगाये गये है। नंदन फलोद्धान के तहत 1 एकड में 250 पौधे लगाये गये है। प्रत्येक फलोद्धान पर 1 लाख 45 हजार रुपये व्यय किए जा रहे हैं। तारवाडी पानी एवं सुरक्षा रखने वाले हितग्राहियों को नंदन फलोद्धान की प्राथमिकता दी गई है।

इधर, लाखों रुपये खर्च लेकिन पेड गायब
राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत वर्ष 2007-08 में पौधारोपड के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गये। सडक किनारे सार्वजनिक स्थलों पर पौधे रोपना बताया गया है। परंतु 13 वर्ष का लंबा समय गुजरने के बाद भी यह पौधे पेड के रूप में नजर नहीं आ रहे। अब सवाल यह है कि, क्या पौधा रोपड के नाम पर घोटाला किया गया है। पूछने पर भी इसका जबाव किसी अधिकारी के पास नहीं है। पौधारोपण अभियान के तहत 79 में 69 ग्राम पंचायतों के मुख्य मार्ग किनारे पौधा रोपण किया गया। इस कार्य में एक दर्जन स्व सहायता समूह की भी सहभागिता रही है। करोड़ों रुपया ब्यय किये जाने के वावजूद एक भी पौधा दिखाई नहीं दे रहा जबकि, पौधों की सुरक्षा पर ग्राम पंचायतों द्वारा वर्ष 2011 तक राशि व्यय की जाती रही है फिर आखिर वह पौधे कहां गये।

बमनौराकलां पंचायत द्वारा सबसे अधिक पौधारोपण कराया गया जिसमें एक एक हैक्टेयर मे 3 एवं दस हैक्टेयर में 1 नर्सरी लगाई गई। इसमें पांच हैक्टेयर में तार फ्रैसिग सहित नर्सरी शामिल है। इसके अलावा 2 किलोमीटर सडक किनारे पौधारोपण भी किया गया। लाखों रुपये खर्च होने पर भी धरातल पर कुछ नहीं है। ग्राम पंचायत सेंधपा द्वारा पुलिस चौकी, सेवा सहकारी समिति, माध्यमिक शाला मे तार फ्रैसिग सहित पौधारोपण पर राशि ब्यय की गई। इतना ही नहीं 33 ग्राम पंचायतो द्वारा खाली पड़ी भूमि पर तार फैंसिंग सहित पौधारोपण तो किया गया किन्तु पेड़ गायब हो गये। इस संबंध मे जिम्मेवार अधिकारी भी कुछ कहने से कन्नी काट रहे है।


8 ग्राम पंचायतों में 1 करोड रुपये की योजना
वर्ष 2020 में जनपद क्षेत्र की 8 ग्राम पंचायतों में पौधारोपड के लिए 1 करोड रुपये से अधिक की कार्य योजना बनाई गई। योजना अंतर्गत ग्राम पंचायत बछरावनी, वीरों, भगवां, भेल्दा, देवपुर द्वितीय, खरदोती, लिधौरा व सरकना में पौधा रोपड कार्य स्वीकृत हुआ है। नंदन फलोद्धान, हितग्राही मूलक प्लांटेशन, व ब्लॉक प्लांटेशन के नाम पर पेड लगाये गये। इन पौधों के रोपड व सुरक्षा के नाम पर 8 लाख रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई है। परंतु पौधों का समुचित रखरखाव न होनें से नष्ट हो चुके है। बताते है कि, ग्राम पंचायत भगवां में 7. 88 लाख रुपये, ग्राम पंचायत खरदोती में 8 लाख रुपये व ग्राम पंचायत सरकना में 14.99 लाख रुपये ब्लॉक प्लांटेशन पर व्यय करनें की स्वीकृत मिली है। इन ग्राम पंचायतों ने पौधाारोपण के नाम पर राशि भी व्यय की है। इन प्लांटेशन में पौधों की स्थित क्या है यह कहना अभी मुश्किल है।

पौधरोपण में इनकी भी नहीं रही रुचि
पर्यावरण वानिकी योजना के तहत वर्ष 2019 मे वन विभाग ने शैक्षणिक संस्थाओं, स्वास्थ्य केन्द्र एवं छात्रावास व तहसील परिसर में पौधारोपण हेतु 650 पौधे उपलब्ध करवाये थे। किन्तु इनमें से तहसील परिसर को छोड़कर किसी भी शासकीय संस्था के जिम्मेदार अधिकारी ने रुचि नहीं दिखाई जिससे पेड़ नष्ट हो गये। बताते हैं कि, कहीं कहीं तो पौधों का रोपण ही नहीं किया गया।

Dharmendra Singh
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned