सड़को पर लौटी रौनक, लेकिन लॉक डाउन के कारण आर्थिक मंदी से कारोबार प्रभावित

दिल्ली की सोना मंडी के रेट से तय होते हैं छतरपुर में दाम, लोकल व बैंक रेट पर ग्राहक असमंजस में होने से नहीं हो रही खरीदारी
सड़कों पर लौटी रौनक, लेकिन आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर कपड़ा, जनरल स्टोर, इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों में कारोबार धीमा

By: Dharmendra Singh

Published: 21 May 2020, 07:00 AM IST

छतरपुर। ग्रीन जोन में होने के कारण प्रशासन ने छतरपुर का पूरा बाजार खोलने की अनुमति दे दी है। लेकिन आवश्यक सामग्री की दुकानों को छोड़कर सभी तरह की दुकानदारी धीमी है। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन से आर्थिक मंदी के चलते लोग केवल आवश्यकता की सामग्री ही खरीद रहे हैं। वहीं, दिल्ली मड़ी बंद होने से सोना-चांदी के दाम तय नहीं हो पा रहे हैं। सराफा कारोबारियों ने दुकानें तो खोली हैं, लेकिन मंडी रेट तय नहीं होने और लोकल व बैंक के रेट मंड़ी रेट से ज्यादा होने के कारण ग्राहक सोना-चांदी के जेवर खरीदने नहीं आ रहे हैं। इसके साथ ही आगरा-मथुरा से आने वाले रेडीमेड सोना-चांदी के जेवर की आवक भी ठप होने से बाजार में स्टॉक की वैरायटी की कमी हो गई है। सराफा कारोबार के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, जनरल स्टोर की दुकानों पर ग्राहक कम ही पहुंच रहे हैं। ईद के कारण कपड़ा बाजार में जरूर कुछ रौनक लौट आई है। वहीं, सीट क्षमता की आधी सवारियों को लेकर 15 दिन पहले सार्वजनिक परिवहन शुरु करने के आदेश के बाद भी खर्च न निकल पाने की आशंका में सार्वजनिक परिवहन शुरु नहीं हो सका है।
दाम में अंतर के कारण सराफा में कारोबार पर असर
दिल्ली मंड़ी में रोजाना खुलने वाले सोना-चांदी के दाम के आधार पर ही छतरपुर में सोना-चांदी के दाम तय किए जाते हैं। शहर में लोकल भाव दिल्ली मंड़ी से 700 से 800 रुपए ज्यादा दाम होते हैं। वहीं बैंक में आरटीजीएस के जरिए पेमेंट करने पर करीब 1500 रुपए ज्यादा दाम लगते हैं। ऐसे में दिल्ली मंडी के रेट तय नहीं होने से लोकल भाव भी प्रभावित हो रहा है। जबकि बैंक के रेट में कीमत में ज्यादा अंतर आने से ग्राहक खरीदना नहीं चाह रहे हैं। कमलेश सोनी ने बताया कि मंडी भाव न मिलने और फिलहाल सोना के दाम बढ़े हुए होने के कारण भी लोग खरीदारी के लिए नहीं आ रहे हैं। लॉकडाउन शुरु होने पर छतरपुर में सोना के दाम 42500 थे, जो अब बढ़कर 49500 हो गए हैं। दाम में बढोत्तरी के कारण भी लोग सोना खरीदने से पीछे हट रहे हैं। जबकि जिले के अंदर गाजे-बाजे और 50 लोगों के साथ साथी समारोह आयोजित करने की छूट मिल गई है। शादियां न होने से सोना-चांदी के जेवरों की डिमांड कम है। इधर, पश्चिम बंगाल से आकर छतरपुर शहर में सोना चांदी के कारीगर बड़ी संख्या में काम करते हैं। लेकिन लॉक डाउन और उसके बाद भी कारोबार ठप रहने से कारीगर वापस जाना चाहते हैं। करीब 35 बंगाली कारीगरों ने परिवार सहित वापस जाने के लिए प्रशासन से अनुमति भी मांगी है।
नोटबंदी के बाद कोरोना तालाबंदी में बर्बाद हुआ बाजार
वर्ष 2016 में हुई नोटबंदी के बाद जिस तरह बाजार तबाह हुआ था कुछ इसी तरह कोरोना की तालाबंदी ने बाजार को बर्बाद कर दिया है। कोरोना वायरस के कारण लगाए गए लॉकडाउन के दौरान ही वैवाहिक सीजन गुजर गया जिसके चलते अब बाजारों में सन्नाटा पसरा है। शहर का सबसे बड़ा बाजार इन दिनों ग्राहकों की बाट जोह रहा है। चौक बाजार पर बर्तन का कारोबार करने वाले कल्लू रावत ने बताया कि कई सालों बाद ऐसा हुआ है तब वैवाहिक सीजन के दौरान होने वाली बिक्री का 10 प्रतिशत इस वर्ष नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि दुकानों में माल भरा पड़ा है लेकिन अब ग्राहक ही नहीं है। इसी तरह कपड़े के दुकानदार महेश तिवारी ने बताया कि लॉकडाउन में मिली ढील के बाद एक-दो दिन तक लोगों ने अपने जरूरी कपड़े खरीदे लेकिन अब बाजार में खरीददार नहीं है। व्यापारी प्रभात अग्रवाल ने बताया कि नोटबंदी के बाद व्यापारियों पर यह दूसरी सबसे बड़ी मार है। सरकार को व्यापारियों के हित में फैसले लेने होंगे। सरकार कम से कम व्यापारियों के बिजली के बिल माफ करे और जीएसटी टैक्स में राहत दे।
अन्य दुकानों पर भी कारोबार प्रभावित
ईद के कारण कपड़े की दुकानों पर थोड़ी बहुत खरीदारी हो रही है, लेकिन अन्य दुकानें खुलने तो लगी हैं। लेकिन ग्राहकी नहीं है। बर्तन, जनरल स्टोर, इलेक्ट्रॉनिक्स समेत सभी तरह की दुकानों में सन्नाटा पसरा हुआ है। शहर की सड़कों पर जरूर रौनक लौट आई है। लॉक डाउन के कारण आमदनी पर पड़े असर के चलते लोग केवल जरूरत का सामान खरीदने तक सीमित हैं। यही वजह है कि किराना, फल-सब्जी, दूध की दुकानों पर ग्राहकी आम दिनों की तरह हैं, जबकि अन्य दुकानों पर खरीदारी नाम मात्र के लिए हो रही है। विजय अग्रवाल ने बताया कि लॉक डाउन में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानें बंद रही, अब खुली भी हैं, तो लॉक डाउन में आमदनी पर फर्क पडऩे से लोग केवल जरूरत का सामान ले रहे हैं। वहीं, शादियां नहीं होने से भी इलेक्ट्रॉनिक्स का मार्केट इस साल बहुत डाउन हैं। जनरल स्टोर संचालक रिंकू ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान दुकानें बंद रहीं, अब खुल गई हैं, लेकिन लोग कोरोना संक्रमण का डर, आमदनी पर पड़े असर के कारण खदीदारी कम ही कर रहे हैं। बर्तन दुकानदार राजेश जैन ने बताया कि गर्मी के सीजन में शादियों के कारण बर्तन की डिमांड रहती थी, लेकिन शादियां न होने से इस साल बर्तन का कारोबार लगभग ठप हैं।
सार्वजनिक परिवहन भी नहीं हो सका शुरु
छतरपुर ग्रीन जोन में होने के कारण जिला प्रशासन ने 50 फीसदी यात्रियों के साथ सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरु करने के लिए 15 दिन पहले ही अनुमति दे दी थी। लेकिन 50 फीसदी सवारी में लागत न निकलने के चलते बस संचालकों ने यात्री बसों का संचालन अभी तक शुरु नहीं किया है। अरविंद चौरसिया ने बताया कि आधी सवारी के साथ बसों का संचालन करने पर नुकसान होगा। इसलिए बसों का संचालन शुरु नहीं किया जा सका है। जावेद अख्तर ने बताया कि लॉक डाउन में बंद रहे वाहनों का टैक्स भी परिवहन विभाग द्वारा मांगा जा रहा है। बसें खड़ी रहने से मैंटेंनेंस का खर्च भी सामने है। ऐसे में आधी सवारी पर बसों का संचालन संभव नहीं है।

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