महोबा रोड पर भारी वाहनों से एक दिन में दो दुर्घटनाएं, दो घायल, एक रेफर

रिंग रोड न होने का खामियाजा भुगत रहे शहरवासी, अबतक 125 लोग हुए गंभीर घायल
हर महीने हो रहे 14 बड़े हादसे, लोग हो रहे घायल, मौतें भी

By: Dharmendra Singh

Updated: 27 Nov 2019, 07:21 PM IST

-पत्रिका अभियान
छतरपुर। शहर में रिंग रोड न होने का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। हर महीने 14 से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें लोगों की मौत हो रही है या गंभीर रुप से घायल हो रहे हैं। बुधवार को भी दो लोगों को रिंग रोड न होने का खामियाजा भुगतना पड़ा। महोबा रोड पर बाइक सवार प्रदीप को बस ने जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें बाइक सवार गंभीर रुप से घायल हो गया। वहीं, दूसरी घटना भी महोबा रोड पर हुई, जिसमें चारपहिया वाहन ने बाइक सवार मोनू कुशवाहा को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक सवार के सिर व बॉडी में गंभीर चोटे आईं। घायल की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद घायल को ग्वालियर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया है।
ऐसे हुई दोनों घटनाएं
सुबह 9 बजे महोबा रोड स्थित पहाडिय़ा निवासी प्रदीप पिता थोटेलाल बसोर उम्र 32 वर्ष अपने घर से निकलकर महोबा रोड पर आया और ढाबा के पास पहुंचा ही था कि बगल से जा रही बस ने उन्हें टक्कर मार दी। प्रदीप बाइक समेत नीचे गिर गए। स्थानीय लोगों ने 108 एंबुलेंस को कॉल किया और प्रदीप को जिला अस्पताल लाया गया। जहां उनका इलाज किया जा रहा है। वहीं, दूसरी घटना सुबह 10 बजे हुई जब 18 वर्षीय मोनू कुशवाहा पिता काशीराम कुशवाहा निवासी दिलनियां छतरपुर शहर की सीमा में प्रवेश कर रहा था, तभी किसी बड़े वाहन ने पीछे से टक्कर मार दी। मोनू गिरते ही बेहोश हो गया, सिर से खून की धारा फूट पड़ी। आसपास मौजूद लोगों की मदद से मोनू को जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन सिर में चोट इतनी गंभीर थी कि जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत उसे ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोनू के पिता काशीराम पर तो मानो संकट का पहाड़ ही टूट पडा। बेटा गंभीर घायल है और इलाज के लिए ग्वालियर ले जाने के लिए डॉक्टरों ने कहा है, जबकि हाथ में कुछ सौ रुपए ही है। रिश्तेदारों व पहचान वालों से मदद मांगी है, पता नहीं कितना खर्च आएगा, कुछ समझ नहीं आ रहा क्या होगा और कैसे होगा?
रिंग रोड होता तो न होती शहर के अंदर दुर्घटना
शहर के अंदर से 2 नेशनल हाइवे का ट्रैफिक 24 घंटे गुजरता है। 10 हजार वाहनों की चहलकदमी शहर की सड़कों पर होने से दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। दुर्घटनाओं का आंकड़ा इतना ज्यादा है कि, रिंग रोड को लेकर हो रही लेटलतीफी पर शहरवासियों में आक्रोश है। पिछले दस महीने में 43 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, 125 लोग गंभीर घायल हुए हैं। दुर्घटनाओं का ये सिलसिला अब भी थम नहीं रहा है। जिससे शहर के लोगों में गुस्सा है।
एक सप्ताह सहना पड़ा दर्द
15 दिन पहले सड़क दुर्घटना में घायल हुए शहरवासी आशीष जगधारी का कहना है कि रिंग रोड होता तो शहर के लोगों को दुर्घटनाओं का शिकार न होना पड़ता। पन्ना रोड पर 16 पहिया ट्रक से खुद को बचाने के चक्कर में आशीष की बाइक सिविल लाइन थाना के पास पुलिया से टकरा गई थी। जिसके बाद उन्हें एक सप्ताह तक अस्पताल में रहना पड़ा और अभी भी इलाज चल रहा है। उन्हें चलने में अभी भी परेशानी हो रही है। आशीष का कहना है कि शहर में रिंगरोड होता तो उनके साथ दुर्घटना न होती, न उन्हें अस्पताल में एक सप्ताह कष्ठ सहना पड़ते।
मेरे जैसा किसी के साथ न हो
वहीं, नौगांव रोड पर होटल रीजेंसी के पास सड़क दुर्घटना में घायल हुए ओमप्रकाश साहू का कहना है कि, वे सड़क किनारे पैदल चल रहे थे। तभी नौगांव रोड से आ रहे ट्रक से उन्हें टक्कर लगी। टक्कर के बाद उनके सिर से खून की धारा बह निकली, बेहोशी छा गई। वे आधे घंटे तक सड़क पर ही पड़े रहे, फिर किसी ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। थोड़ी और देर हो जाती तो शायद वे बचते नहीं। लेकिन उन्हें 15 दिन अस्पताल में बिताना पड़े और घटना के एक महीने बाद भी उनकी स्थिति पूरी तरह से ठीक नहीं है। उनका कहना है कि रिंग रोड बन जाए तो उनकी तरह अन्य लोगों को इतना कष्ठ नहीं भुगतना पड़ेगा।
फैक्ट फाइल
वर्ष 2019
क्षेत्र दुर्घटनाएं मौत घायल
कोतवाली ५४ 13 45
सिविल लाइन 62 13 62
ओरक्षा रोड 29 17 18

Dharmendra Singh
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