सहकारिता के दो बड़े घोटाले, 2 कलेक्टरों ने दिए एफआइआर के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई नहीं, मारे-मारे फिर रहे किसान

सहकारिता के दो बड़े घोटाले, 2 कलेक्टरों ने दिए एफआइआर के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई नहीं, मारे-मारे फिर रहे किसान
Two big cooperative scams

Dharmendra Singh | Updated: 19 Aug 2019, 06:00:00 AM (IST) Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

किसान क्रेडिट कार्ड, खाद बीज के नाम पर हुआ पहला घोटाला
कर्जमाफी के नाम पर सोसायटियों ने डकारे करोड़ों
रिकॉर्ड जब्ती के बहाने टलता रहा मामला, उधर दागी प्रबंधक कोर्ट से ले आए स्थगन

छतरपुर। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित की सहकारी सोसायटियों में दो बड़े घोटाले हुए। पहला घोटाला तीन सोसायटियों डिकौली, सेंधपा, वीरों में हुआ, जहां किसानों के नाम पर केसीसी और खाद के नाम पर करोड़ों रुपए निकाले गए। वहीं दूसरा घोटाला जय किसान कर्जमाफी योजना में किसानों के नाम से करोड़ों रुपए निकालने का सामने आया। पहले घोटाले में तात्कालीन कलेक्टर रमेश भंडारी और दूसरे में कलेक्टर मोहित बुंदस ने एफआइआर के आदेश दिए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर रिकॉर्ड जब्ती का खेल चलता रहा, अंत में आरोपी सोसायटियों के संचालको ने कोर्ट से स्थगन आदेश ले लिया। दोषियों पर कार्रवाई आज तक नहीं हुई, लेकिन जिन किसानों के नाम से सोसायटियों ने घोटाला किया, वे किसान अब सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो गए हैं। ऐसे में वे किसान मारे-मारे फिर रहे हैं, जिन्हें कर्जदार बनाकर प्रबंधकों ने उनके खाते के केसीसी से लाखों रुपए का ऋण निकाल लिया था। यही कारण है कि पिछली जनसुनवाई के दौरान वीरों गांव का एक किसान फांसी का फंदा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गया था। उसके नाम से फर्जी खाता खोलकर १६ लाख रुपए निकाल लिए गए थे।
ये है पहला घोटाला
जिले की वीरों, डिकौली एवं सेंधपा समिति द्वारा किसान खाद क्रेडिट एवं किसान क्रेडिट के नाम पर करोड़ों रूपए निकाल लिए गए थे। साथ ही सेंधपा, सोसायटी में किसानों के नाम पर फसल बीमा के दो करोड़ रुपए किसानों में नहीं बांटे गए तथा किसानों के कर्ज के एक करोड़ 58 लाख रुपए आज तक बैंक में जमा नहीं किए गए। सिर्फ वीरों सोसायटी द्वारा जांच के दौरान ही २ करोड़ 32 लाख रुपए जमा कर दिए गए। आयुक्त सहकारिता के निर्देश पर गठित की गई कमेटी में डीआर एससी पांडे के साथ तीन अन्य सदस्यों वाली टीम ने जब जांच पड़ताल में समितियों के रिकॉर्ड की छानवीन की और संबंधितों बयान दर्ज किए तो यह बात सामने आई थी कि, वीरों समिति से खाद एवं बीज की व्यवस्था के लिए कैश कैडिट से माह अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर में नगद आहरण कर लिया गया था। इसके अलावा सेंदपा व डिकौली समिति की जांच में भी ऐसा ही निकलकर आया था। गौरतलब है कि बीरों समिति प्रबंधक भानूप्रताप लल्लू अवस्थी ने साढ़े 5 करोड़, डिकौली समिति प्रबंधक हरिओम अग्निहेत्री ने एक करोड़ और सेंदपा के समिति प्रबंधक जाहर सिंह द्वारा एक करोड़ का घोटाला किया था।
दूसरा घोटाला
जय किसान फ सल ऋण माफ ी योजना में गंभीर अनियमितता वाली 5 सोसायटियों की जांच में भ्रष्टाचार सामने आया है। इनमें वीरों, सेंधपा, भदर्रा, कटहरा और मुड़ेरी की सेवा सहकारी समितियां शामिल हैं। सेवा सहकारी समिति वीरों की जांच में सभी खातेदारों के खाते में साख सीमा बढ़ाकर ऋण देने और भूमिहीन, अल्पभूमि धारक किसानों का रकबा बढ़ाकर ऋण स्वीकृत करना पाया गया। समिति प्रबंधक द्वारा 11 भूमिहीन किसानों को 20 लाख 18 हजार 607 रू. का नियम विरूद्ध तरीके से ऋण स्वीकृत किया गया था। यहां करीब डेढ़ करोड़ रूपए का गड़बड़झाला हुआ है। सेंधपा समिति में 6 भूमिहीन, अल्प भूमिधारक किसानों का रकवा बढ़ाकर लाखों रूपए का खेल किया गया। दस्तावेज भी फ ाड़ डाले गए हैं। भदर्रा समिति की जांच के दौरान कोई दस्तावेज नहीं मिले। समिति प्रबंधक द्वारा ऋ ण माफी सूची के अनुसार किसी किसान का रिकॉर्ड नहीं दिया गया था। कटहरा समिति के लेजर में 10 किसानों की राशि बकाया थी लेकिन उनका नाम ऋ ण सूची में नहीं था। इसी तरह मुड़ेरी समिति के 11 ऐसे किसानों की जांच सामने आई जिनमें खासी गड़बड़ी देखी गई।
एक दूसरे पर थोप रहे जिम्मेदारी
भ्रष्ट समिति प्रबंधकों के खिलाफ एफआईआर किए जाने और उन्हें पद से हटाने के मामले में एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपी जा रही है। जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक सुरेश रावत का कहना है कि डिप्टी रजिस्ट्रार को समिति प्रबंधकों की सेवाएं खत्म करने का अधिकार है इसलिए वे ही ऐसा कर सकते हैं। उधर डीआर मुकेश जैन का कहना है कि सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक जब तक उन्हें लिखित जानकारी नहीं देंगे तब तक वे समिति प्रबंधकों को कैसे पद से पृथक कर सकते हैं। इतना ही नहीं उन्होंने महाप्रबंधक को ही हटाने का अधिकार होने की बात कही।
स्थगन वापस कराने का प्रयास कर रहे हैं
घोटाला करने वाली सोसायटियेां के प्रबंधकों के खिलाफ एफआइआर के आदेश हुए थे। तीन एसडीएम और सहकारिता निरीक्षकों की टीम बनाकर रिकॉर्ड जब्ती कराई जानी थी। लेकिन सोसायटियों में ताला लगा होने रिकॉर्ड जब्त नहीं हो पाए, इस कारण से देरी हुई। इस बीच दागी प्रबंधक कोर्ट से स्टे ले आए। अब स्थगन वापस कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
सुरेश रावत, महाप्रबंधक जिला सहकारी बैंक
कार्रवाई कराई जाएगी
मैं इस मामले की जानकारी लेता हूं। एफ आइआर करने और बर्खास्त करने के साथ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। मामले का फॉलोअप कराया जाएगा।
मोहित बुंदस, कलेक्टर

 

 

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