कर्जमाफी के दिए 2 प्रमाणपत्र, लेकिन किसान का कर्ज नहीं हुआ माफ

भर्दरा सोसायटी के किसानों के नाम गड़बड़ी की जांच के बाद नहीं हुई कार्रवाई
अब कर्ज माफी प्रमाण पत्र धारी किसान पर भी निकल रही कर्ज की राशि

By: Dharmendra Singh

Published: 13 Aug 2020, 06:00 AM IST

Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

हरपालपुर। जय किसान कर्ज माफी योजना के तहत किसानों के साथ हुई धोखाधड़ी जांच में साबित होने के बाद भी किसान कर्ज से मुक्त नहीं हो पाए हैं। हरपालपुर के पास भदर्रा सहकारी समिति से जय किसान ऋण माफी योजना के तहत कर्जमाफी के प्रमाण पत्र पा चुके किसान के उपर एक साल बाद भी कर्ज चढ़ा हुआ है। किसानों की शिकायत पर तात्कालीन कलेक्टर मोहित बुंदस ने जांच कराई तो कई किसानों के साथ धोखाधड़ी पाई गई। किसी को बिना कर्ज लिए कर्जदार बनाया गया, तो किसी के कर्ज की राशि ज्यादा चढ़ा दी गई। प्रशासन ने इन मामलों में एफआइआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए थे। लेकिन समिति प्रबंधक द्वारा हाईकोर्ट से स्टे ले लिया गया। जिसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि कुछ किसानों के नाम चढ़े फर्जी ऋण हटा दिए गए हैं। लेकिन अभी भी बहुत से किसान कर्ज माफी में हुई गड़बड़ी के सुधार के लिए चक्कर लगा रहे हैं।

एक साल बाद भी चढ़ा है कर्ज
इमलिया निवासी प्यारे लाल अहिरवार द्वारा खाद बीज के नाम सहकारी समिति से 22 हजार रुपए का कर्ज कुछ वर्षो पहले लिया गया था। सहकारी समिति द्वारा जय किसान ऋण माफी योजना के तहत किसान को कर्ज माफी के दो प्रमाण पत्र अलग तारीखों में दिए गए। ऋण माफी का पहला प्रमाण पत्र 26 फरवरी 2019 को तो दूसरा 1 मार्च 2019 को दिया गया, जिसमें सहकारी समिति द्वारा 46741 रुपए का कर्ज माफ बताया गया। लेकिन सोसायटी के रिकॉर्ड में अभी भी किसान पर कर्ज चढ़ा हुआ। इमलिया सरपंच प्रतिनिधि राजेश मिश्रा में आरोप लगाया कि इमलिया के किसानों के नाम फर्जी ऋण सूची में दर्ज कर किसानों के नाम पर रुपया आहरित किया गया। किसान को दो-छो प्रमाण पत्र मिलने के एक साल बाद भी किसान का ऋण आज भी सहकारी समिति में बकाया हैं। जिससे परेशान होकर वह सहकारी समिति और सहकारी बैंक के चक्कर लगा रहा है।

बिना कर्ज लिए डेढ बीघा जमीन पर चढ़ा दिया 1 लाख से ज्यादा का कर्ज
इमलिया गांव की रामकुमारी राय और शिवराम राय पति-पत्नी है। रामकुमारी के नाम डेढ बीघा और शिवराम के नाम पांच बीघा जमीन हैं। राम कुमारी ने बताया कि उन्होंने या उनके पति ने सोसायटी से कोई कर्ज नहीं लिया है। लेकिन उनके नाम पर सोसायटी में 1 लाख 18 हजार और शिवराम के नाम पर 1 लाख 10 हजार रुपए का कर्ज चढ़ाया गया है। शिवराम का कहना है कि शिकायत कई बार की गई लेकिन अभी तक समस्या का निराकरण नहीं हो सका है।

जांच में मिले थे ऐसे मामले भी
इससे पहले भदर्रा सहकारी समिति में 10 साल से मानसिक रूप से बीमार गयाप्रसाद उर्फ भूरे का हजारों का ऋण फर्जी तरीके निकाल कर जय किसान योजना के कर्ज माफी सूची में दर्ज करने का मामला भी जांच में पाया गया था। इसी तरह दशरथ अहिरवार द्वारा सहकारी समिति से कोई ऋण नहीं लिया गया, उसके वाबजूद उसका नाम हरी और सफेद ऋण माफी सूची में दर्शाया गया था। जांच के बाद इन किसानों के नाम कर्जदार की सूची से हटाए गए हैं।

दस गांव के किसानों के नाम निकला था कर्ज
भदर्रा समिति के लगभग दस गांव के किसानों के नाम कर्जमाफी की लिस्ट में थे। किसानों ने खेती के लिए सोसायटियों से खाद-बीज के लिए जो कर्ज लिया था, उसकी राशि हजारों में है, लेकिन कर्जमाफी की जो लिस्ट आई, उसमें उन किसानों का कर्ज लाखों रुपए कर दिया गया था। भदर्रा सोसायटी के भदर्रा, इमलिया, मबइया, रगौली, महेड़, अमां और देवथा गांव के एक सैकड़ा किसानों की शिकायत पर जांच कराई गई थी। 2110 रजिस्टर्ड किसानों वाली भदर्रा सोसायटी से जुड़े लगभग 200 किसानों के नाम पर कर्ज की राशि में गड़बड़ी की गई थी। मबइया के महेश ने बताया कि ज्यादातर गांव के किसान या तो बिना कर्ज या फिर कम कर्ज लेने पर भी बड़े कर्जदार बना दिए गए थे।

जिले में मृत किसानों के नाम पर भी कर्जा
छतरपुर जनपद पंचायत के पचबार, धावा, उमरी, चुकेहटा, गौहानी, नेहरा, हरवंशपुर में किसानों के नाम पर फर्जी लोन लेकर अनियमितता के मामले सामने आए थे। कर्जमाफी योजना के तहत जब हितग्राही किसानों की लिस्ट सामने आई तो किसानों को खुद के साथ हुए छलावा का पता चला है। यहां तो गड़बड़ी के सारे पैमाने ही तोड़ दिए गए, उन किसानों के नाम पर भी कर्ज की राशि चढ़ा दी गई, जिनकी मौत वर्ष 2009 में हो चुकी थी।

जांच कराई जाएगी
सोसायटी की शिकायतों की जांच कर प्रतिवेदन दिया गया था। लेकिन अभी भी कोई मामला है, तो जांच कराई जाएगी। जांच में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
बीपी सिंह, तहसीलदार

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