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छतरपुर

आखिरकार एक साल बाद भी शुरू नहीं हो सका जिला अस्पताल में टोकन सिस्टम

टोकन मशीन चालू नहीं होने के कारण संबंधित मरीजों को इलाज के लिए किससे संपर्क करना है और कौन से कक्ष में बीमारी से संबंधित डॉक्टर बैठता है, यह जानकारी खुद जुटाना पड़ती है।

छतरपुरJun 09, 2024 / 11:01 am

Dharmendra Singh

district hospital

ओपीडी में लाइन में लगे मरीज

छतरपुर. जिला अस्पताल की ओपीडी में जिलेभर से आने वाले मरीजों की सुविधा के लिए 10 माह पहले स्वास्थ्य विभाग ने ओपीडी मैनेजमेंट सिस्टम के तहत मशीनों को लगाया गया। लेकिन यह मशीनें अब तक बंद पड़ी हैं। इसलिए जिला अस्पताल में प्रतिदिन आने वाले 900 से 1000 मरीजों को पर्चा काउंटर के बाद डॉक्टर कक्ष के बाहर इलाज के लिए घंटों कतार में लगना पड़ रहा है। कई बार हालात ये रहते है कि मरीज पर्चा बनवाने, जांच कराने के बाद डॉक्टर के पास दोबारा पहुंचता है, तब तक लंच हो जाता है।

डॉक्टर कक्ष के सामने लगाए गए डिस्प्ले


स्वास्थ्य विभाग ने छतरपुर जिला अस्पताल की वाह्य ओपीडी के विभिन्न कक्षों शिशु विभाग, फिजियोथेरेपी, चर्म रोग, नाक-कान, आंख, दंत, हड्डी, लेबर रूम और मेडिसिन विभाग में बैठने वाले डॉक्टर कक्ष के सामने टोकन डिसप्ले लगाया गया ताकि जिला अस्पताल आने वाले सभी मरीजों को इलाज के लिए चिकित्सक के पास पर्चा जमा करने पर एक नंबर मिल सके और मरीज का नंबर आते ही टोकन मशीन पर डिस्प्ले हो जाए और मरीज को बिना लाइन में लगे इलाज की सुविधा मिल सके, लेकिन ओपीडी मैनेजमेंट का यह सिस्टम प्रबंधन की लापरवाही से आज तक चालू नहीं हो सका है। जिससे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

जानकारी के लिए भटकना पड रहा


टोकन मशीन चालू नहीं होने के कारण संबंधित मरीजों को इलाज के लिए किससे संपर्क करना है और कौन से कक्ष में बीमारी से संबंधित डॉक्टर बैठता है, यह जानकारी खुद जुटाना पड़ती है। यदि मशीन चालू होती तो मरीजों को टोकन सिस्टम के अनुसार पर्ची कटवाने के बाद किस डॉक्टर के पास जाना है और वह कौन से कक्ष में है। साथ ही मरीज का नंबर कौन सा है, यह सब कम्प्यूटर सिस्टम के तहत एलईडी पर दिखाई देने के साथ ही अनाउंस भी होता है, जो मरीज को दिखाई और सुनाई देता है। इससे मरीज को इलाज कराने में दिक्कत नहीं होती।

ऑपरेशन नहीं होने से मरीजों को कर रहे रेफर


कलेक्टर संदीप जीआर के तमाम प्रयासों के बावजूद जिला अस्पताल की व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। यहां न तो मरीजों को उचित उपचार मिल रहा है और न ही यहां लगे संसाधन सही ढंग से काम कर रहे हैं। जिला अस्पताल में आने वाले ज्यादातर मरीजों को चिकित्सक रेफर कर रहे हैं, जिस कारण से उन्हें भारी परेशानी हो रही है।

चिकित्सकों द्वारा रेफर किया जा रहा

अस्पताल में भर्ती ग्राम बुडऱख निवासी मरीज कमला ने बताया कि उसे यूरिन संबंधी समस्या है और वह पिछले दो तीन दिनों से जिला अस्पताल में भर्ती है। अब चिकित्सकों द्वारा उसे रेफर किया जा रहा है। इसी तरह छतरपुर निवासी ओमवन गोस्वामी ने बताया कि वह हर्निया की समस्या से ग्रसित हैं। पिछले कई दिनों से वह जिला अस्पताल में भर्ती है लेकिन उसका ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। ओमवन ने बताया कि चिकित्सक उसे सुबह-शाम इंजेक्शन लगाकर चले जाते हैं, इसके अलावा अन्य किसी तरह का उपचार नहीं किया जा रहा है।

सेंट्रल एसी पिछले कई दिनों से खराब पड़ा है

इसके अलावा कुछ अन्य मरीजों ने बताया कि अस्पताल में लगा सेंट्रल एसी पिछले कई दिनों से खराब पड़ा है जिसके चलते मरीजों को भीषण गर्मी से जूझना पड़ रहा है। गौरतलब है कि पूर्व में कलेक्टर संदीप जी आर कई बार जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण कर व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश अस्पताल प्रबंधन को दे चुके हैं लेकिन निर्देशों का पालन नहीं होता, जिसके चलते जिला अस्पताल के हालात गंभीर होते जा रहे हैं।

इनका कहना है


दो कर्मचारियों को मशीन चलाने ट्रेनिंग दिलाई। लेकिन वे कुछ समय बाद भूल गए और चला नहीं पा रहे। फिर से कंपनी के इंजीनियर को बुलाया है, ताकि वे कर्मचारियों को ट्रेनिंग देते हुए चलाना सिखा दें।
डॉ. जीएल अहिरवार, सीएस जिला अस्पताल छतरपुर

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