सिंहपुर बांध के नजदीक दो गांव के घरों में रिस रहा पानी

विस्थापन न होने से कच्चे घरों में रहने वाले ग्रामीणों को खतरा
नहीं हुआ सिंहपुर व मुर्खरा गांव के 1122 परिवारों का विस्थापन, घरों व जमीन में सीलन से गांवों वालों का रहना हुआ मुश्किल
सिंहपुर की निचली बस्ती में कीचड़ से लोग परेशान, कच्चे घरों के कभी भी गिरने की रहती है आशंका

By: Dharmendra Singh

Published: 12 Aug 2020, 06:00 AM IST

छतरपुर। वर्ष 2016 में 270 करोड़ की लागत से बने सिंहपुर बैराज डैम से लगे सिंहपुर और मुर्खरा गांव में पानी के रिसाव के चलते तीन साल से ग्रामीण परेशान हैं। दीवारों सहित घर के फर्स से डेम के रिसाव का पानी निकलने के कारण मकान गिरने का खतरा बना रहता है। इस कारण सभी गांव वाले पूरी रात डर-डर कर सोते हैं। पानी रिसने के कारण गेहूं सहित ग्रहस्थी में इस्तेमाल की जाने वाली सभी सामग्री इस पानी से गीले होने की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। दोनों गांव के 1122 परिवारों के विस्थापन की प्रक्रिया पिछले साल शुरु तो हुई लेकिन पूरी नहीं हो पाई। जिसके चलते ग्रामीणों को घर गिरने के डर के बीच गांव में रहना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा मुसीबत कच्चे घरों में रहने वाले ग्रामीणों की है।

तीन साल तक प्रशासन से लगाई गुहार तब हुआ सर्वे
राजस्व विभाग महाराजपुर द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार बांध के नजदीक के दो गांवों सिंहपुर और मुर्खरा के कुल 1122 परिवारों को विस्तापित किया जाना है। सिंहपुर गांव के 620 और मुर्खरा के 502 परिवारों को विस्थापन के लिए चिंहित किया गया है। मुर्खरा व सिंहपुर गांव के ग्रामीणों रामगोपाल, पर्वत, रतीराम, रामकुमार, सुखलाल, हरी, छोटू, राजा सिंह, कडोरा, स्वामीदीन, राम अवतार, सेवलाल, बिहारी, प्रमोद, कपूर सिंह, रतन सिंह, मुन्नी दीन दयाल, आशाराम, रामा, छन्नू, संतोष, महेश और गया प्रसाद समेत अन्य लोगों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, कलेक्टर से बांध के पानी का रिसाव गांव के घरों में होने की शिकायत की थी। वर्ष 2016 से 2019 तक ग्रामीण अधिकारियों-नेताओं के चक्कर लगाते रहे। जिसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर वर्ष 2019 में विस्थापन की प्रक्रिया शुरु की गई है।

बारिश में गिर जाते हैं मकान, कीचड़ में रह रहे निचली बस्ती के लोग
सिंहपुर गांव में डेम के पानी का रिसाव की समस्या गांव के ज्यादातर घरों में है। पिछले तीन साल में बारिश के दौरान कुछ घर गिर भी चुके हैं। निचली बस्ती के लोग कच्चे मकानों में रहने से डरते हैं। सिंहपुर गांव के सुकनील चौबे, अर्जुन कुशवाहा, भुमानीदीन प्रजापति, बगवान दास प्रजापति, राजू प्रजापति, किशन ने बताया कि अधिकारी निरीक्षण करने हर साल आते हैं। लेकिन समस्या का निराकरण अभी तक नहीं किया गया है। निचली बस्ती के लोगों के घरों के आसपास कीचड़ हो गया है, जिससे लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है।

सर्वे के बाद से अटकी है फाइल
राजस्व विभाग ने दोनों गांव का सर्वे कर रिपोर्ट जलसंसाधन व पीडब्ल्यूडी विभाग को दी थी। पिछले साल राजस्व विभाग के सर्वे में दोनों गांव के 1122 परिवारों के विस्थापन की बात सामने आई थी। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के बाद पीडब्लूडी विभाग को विस्थापन के लिए आने वाले खर्च की रिपोर्ट देना थी। पीडबल्यूडी के सब इंजीनियर आनंद त्रिपाठी का कहना है कि विभाग ने दोनों गांव के घरों का सर्वे कर रिपोर्ट एसडीएम कार्यालय को सौंप दी थी। दोनों गांव के करीब एक हजार मकानों को विस्थापन के लिए चिंहित किया गया था। अब आगे की कार्रवाई एसडीएम ऑफिस से होना है।

घरों से रिस रहा पानी
सिंहपुर गांव के गोविंद रैकवार, खलबली रैकवार, कंदी रैकवार, जगमोहन रैकवार, गोपाल रैकवार, ग्यासी रैकवार, मुन्नीलाल बंसकार, अमरचंद्र बंसकार, शंकरलाल बंसकार, हरदीन बंसकार, गोविंदी बंसकार, अर्जन कुशवाहा, लच्छू कुशवाहा, ओमप्रकाश कुशवाहा, भगवानदास प्रजापति, धनीराम प्रजापति, लल्लू धोबी, गोरेलाल धोबी, कृष्णा धोबी, कंदी धोबी, कमतू धोबी, चंदा पाल, गंगू पाल, हलकाई दर्जी, महेंद्र दुबे, अमरेश दुवे, करन खंगार, भैरों खंगार, लखन खंगार, लच्छू कुशवाहा, खिल्लू कुशवाहा, दशरथ कुशवाहा, मंगल कुशवाहा, लल्लन कुशवाहा और धन्नू जाशी सहित आधा सैकड़ा लोगों के घरों की जमीन से डेम का पानी निकल रहा है।

जल्द कराएंगे समाधान
सिंहपुर-मुर्खरा की समस्या की फाइलें तहसील से मंगाई गई हैं। फाइल आते ही समस्या के समाधान के लिए कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों की समस्या को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए तहसीलदार को निर्देश भी दिए गए हैं।
विनय द्विेदी, एसडीएम

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