बुंदेलखंड की पठारी धरती पर सर्दी का सितम,पानी को हाथ लगाते ही छूट रही कंपकपी

निमोनिया का खतरा बढ़ा, अलाव का सहारा न लें अस्थमा के मरीज

By: दीपक राय

Published: 04 Jan 2018, 12:20 PM IST

रफी अहमद सिद्दिकी.छतरपुर. बुंदेलखंड की पठारी धरती पर सर्दी के सितम से आमजन के साथ ही पशु पक्षी भी परेशान हैं। न्यूनतम तापमान पांच डिग्री होने से हाड़कंपाऊ ठंड से लोग ठिठुरते नजर आ रहे हैं। बुधवार को सुबह कोहरे के चादर में लिपटी रही। दोपहर में धूप तो निकली लेकिन असरदार नहीं रही। लोग ठंड से ठिठुरते रहे।

पिछले पांच दिनों से कहर ढा रही सर्दी से लोग बेहाल हैं। मौसम विभाग के अनुसार एेसी स्थिति को कोल्ड-डे कंडीशन कहा जाता है। यह स्थिति तब आती है जब दिन का पारा 16 डिग्री या इससे नीचे चला जाता है। पिछले कई दिन से पहाड़ी क्षेत्रों में पड़ रही बर्फ का असर मैदानी क्षेत्रों में नजर आ रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि घने कोहरे का असर भी जारी रहेगा। हालांकि एक दो दिन में मौसम कुछ साफ होने की उम्मीद है। अगले तीन दिनों मेंं न्यूनतम व अधिकतम तापमान में और कमी आ सकती है। रात में पारा गिरने से परेशानी बढ़ सकती है।

आद्र्रता अधिक होने से गलन बढ़ी है। बुधवार सुबह दस बजे घना कोहरा छाया रहा। सुबह ११ बजे के बाद मौसम साफ हुआ। हालांकि दोपहर में धूप निकली लेकिन उसका असर नहीं दिखाई दिया। ऐसे में लोग घरों से कम निकले। मजबूरी में ही लोग अपने घरों से बाहर निकले। इस दौरान बर्फीली हवा नश्तर सी चुभी।
मौसम विज्ञान केंद्र नौगांव के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस दौरान हवाओं की दिशा-बदल गई। पहले जहां पूर्व से पश्चिमी दिशा में हवाएं चल रहीं थीं वह बुधवार को दक्षिण से पश्चिम दिशा में हवाएं चलने लगीं। इस दौरान सुबह की आद्रता १०० फीसदी, जबकि शाम की आद्र्रता 46 फीसदी दर्ज की गई।

तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से कम पहुंच गया है, मतलब गलन भरी सर्दी। इस मौसम से नौनिहालों को निमोनिया का खतरा बढ़ गया है। जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. हिमांशु बाथम ने बताया कि सर्दी से बुखार, जुकाम, खांसी और निमोनिया के मरीज आ रहे हैं। कुछ मरीज पसली चलना, नाक से सांस लेते वक्त सिर का आगे-पीछे होना, तेज बुखार मिलता है। सांस अस्थमा के मरीज सर्दी से बचने के अलाव का सहारा न लें, ऐसा करने से धुआं उनका मर्ज को बढ़ा देगा।

गंभीर हालत पर मरीज की मौत की आशंका है। इस मौसम में पुराने मरीज ज्यादा आते हैं। जिन्होंने दवाएं बंद कर दी हैं जिससे मर्ज उखड़ गया है। इस मौसम में हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में हृदय रोगी, ब्लडप्रेशर, शुगर की जांच कराएं। खान-पान नियंत्रित रखें। कम तापमान में रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे ह्दय तक रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है। ऐसे में रोगी दवाएं बंद न करें। नमक कम करें और शुगर नियंत्रित रखें।

 

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दीपक राय
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