महिलाओं ने काटा 107 मीटर पहाड़, तालाब तक पहुंचाया बारिश का पानी

3 किलोमीटर पैदल चलकर महिलाएं १८ महीने तक रोजाना आती थी पहाड़ काटने, अब पौधो का कर रही संरक्षण
पहाड़ काटकर तालाब तक बारिश का पानी पहुंचने का बनाया रास्ता, लोगों ने जल सहेली दिया नाम

By: Dharmendra Singh

Published: 19 Sep 2020, 09:00 AM IST

Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। जिले के बड़ामलहरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत भेल्दा के एक छोटे से गांव अंगरोठा में महिलाओं ने ऐसा काम किया है जो एक मिसाल बन गया है। पानी के लिए पंचायत की 100 से ज्यादा महिलाओं ने मिलकर 18 महीने में 107 मीटर लंबे पहाड़ को ही काट दिया। पहाड़ कटने से बारिश का पानी गांव के तालाब में जमा होने लगा है। जिससे अब पूरे गांव को पानी तो मिल ही रहा है, गांव के सूखे हुए कुओं में पानी आ गया है। हैंडपंप जो सूख गए थे, अब पानी देने लगे हैं। इन महिलाओं को जल सहेलियां नाम दिया गया है।

10 साल पहले बना तालाब रहता था सूखा
मध्य प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड पैकेज के तहत गांव में दस साल पहले 40 एकड़ के क्षेत्र को तालाब का रूप दे दिया था। लेकिन दो पहाड़ो के बीच स्थित तालाब में बारिश का पानी नहीं आ पाता था। पानी के लिए दशकों से परेशान महिलाओं ने तालाब के सूखे रहने के कारण पहाड़ काटकर बारिश का पानी तालाब तक आने का रास्ता बनाने की सोची। अंगरोठा गांव की 100 से ज्यादा महिलाओं ने जल संवर्धन के क्षेत्र में परमार्थ समाज सेवी संस्थान के साथ मिलकर काम किया और तालाब में पानी भर सके इसलिए 107 मीटर लंबा पहाड़ काटकर रास्ता बना लिया।

पहली बार पूरा भरा तालाब
सभी महिलाओं की मेहनत रंग लाई और इस बार हुई बारिश से तालाब पूरी तरह भर गया। पहले पहाड़ों के जरिए बरसात का पानी बहकर निकल जाता था। इस पानी को सहेज कर महिलाओं ने गांव की दशा और दिशा बदल कर रख दी है। जल सहेली बबीता राजपूत बताती हैं कि दूर-दूर से 3 किलोमीटर पैदल चलकर महिलाएं यहां पर आती थीं और श्रमदान करती थीं। महिलाओं ने इस पहाड़ को बचाने और इस पर पौधे लगाने का संकल्प भी लिया है। परमार्थ समिति के मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि गांव की 100 से ज्यादा महिलाओं की मेहनत 18 महीने बाद रंग लाई है। इस बार हुई बारिश से पानी कहीं और बहने की बजाय तालाब में ठहर गया है। महिलाओं ने इस इलाके में 400 पौधे भी लगाए हैं, जिनका संरक्षण भी कर रही है। तालाब के भरने से सूखी हुई बछेड़ी नदी में एक बार फिर से पानी बहने की उम्मीद बंध गई है। बछेड़ी नदी में अब तक केवल बरसात में ही पानी आता था।

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