जिले में 16 फीसदी गर्भवतियां खून की कमी से हैं पीडि़त, जानें वजह

- आदिवासी अंचलों में घरेलू प्रसव पर नहीं लग पा रहा नियंत्रण, विभागीय रिपोर्ट में सामने आई स्थिति

By: Dinesh Sahu

Published: 23 Jan 2021, 11:26 AM IST

छिंदवाड़ा/ महिलाओं में खून की कमी के अक्सर मामले सामने आते है तथा उपचार के बाद थोड़ी राहत तो मिलती है। लेकिन नियमित देखभाल या खानपान का ध्यान नहीं रखने पर स्थिति गंभीर हो जाती है। सबसे ज्यादा गर्भावस्था के समय ध्यान रखना होता है, अन्यथा लापरवाही जज्जा और बच्चा दोनों के लिए घातक साबित हो सकती है।

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट वर्ष 2020 के मुताबिक जिले में कुल 13 हजार 915 हाईरिस्क गर्भवतियों में से 16 फीसदी एनीमिया रोग से पीडि़त है, जबकि 3 प्रतिशत गर्भवतियों को गंभीर एनीमिया रोग हैं। वहीं जिले में 2 हजार 218 महिलाओं में 11 एचबी से कम रक्त हैं। खून के स्तर का बढ़ाने के लिए करीब 1052 महिलाओं का आयरन सुक्रोज की डोज दी गई है।

उल्लेखनीय है कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर नियंत्रण लगाने के लिए कई तरह के प्रयास किए जा रहे है। लेकिन जागरूकता, प्रचार-प्रसार और जानकारी के अभाव में लोग लापरवाही बरतते है, जो कि सेहत के लिए घातक होते है। एनीमिया रोग की वजह से भी मरीज की मौत होती है, पर विभाग बीमारी, कमजोरी या वजह दर्शाने से एनीमिया से मौत का कोई आंकड़ा नहीं रखता है।


आदिवासी अंचकों में घरेलू प्रसव पर नहीं नियंत्रण -


विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक जिले के आदिवासी अंचलों में घरेलू प्रसव के मामले लगातार सामने आ रहे है। सबसे ज्यादा घरेलू प्रसव जुन्नारदेव विकासखंड में दर्ज किए गए, जबकि सौंसर और छिंदवाड़ा एक भी मामला सामने नहीं आया हैं। जानकारी के अनुसार जिले में 438 कुल घरेलू प्रसव हुए, जिनमें तामिया के 101, हर्रई के 42, अमरवाड़ा के 35 तथा जुन्नारदेव के 183 मामले शामिल हैं।


यह हैं जिले की स्थिति -


विकासखंड एनीमिया रोगी गर्भवती घरेलू प्रसव संख्या


अमरवाड़ा 23 35
बिछुआ 09 18
चौरई 22 06
छिंदवाड़ा 08 00
हर्रई 27 42
जुन्नारदेव 08 183
मोहखेड़ 11 04
पांढुर्ना 08 29
परासिया 09 20
सौंसर 05 00
तामिया 29 101

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