ऐसे डॉक्टरों की आई अब सामत, हुई एफआईआर

दो झोलाछाप पर एफआईआर, बीएमओ समेत टीम ने दी थी दबिश

By: Dinesh Sahu

Published: 23 Mar 2018, 11:36 AM IST

छिंदवाड़ा . सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हर्रई क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले झोलाछाप डॉक्टर रमेश डेहरिया तथा आरके विश्वास के विरुद्ध हर्रई थाने में बीएमओ डॉ. वैभव सिंघई द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई है। बीएमओ सिंघई ने बताया कि सीएमएचओ के निर्देश पर फर्जी चिकित्सकों द्वारा डॉक्टर का बोर्ड लगाकर मरीजों की जांच तथा एलोपैथिक दवा दिए जाने का मामला प्रकाश में आया था।

 

इसके चलते बीएमओ ने तहसीलदार तथा पुलिस की मौजूदगी में ऐसे फर्जी क्लीनिकों पर छापामार कार्रवाई कर एलोपैथिक दवा जब्त की थी। साथ ही आवश्यक डिग्री की मांग करने पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे।

 

विरोध में आशा-उषा व सहयोगनियों ने मांगी भीख


मासिक वेतन समेत अन्य मांगों को लेकर आशा-उषा व सहयोगनी कार्यकर्ताओं की हड़ताल गुरुवार को भी जारी रही। इस दौरान आशा-उषा व सहयोगनियों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए सडक़ पर उतरकर भीख मांगी। वहीं हड़ताल खत्म करने के लिए विभिन्न जनप्रतिनिधि व प्रशासन की ओर से दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया।

 

जिलाध्यक्ष उर्मिला भादे ने बताया कि एएनएम द्वारा आशाओं को कार्य करने के लिए जबर्दस्ती की जा रही है। एेसा ही एक मामला खुनाझिरखुर्द की आशा कार्यकर्ता गीता कराडे़ के साथ होना बताया है। जिलाध्यक्ष भादे ने बताया कि आशा सहयोगनी को १५ हजार तथ आशा-उषा को १० हजार मासिक वेतन दिया जाए, नियमित कर्मचारियों के समान शासकीय सेवक घोषित किया जाए तथा प्रत्येक ग्राम में कार्य के लिए आरोग्य केंद्र बनाए जाने की मांग पूर्ण होने पर ही हड़ताल खत्म की जाएगी।

 

बढऩे लगा तापमान, पेयजल के लिए परेशान हो रहे मरीज


इन दिनों तेज धूप होने के साथ अब दोपहर में पल-पल गला सूखने लगा है। ऐसे में जिला अस्पताल प्रबंधन की अव्यवस्था मरीजों की परेशानी पड़ा रही है। जिला अस्पताल के विभिन्न विभागों में भर्ती मरीज इसकी शिकायत कर रहे हैं। हालांकि वर्तमान स्थिति में अस्पताल में पंखे तो चालू है, लेकिन कूलर बंद पड़े है।

 

इसके साथ ही ओपीडी व अन्य स्थानों पर शीतल पेयजल की व्यवस्था की मांग मरीज व उनके परिजन कर रहे हंै। गौरतलब है कि जिला अस्पताल में गायनिक विभाग के समीप ही पेयजल की व्यवस्था है। जबकि शेष स्थानों पर देख्-ारेख के अभाव में प्याऊ बंद पडे़ हैं। एेसे में पानी के लिए मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है।

 

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