कृषि वैज्ञानिकों ने दी किसानों को यह सलाह, आप भी जानें

बदलते मौसम का खेती पर असर

By: Rajendra Sharma

Published: 19 Jan 2019, 12:10 PM IST

छिंदवाड़ा. बदलते मौसम के साथ दिन में धूप अब तेज हो रही है इसको देखते हुए गेहूं, चना, मटर आदि फसलों में जल प्रबंधन करने की सलाह किसानों को दी जा रही है।
आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. वीके पराडकर ने बताया कि गेहूं की फसल बालियां निकलने की अवस्था में हैं, इसलिए जो किसान बीज उत्पादन करना चाहते हैं वे विजातीय पौधों को निकालकर खेत से अलग करें। चना की फ सल में फूल आना प्रारम्भ हो गए हैं। जब वह दाना में बदलते हैं उस समय फल छेदक कीट आने की सम्भावना होती है इसलिए अभी से खेतों में निगरानी रखनी होगी।

कीट का प्रकोप हो तो ये दवा डालें

मटर की फल्लियों में कीट प्रकोप की अधिकता होने पर स्पाईनोसेड नामक कीटनाशी दवा 0.3 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिडक़ाव करें। मटर में चुरणी फफूंदी का प्रकोप दिखने पर तीन ग्राम सल्फेक्स प्रति लीटरपानी में घोल बनाकर छिडक़ाव कर सकते हैं। इसी तरह कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों को माहू, चीपक के प्रकोप से बचाने के लिए इमेडाक्लोरोप्रिड 0.5 मिली प्रति लीटर पानी के छिडक़ाव के बाद १५ दिन के बाद डायमेथिएट दो मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ने कहा है। एक एकड़ में 200 लीटर घोल का छिडक़ाव किया जा सकता है। चने की फ सल में प्रारम्भिक कीट नियंत्रण के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन का प्रयोग जैसे फ ीरोमोन प्रपंच, प्रकाश प्रपंच या खेतों में पक्षियों के बैठने के लिए खूटी, पतक आदि की व्यवस्था की जानी चाहिए। आलू में अगेती और पिछेती अंगमारी का प्रकोप दिखाई देने पर मेंकोजेब 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से और आम, नीम्बू, संतरा और मौसमी में गमोसिस तथा एन्थ्रोकनोज के नियंत्रण के लिए 2.5 ग्राम ब्लाइटाक्स प्रति लीटर पानी में घोलकर छिडक़ा जा सकता है।

Rajendra Sharma Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned