Training: प्राकृतिक धरोहरों को बचाते हुए खेती करने की सलाह

नर्सरी के लिए दिए गए एक महीने के प्रशिक्षण का हुआ समापन

 

छिंदवाड़ा. कृषि विज्ञान केंद्र में एक महीने तक चले विशेष कौशल विकास कार्यक्रम का गत दिवस समापन हुआ। कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर ने भारतीय कृषि कौशल परिषद नई दिल्ली के प्रायोजन में इस एक महीने तक चले प्रशिक्षण में उद्यानिकी पौधों की नर्सरी तैयार करने के तरीके सिखाए गए। समापन अवसर पर जिला पंचायत सीईओ गजेंद्रसिंह नागेष ने अपने संबोधन में उद्यानिकी की क्षेत्र में नर्सरी का महत्व बताया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करने की बात कही। उन्होंने सफल पौध उत्पादन, वाटर हारवेस्टिंग और प्राकृतिक धरोहरों को बचाते हुए खेती करने और इसे बढ़ावा देने जागरूक किया। कृषि विज्ञान केंद्र की इन गतिविधियों की सराहना करते हुए नागेष ने कहा कि लघु धान्य और चिरौंजी प्रसंस्करण की संभावना को देखते हुए स्वसहायता समूह को तकनीकी मार्गदर्शन देकर इसका व्यवसायीकरण किया जा सकता है। समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे केंद्र प्रमुख डॉ सुरेंद्र पन्नासे ने प्रशिक्षणार्थियों को जिले में अच्छे नर्सरी कार्यकर्ताओं की कमी को पूरा करने के लिए तकनिकी ज्ञान से कौशल विकास होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। प्रशिक्षण प्रभारी डा आरके झाड़े ने बताया कि प्रशिक्षण 18 फरवरी को शुरू हुआ था। इसमें सभी प्रशिक्षणार्थियों को उद्यानिकी फसलों की नर्सरी के प्रबंधन स्वस्थ्य और रोगरहित पौध उत्पादन के बारे में तकनीकी जानकारी दी गई। डॉ झाड़े ने बताया कि सभी प्रशिक्षणार्थियों के कौशल का मूल्यांकन भारतीय कृषि कौशल परिषद, नई दिल्ली से आने वाले परीक्षकों के द्वारा किया जाएगा जिसमे उत्तीर्ण होने वाले प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ एसडी सावरकर, डा डीसी श्रीवास्तव ने भी सहयोग दिया। कार्यक्रम में चंचल भार्गव, डा सरिता सिंह, नितेश गुप्ता, डॉ एसके अहिरवार,एसएल अलावा का भी सहयोग रहा।

sandeep chawrey Reporting
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned