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आखिर कैसे बढ़ गया अस्पताल पर ये बोझ...पढि़ए खबर

गायनिक वार्ड में 24 घंटे काम करता है लेबर रुम, 80 फीसदी ग्रामीण इलाकों से आ रही महिलाएं

छिंदवाड़ा

Updated: May 27, 2022 09:14:15 pm

छिंदवाड़ा. जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थापित डिलेवरी प्वाइंट सक्रिय नहीं है या फिर चिकित्सकीय स्टाफ सेवा नहीं दे पा रहा है। इसके चलते जिला अस्पताल पर प्रसव का बोझ अपेक्षा से अधिक बढ़ रहा है। हालत यह है कि गायनिक वार्ड का लेबर रुम 24 घंटे काम कर रहा है। हर दिन औसतन 40 महिलाओं की डिलेवरी में ग्रामीण इलाकों की भागीदारी 80 प्रतिशत तक हैं।
जिले की 22 लाख की आबादी वाले जिला अस्पताल के अलावा सिविल अस्पताल 4, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र 13, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र 67 और उपस्वास्थ्य केन्द्र 377 हैं। जिला मुख्यालय को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश अस्पताल में महिला चिकित्सक नहीं हैं तो वहीं नर्सिंग स्टाफ के पास संसाधनों का अभाव है। इसके चलते कहीं से भी कोई गर्भवती महिलाएं इन स्वास्थ्य केन्द्रों में पहुंचती है तो ज्यादा तकलीफ होने पर स्थानीय स्टाफ रिस्क न लेकर उसे सीधे जिला अस्पताल रेफर कर देता हैं। गायनिक वार्ड की नर्सेस खुद स्वीकार कर रही है कि जिले भर के डिलेवरी प्वाइंट के रैफरल व्यवहार के चलते उन पर डिलेवरी का अतिरिक्त बोझ बढ़ता जा रहा है। इसके चलते 24 घंटे लेबर रुम में चिकित्सक और अन्य स्टाफ को निगरानी रखनी पड़ती हैं। जबकि ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य स्टाफ को भी उनके बराबर ही तनख्वाह मिल रही है। इस पर चिकित्सा अधिकारियों को स्टाफ की जिम्मेदारी तय करना चाहिए।
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सौंसर-पांढुर्ना को छोड़कर पूरे जिले से आती है महिलाएं
अस्पताल का डिलेवरी रिकार्ड देखा जाए तो सौंसर, पांढुर्ना के दूरस्थ अंचल छोड़ दिया जाए तो शहर के अलावा छिंदवाड़ा ग्रामीण, मोहखेड़, चौरई, जुन्नारदेव, परासिया, तामिया समेत अन्य क्षेत्र की महिलाएं 108 वाहन और एम्बुलेंस से पहुंचती है। इनमें रैफर केस ज्यादा होते हैं।
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गायनिक वार्ड में माहवार डिलेवरी
माह भर्ती डिलेवरी
जनवरी 1013 790
फरवरी 1140 872
मार्च 1364 1077
अप्रैल 1229 920
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इनका कहना है...
जिला अस्पताल में डिलेवरी की संख्या ग्रामीण इलाकों से आनेवाली महिलाओं की भर्ती से बढ़ रही है। इसका एक कारण यह भी है कि गायनिक वार्ड में अपेक्षाकृत बेहतर सुविधाएं, चिकित्सक और स्टाफ हैं।
-डॉ.शिखर सुराना, सिविल सर्जन जिला अस्पताल।

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