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Anganwadi Workers: आखिर क्यों... अहमियत से अनजान सरकार

किराए के भवन से लेकर फील्ड तक निभाती हैं जिम्मेदारी, लेकिन बदइंतजामी ने कर रखा है परेशान

छिंदवाड़ा

Published: November 19, 2021 10:42:26 am

प्रभाशंकर गिरी
छिंदवाड़ा। शायद की कोई दहलीज होगी जहां कभी किसी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या सहायिका ने दस्तक नहीं दी होगी। परिवार की सेहत से लेकर सलाह तक हर कदम पर अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं, बस उन्हें टीस इस बात की है कि उनके इस किरदार को शासन से न्याय नहीं मिलता।
750 रुपए किराए पर आंगनबाड़ी केंद्र के लिए भवन तलाश करना शहर में चुनौती से कम नहीं है। भवन मिल भी जाए तो निर्धारित मापदंडों को पूरा कर पाना मुश्किल हो जाता है। इसके बाद भवन मालिक को इस बात के लिए राजी करना कि किराया उसे नियमित नहीं बल्कि हर तीन माह के अंतराल में दिया जाएगा। इधर, ग्रामीण क्षेत्रों में भवन किराए के लिए 500 रुपए का प्रावधान है, लेकिन यहां भुगतान की कोई समयावधि नहीं है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कार्य हमेशा चुनौती भरा रहता है। यदि भवन मिल जाता है तो सुविधाएं नदारत रहती हैं। सुविधाएं मिल जाएं तो भवन का किराया बजट से बाहर हो जाता है। इनका संघर्ष यहीं खत्म नहीं होता। विभागीय कार्य के अलावा राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाएं में इनकी भागीदारी, पोषण योजनाओं का संचालन, टीकाकरण अभियान, टेक होम राशन जैसी तमाम जिम्मेदारियों को निभाना पड़ता है। गैर विभागीय काम करते-करते विभागीय कामों के लिए समय न मिल पाने से कार्रवाई का डर भी सताता है, बावजूद इसके इन्हें सिर्फ विभागीय कार्य का ही भुगतान किया जाता है। गौरतलब है कि वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दस हजार 63 रुपए (राज्य से 5500 रुपए और केंद्र से 4563 रुपए) जबकि सहायिकाओं को पांच हजार रुपए मानदेय दिया जा रहा है।
दो लाख आबादी के बीच नहीं एक भी केंद्र
जिले में 20,01951 की जनसंख्या (वर्ष 2011 की जनगणना) पर वर्तमान में 3057 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 193 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र भी शामिल हैं। विडम्बना यह है कि जिले में कुल 310 गांव या वार्ड हैं जहां आज भी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं हैं। इन क्षेत्रों की कुल आबादी 2,14,119 है।
chhindwara
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ऐसी हैं चुनौतियां

निर्देश जो करते हैं परेशान
हाल ही में पोषण ट्रैकर में गर्भवती, धात्री, जीरो से छह वर्ष तक के बच्चों की प्रविष्टि नहीं होने पर कार्यकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके लिए महज दो दिनों का समय मिला। दरअसल पोषण ट्रैकर ऐप में समस्त हितग्राही की जानकारी भरना होता है जिसके लिए इन्हें शासन से कोई भी संसाधन नहीं दिए जाते।

बदइंतजामी ऐसी भी ...
अमरवाड़ा परियोजना के पौनार सेक्टर अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र हिंगपानी में भवन नहीं है। कार्यकर्ता के घर ही आंगनबाड़ी लगती है और किराया भी नहीं मिलता।
डराती हैं ऐसी तस्वीरें
आंगनबाड़ी केंद्र जहां छोटे बच्चों की मौजूदगी हो वहां ऐसी तस्वीर परेशान करती हैं। अमरवाड़ा परियोजना के छुई-01 केंद्र की यही स्थिति है। इसके अलावा कुंडा-1, खैररांजढ़ाना, घोराबाड़ी जैसे कई आंगनबाड़ी केंद्र हैं जो जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए कई बार अधिकारियों को जानकारी दी गई, लेकिन हल नहीं निकला।
इनका कहना है
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से अन्य कार्य न करवाए जाएं ताकि विभागीय कार्य प्रभावित न हो। इसके अलावा नियमितीकरण और शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। पदोन्नति का प्रावधान हो। गैर विभागीय कार्यों पर खर्च होने वाली राशि का भुगतान हो। साथ ही हमारी मानदेय की राशि में बढ़ोतरी हो ताकि हम अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
सविता ठाकुर
अध्यक्ष, मप्र बुलंद आवाज नारी शक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संगठन
आंगनबाड़ी केंद्र भवन का किराया कक्ष के निर्धारित एरिया पर निर्भर है। जहां तक गैर विभागीय काम के भुगतान का सवाल है, उसमें कोरोना आपदा में सहभागिता जरूरी है। मतदाता सूची समेत अन्य में नियमानुसार भागीदारी का प्रावधान है।
-कल्पना तिवारी, महिला बाल विकास अधिकारी

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