मुख्यमंत्री के जिले की आंगनबाडिय़ों को रहमो करम की दरकार

मुख्यमंत्री के जिले की आंगनबाडिय़ों को रहमो करम की दरकार
Anganwadians need the building

Prabha Shankar Giri | Updated: 22 Jun 2019, 09:00:00 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

वर्षों से हो रहा संचालन, फिर भी स्थायी ठिकाना नहीं

छिंदवाड़ा. प्रदेश तथा केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी और बेहद जरूरी योजनाओं को मैदानी स्तर पर क्रियान्वित करने वाली आंगनबाडिय़ों को सरकार के रहमो करम की दरकार है। वर्षों से इन आंगनबाडिय़ों का संचालन हो रहा है, लेकिन अब तक इन्हें सरकारी जमीन नहीं मिल सकी है। मोहल्लों के एक कमरे में चल रहे इन केंद्रों में जैसे-तैसे संचालन हो रहा है। एक कमरे में बच्चे भी खेलते हैं। वहीं उन्हें नाश्ता और भोजन भी कराया जाता है। विशेष दिनों में होने वाले आयोजन भी यहीं होते हैं। इसी कमरे में कार्यकर्ता और सहायिका अपने विभागीय कार्य भी बैठकर करती हैं। जिला मुख्यालय में निगम क्षेत्र में आने वाली 169 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 114 किराए के भवन में हैं। 28 केंद्र स्कूल भवनों में लग रहे हैं। सिर्फ 22 केंद्र आइसीडीएस के हैं। कुछ केंद्र तो कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के घरों में संचालित हो रहे हैं। शहर में जो 22 भवन हैं उनमें से भी ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र के हैं जो निगम में शामिल होने के बाद शहर में शामिल हो गए हैं। पूरे जिले के हाल भी देखें तो कुल 3057 केंद्रों में से सिर्फ 979 केंद्र हैं जो खुद के विभाग के बने भवनों में संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 2100 से ज्यादा केंद्र या तो किराए के भवन में चल रहे हैं या फिर अन्य सरकारी भवनों, नपा, निगम की जगहों और सरकारी स्कूलों या फिर ग्रामीण विकास विभाग के कमरों में संचालित हो रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन व नेता नहीं लेते रुचि
स्थानीय प्रशासन के साथ क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और विधायकों की अनदेखी और रुचि न लेने के कारण भी केंद्रों के लिए जगह ढूंढना मुश्किल हो रहा है। विभाग कार्यकर्ताओं से कहता है कि वे जगह देखें। जबकि यह काम जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को करना चाहिए। केंद्र संचालित करने वाली कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी भवनों, शॉपिंग मॉल और अन्य भवनों के लिए सरकारी जगह ढूंढ ली जाती है और आनन-फानन में अलॉटमेंट भी हो जाता है, लेकिन बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पोषण के लिए संचालित इन केंद्रों के लिए जगह नेता और प्रशासन मुहैया नहीं करा पाता है यह विडम्बना है।

इनका कहना है
शहर में पांच केंद्रों के लिए शासकीय जमीन देख ली गई है। स्वीकृति मिलने के बाद वहां केंद्र संचालन के लिए भवन का निर्माण शुरू किया जाएगा। हमारी कोशिश रहती है कि किराए से भी केंद्र संचालित हों तो वहां हवा, पानी, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाएं अवश्य हों।
कल्पना तिवारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, छिंदवाड़ा

जिले की स्थिति
3057 कु ल आंगनबाड़ी केंद
797 विभागीय भवन में
291 पंचायत भवन में
801 प्रथामिक शालाओं में
18 निगम के भवनों में
865 किराए पर संचालित

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