नेताओं में रावण सा अहंकार नहीं राम जैसी शुचिता हो

नेताओं में रावण सा अहंकार नहीं राम जैसी शुचिता हो

Prabha Shankar Giri | Publish: Oct, 14 2018 11:57:07 AM (IST) Chhindwara, Madhya Pradesh, India

रामायण के कई चरित्रों से सीखने की जरूरत बताई कलाकारों ने

संदीप चवरे
छिंदवाड़ा. चुनाव की सरगर्मी के बीच रामलीला का मंचन देशभर में हो रहा है। प्रजा को रामराज्य के सपने हर राजनीतिक दल और नेता दिखाता है। मंच से राम के आदर्शों का बखान और उनके जीवन को अपने चरित्र में उतारने की बात भी कही जाती है, लेकिन वास्तव में नेता क्या राम और रामायण के विभिन्न पात्रों के जीवन को अपने में उतार पाते हैं। देश की सबसे पुरानी और एेतिहासिक रामलीला मेंं मुख्य पात्रों का अभिनय कर रहे कलाकारों से पत्रिका ने राजनीति और राजनीतिज्ञों पर चर्चा की। सबका यही करना पड़ा कि कत्र्तव्य, मर्यादा, त्याग, अपने कार्य और जीवन में शुचिता मानस के चरित्रों से नेताओं को सीखना चाहिए।

राजा के रूप में उनके त्याग को सीखने की जरूरत है। राम के पूरे जीवन को हम देखें तो उनके राज्य में प्रजा को कभी कोई कष्ट नहीं हुआ। दुखी हुए और प्रताडऩा झेली तो उनके अपनों ने। राज्य में तकलीफ भले ही अपनों को हो, लेकिन जनता सुखी रहे। मुझे लगता है कि वर्तमान में यह बात जनप्रतिनिधियों को समझनी चाहिए यदि वे सचमुच लोगों के दिलों में राज करना चाहते हैं तो।
वीरेंद्र शुक्ल ‘राम’

मर्यादित आचरण, दूसरों की हमेशा मदद, नर्म आचरण, लेकिन वक्त पडऩे पर सख्ती भी यह बात लक्ष्मण से सीखी जानी चाहिए। लक्ष्मण के चरित्र में यही सब बातें दिखती है। छोटो को स्नेह और बड़ों को सम्मान दें। ज्यादा नर्म रहें न सख्त समय के अनुसार अपने आचारण में यह व्यवहारिक संतुलन के गुणों का अनुसरण नेताओं को करने की जरूरत है। तभी जनता का भला हो सकेगा।
ऋषभ स्थापक ‘लक्ष्मण’

नेता के बिना समाज संगठित नहीं हो सकता। अपने स्वभाव, सिद्धगुणों से तथा उपयोगिता से वह सबका प्रिय बनता है। अपने वादे पर अटल रहना भले ही और किसी को दिए वचन को पूरा करना। कैकेई को दिए वरदान को मानने से वे मुकर सकते थे, लेकिन उन्होनंे कष्ट सहा और राजा बनने वाले राम को वनवास दिया। सर्वमान्य बनने के लिए जनप्रतिनिधियों को उनसे सीख लेनी चाहिए।
श्रांत चंदेल ‘दशरथ’

रावण के चरित्र से तो सबसे ज्यादा सीखने की जरूरत है नेताओं को। वह हारा तो केवल अपने अहंकार के कारण। उसके आदर्श थे अच्छे काम को सबसे पहले करना। मृत्यु के पूर्व लक्ष्मण को वे राजनीति का पाठ सिखाते हैं। रावण वीरों का सम्मान करता था। वैमनस्यता को खत्म कर और एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने की राजनीति खत्म होनी चाहिए। आज के नेताओं को रावण का चरित्र यह पाठ सिखाता है।
विनोद विश्वकर्मा ‘रावण’

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