मनरेगा में बड़ा बदलाव, अब भ्रष्टाचार की गुंजाइश हुई खत्म

मनरेगा में बड़ा बदलाव, अब भ्रष्टाचार की गुंजाइश हुई खत्म
New rules in MNREGA

Prabha Shankar Giri | Publish: Mar, 21 2019 08:00:00 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

मनरेगा में अक्टूबर से लागू होंगे नए नियम: तकनीकी स्वीकृति से लेकर निर्माण तक समय सीमा निर्धारित

छिंदवाड़ा. गांव में सडक़, नाली, मेढ़बंधान समेत अन्य निर्माण कार्य कराने होंगे तो कम्प्यूटर पर इस्टीमेट तैयार मिलेगा। इसके साथ ही इंजीनियर भी ऑनलाइन तकनीकी स्वीकृति देंगे। सरपंच से लेकर सहायक यंत्री तक हर किसी पर समय सीमा में काम कराने का दबाव रहेगा। मनरेगा में यह नियम आगामी अक्टूबर माह से लागू हो जाएंगे।
मनरेगा में अभी तक हर कार्य चाहे पंचायतों के निर्माण के प्रस्ताव हों या फिर इंजीनियर के नक्शे, तकनीकी स्वीकृति तथा एमबी का लिखना आदि मैनुअल होते हैं। इससे सरपंच, सचिव और इंजीनियर अपनी मनमर्जी से काम करते आए हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इस सॉफ्टवेयर में हर निर्माण के प्रस्ताव से लेकर उसके अंत तक हर चरण को समय सीमा में लिया गया है। नई व्यवस्था यह है कि वित्तीय वर्ष के पहले पंचायतों को अपने निर्माण कार्य के प्रस्ताव लेने होंगे। फिर उसे सॉफ्टवेयर में अपलोड करना होगा। फिर सरपंच के लॉगिन से निर्माण के प्रस्ताव फोटो, नक्शा समेत अन्य दस्तावेज अपलोड होंगे। निर्धारित समय सीमा में तकनीकी स्वीकृति के लिए यह इंजीनियर के लॉगिन में पहुंचेगा, जहां इंजीनियर को मंजूरी देकर उसे सहायक यंत्री के लॉगिन में भेजना होगा। फिर सहायक यंत्री अपनी स्वीकृति देकर उसे वापस सरपंच के लॉगिन में भेजेंगे। यहीं से प्रशासकीय स्वीकृति हो जाएगी और मस्टररोल जनरेट होंगे। इस तरह कोई भी अपना काम अटकाकर नहीं रख सकेगा। इसकी जनपद पंचायत स्तर पर ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
आरइएस का स्टेट एसओआर होगा लागू
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा हर निर्माण कार्य में आरइएस विभाग के स्टेट एसओआर के नियम लागू होंगे। पहले हर निर्माण कार्य में अपने मन मुताबिक रेट भर लेते थे और इसका मूल्यांकन भी कर दिया जाता था। अब रेट निर्धारित ही लिखना होगा। इस रेट एक लाभ यह भी होगा कि निर्माण कार्य के कॉलम भरते ही पूरा इस्टीमेट कम्प्यूटर पर आ जाएगा।
इंजीनियर की एमबी भी होगी सार्वजनिक
नए नियम में इंजीनियर द्वारा निर्माण कार्य में उपयोग सामग्री और मजदूरी का मूल्यांकन अभी तक मैनुअल लिखा जाता है। उसे एमबी कहा
जाता है। अब यह एमबी ऑनलाइन करनी होगी। यह सार्वजनिक होने पर कोई भी व्यक्ति उसे देख सकता है। इस तरह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शिता पूर्ण होगी।

मनरेगा में निर्माण कार्य के ऑनलाइन इस्टीमेट, तकनीकी स्वीकृति और समय सीमा में काम करने की ट्रेनिंग जनपद पंचायत स्तर पर दी जा रही है। आगामी अक्टूबर से इसके लागू होने की सम्भावना है।
निशांत सिक्केवाल, परियोजना अधिकारी मनरेगा जिला पंचायत

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