Big Issue: किसानों ने एमएसपी के साथ मांगी सरकार से गारंटी

किसानों ने कहा, कम दर पर बिकने पर सरकार पूरा करे नुकसान

By: prabha shankar

Published: 11 Jun 2021, 11:50 AM IST

छिंदवाड़ा। केंद्रीय कैबिनेट में खरीफ की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की गई है जिसे किसानों के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है। इसे लेकर जिले के किसानों में अलग-अलग मत हैं। कुछ किसानों को मानना है एमएसपी बढ़ाने से उपज के रकबे में बढ़त होगी और आयात में कमी आएगी। लेकिन ज्यादातर किसानों का मानना है कि एमएसपी लागू होने के साथ खरीदी की गारंटी भी होना चाहिए तभी किसानों को फ ायदा होगा।

इनका कहना है
जिस तरह उपज आने पर कृषकों को एमएसपी का लाभ दिया जाता है और व्यापारियों को ऐन समय एमएसपी से ऊपर माल लेने पर मजबूर किया जाता है, उसी तरह, एमएसपी का समय समाप्त होने पर मंहगाई का रोना रोकर व्यापारियों पर सख्ती नहीं दिखानी चाहिए। एमएसपी के साथ सरकार को उसी तरह खुदरा एवं थोक में मिनिमम सेल्स प्राइस भी घोषित करना चाहिए। सभी प्रोसेसिंग और कमीशन मिलाकर किसानों को दी जाने वाली एमएसपी के बराबर होना चाहिए। -प्रतीक शुक्ला, अध्यक्ष छिंदवाड़ा अनाज व्यापारी संघ

फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी अच्छा कदम है पर दिक्कत यह है कि उपज के मूल्य एमएसपी के बावजूद नहीं मिल रहे हैं। सरकार को एमएसपी पर उपज बिक्री के लिए सख्त होना चाहिए। व्यापारियों के लिए भी नियम बनाया जाए। उससे नीचे की खरीदी पर उसके नुकसान की भरपाई हो। किसानों को लाभ तभी होगा जब एमएसपी के ऊपर उसकी उपज के दाम मिलें।
चक्रपाल सिंह रघुवंशी किसान नेता

एमएसपी में वृद्धि वर्तमान परिदृश्य में सही निर्णय है। इससे बहुत सारी फसलों की बोवनी का रकबा बढ़ेगा। आयात पर निर्भरता कम होगी। किसान समृद्ध होगा। बशर्ते एमएसपी से नीचे उपज की बिक्री न हो।
अरविंद पटेल, किसान जमुनिया

एमएसपी से देशभर के किसानों को लाभ होगा, बिचौलिए समाप्त होंगे। सरकार ने पहले भी भावंातर के माध्यम से नुकसान कवर किया है। सरकार को एमएसपी पर उपज की बिक्री सुनिश्चित करना चाहिए।
दिनेश आरसिया, किसान टेमनीखुर्द

एमएसपी का प्रचार सिर्फ कागजों में किया जाता है। छिंदवाड़ा जिले में दो साल से किसान ठगा जा रहा है। व्यापारी मनचाहे दामों पर मंडियों में उपज की खरीदी करते हैं। इस दौरान एमएसपी के दाम नहीं मिलते।
शीतल कुमार किसान मोठार

सरकार एमएसपी तय करती है परंतु किसानों को एमएसपी के अनुसार मूल्य नहीं मिलता हैं। डीजल-पेट्रोल, खाद मंहगा होने से लागत बढ़ी है, लेकिन कॉर्न सिटी छिंदवाड़ा में ही मक्का एमएसपी से आधे दाम पर बिका है।
आकाश सूर्यवंशी किसान मानकादेही खुर्द

अपने जिले की बात करें तो मक्का की एमएसपी 1870 तय है परंतु इस रेट पर किसान का मक्का बिकता नहीं ह। यदि सरकार मक्का की एमएसपी तय करती है तो उन्हें खुद खरीदी करके किसान को लाभ देना चाहिए।
संत राय किसान सारसवाड़ा

समर्थन मूल्य 1850 के आसपास तक मक्का नहीं बिका। डीजल, खाद बीज, के दामों से किसानों का दम निकल रहा है। सरकार को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कर एमएसपी गारंटी कानून लागू करना चाहिए।
अरविंद सिंह रघुवंशी बांसखेड़ा

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