कोल इंडिया में बड़ा घोटाला: पीएफ के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी

वेतन से राशि कटौती तो की गई, लेकिन उनके भविष्य निधि खाते में जमा नहीं कराई गई

By: prabha shankar

Published: 22 Aug 2017, 11:27 AM IST

छिंदवाड़ा/परासिया. कोयला खदानों में काम करने वाले ठेका मजदूरों की भविष्य निधि राशि में बड़ी हेराफेरी सामने आई है। यहां वर्षों से कार्यरत ठेका मजदूरों के वेतन से राशि कटौती तो की गई, लेकिन उनके भविष्य निधि खाते में जमा नहीं कराई गई। ठेका मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे अधिवक्ता रफीक खान बताते हैं कि मध्यप्रदेश में वेकोलि की खदानें पेंच कन्हान तथा पाथाखेड़ा क्षेत्र में हैं। यहां करीब तीन हजार ठेका मजदूर काम करते हैं, लेकिन भविष्य निधि कार्यालय में मात्र एक हजार 552 मजदूर ही पंजीकृत हैं। सैकड़ों मजदूरों के वेतन से काटी गई राशि मजदूरों के खातों में क्यों जमा नहीं की गई और करोड़ों रुपए किसके पास जमा हैं इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। इकलेहरा निवासी शिवराम साहू ने बताया कि उन्होंने 1998 से 2016 तक अम्बाड़ा मोहन कॉलरी में ठेका मजदूर का काम किया। इस दौरान उसकी मजदूरी से सीएमपीएफ के नाम पर राशि काटी गई। जिसमें नियोक्ता का अंशदान मिलाकर करीब दो लाख रुपए होते हंै, लेकिन जब वह कोयला खान भविष्य निधि कार्यालय छिंदवाड़ा गया तो पता चला कि उसके खाते में कोई राशि जमा नहीं है। शिवराम साहू ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक से करते हुए धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने की मांग की है।

इस तरह होती है गड़बड़ी
ठेका मजदूर के वेतन से 10.84 प्रतिशत राशि भविष्य निधि के तौर पर काटी जाती है। इतनी ही राशि ठेकेदार के बिल से काटकर वेकोलि को सीएमपीएफ कार्यालय छिंदवाड़ा में डीडी के माध्यम से जमा करनी होती है। लेकिन किस मजदूर को कितना वेतन मिला और कितनी राशि कटौती की गई इसके लिए वीवी स्टेटमेंट और पीएस-5 फॉर्म जमा करना होता है। बस यहीं से गड़बड़ी शुरू होती है। ठेकेदार स्टेटमेंंट और फॉर्म जमा नहीं करता है। वेकोलि कटौती राशि का डीडी बनाकर सीएमपीएफ कार्यालय भेजती है जिसे स्टेटमेंट न होने के कारण लौटा दिया जाता है। इस तरह राशि काट ली जाती है और जमा भी नहीं होती। जानकारी के अनुसार ठेकेदार निर्धारित मजदूरी से कम भुगतान करते हैं। मजदूर लम्बी कार्य अवधि को लेकर अन्य सुविधाओं की मांग या दावा न करने लगें इसलिए ठेकेदार और प्रबंधन मिलकर इस तरह के हालात बना देते हैं कि मजदूरों की राशि खाते में जमा नहीं हो पाती है।

मजदूरों की मौत के बाद भटक रहे परिजन
बडक़ुही निवासी स्व. नरेश ने मोहन कॉलरी में लगभग पंद्रह वर्ष मजदूरी की। उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी शकुन बाई ने सीएमपीएफ राशि के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ न मिला। वह किसी तरह अपनी दो पुत्री और एक पुत्र का पालन पोषण कर रही हैं। इकलेहरा निवासी शैलू विश्वकर्मा के पति कुंवरलाल भी ठेका मजदूर थे। उनकी मृत्यु के बाद चार वर्ष से वह भटक रही हैं। यही कहानी आरसे के परिवार की है। ऐसे सैकड़ों लोग हैं जिन्हें अपने खून पसीने की कमाई के लिए भटकना पड़ रहा है।

इनका कहना है
ठेका मजदूरों की भविष्य निधि राशि कटौती में बड़ा घोटाला ह, जिसकी उच्च स्तर पर जांच कर जवाबदारी तय होनी चाहिए। मजदूर और ठेकेदार से काटी गई राशि कहां गई मजदूरों के खाते में क्यों जमा नहीं हुई इसका जवाब मिलना चाहिए। यह करोड़ों रुपए का मामला है। सैकड़ों मजदूर ऐसे हैं जिनका सीएमपीएफ खाता खुला नहीं है लेकिन कटौती की जा रही है।
रफीक खान, अध्यक्ष कोल मजदूर यूनियन अंबाड़ा

श्रमिकों के नियोक्ता द्वारा निर्धारित फार्म में जानकारी भेजने पर ही खाता संख्या आवंटित की जाती है। वेकोलि प्रबंधन से शिवराम साहू के कार्य के दौरान काटी गई राशि अप्राप्त है। हमारे पास कोई भी राशि भुगतान करने के लिए बकाया नहीं है।
सहायक आयुक्त, कोयला खान भविष्य निधि

शिवराम साहू की राशि के बारे में प्रबंधन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। भविष्य निधि राशि कटौती की जानकारी वित्त विभाग से प्राप्त की जा सकती है।
एके शर्मा, तत्कालीन खान प्रबंधक

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