स्वैच्छिक रक्तदान से मासूमों के चेहरे पर आती है मुस्कान

स्वैच्छिक रक्तदान से मासूमों के चेहरे पर आती है मुस्कान

mantosh singh | Publish: Jun, 14 2018 06:53:49 PM (IST) Chhindwara, Madhya Pradesh, India

विश्व रक्तदाता दिवस पर विशेष

छिंदवाड़ा. जिले में सिकलसेल, एनीमिया एवं थैलेसीमिया जैसी बीमारियां से सैकड़ों बच्चे ग्रसित हैं। दोनों आनुवांशिक बीमारियां हंै जिसमें बच्चों के शरीर में या तो रक्त ठीक से बनता नहीं या फिर उनका रक्त पानी बन जाता है। पीडि़त बच्चों के परिजन को परेशान होते अस्पतालों में देखा जा सकता है। लोगों द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान करने से इन बीमारियों से पीडि़त बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आती है। इसके साथ ही रक्तदान से जरूरत मंद लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।

रक्तदान कर एक मिशाल कायम करनी चाहिए

सबसे ज्यादा रक्त की जरूरत दुर्घटना के शिकार लोगों के जीवन बचाने में, शल्य चिकित्सा के समय, एनीमिया के मरीजों के लिए, शिशु के जन्म के समय गभर्वती महिला को, आरएच निगेटिव माताओं के लिए शिशुओं की जीवन रक्षा के लिए, कैसर थैलसीमिया के मरीजों के लिए पड़ती है। 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है लोगों को जागरूक होकर स्वैच्छिक रक्तदान कर एक मिशाल कायम करनी चाहिए।

रक्तदान करने को लेकर गलत धारणाएं

गौरतलब है कि पूर्व में कई बार जिला अस्पताल में खून की कमी सामने आई है समय-समय पर सामाजिक संस्थाओं व बुद्धिजीवी वर्ग के लोग आगे आए तथा रक्तदान किया है। रक्तदान करने को लेकर लोगों में कई तरह की गलत धारणाएं फैली हुई हैं जिसमें रक्तदान करने से कमजोरी व बीमार होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। लेकिन यह धारणाएं बिलकुल गलत है।

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रक्तदाता से एक बार में 300 से 400 मिली रक्त लिया जाता है। जो शरीर में उपलब्ध रक्त का लगभग 15 वां भाग होता है। शरीर में रक्तदान के तत्काल बाद दान किए गए रक्त की प्रतिपूर्ति करने की प्रकिया प्रारंभ हो जाती है, लगभग 24 घंटे में दान किए गए रक्त की प्रतिपूर्ति हो जाती है। शरीर में प्रवाहित होने वाले रक्त का आयतन रक्तदान से अप्रभावित रहता है।

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