फोन से सहायता मांगो तो गुड सर्विस नहीं देते अफसर

फोन से सहायता मांगो तो गुड सर्विस नहीं देते अफसर

manohar soni | Publish: Jun, 14 2018 11:24:27 AM (IST) Chhindwara, Madhya Pradesh, India

तीन महत्वपूर्ण सेवाओं में सीएम हेल्पलाइन से ज्यादा असंतुष्ट,पैंडिंग केस भी अपेक्षाकृत अधिक



छिंदवाड़ा.राज्य शासन की तीन महत्वपूर्ण सेवाओं में से सीएम हेल्पलाइन का परफारमेंस सबसे खराब माना जा रहा है,जिसका संतुष्टि के साथ बंद शिकायतों का औसत २२.४ फीसदी है। जबकि समाधान एक दिन और राजस्व की आरसीएमएस सेवा की रिपोर्ट अपेक्षाकृत अच्छी बताई गई है। राज्य स्तर पर इन सेवाओं की निगरानी कर रहे डैश बोर्ड की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
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हेल्पलाइन में २३वें स्थान पर जिला
सीएम हेल्पलाइन के डैशबोर्ड के मुताबिक छिंदवाड़ा जिले में जून माह में ४१६८ शिकायतें मिली। इनमें संतुष्टि के साथ बंद शिकायतों का औसत २२.४,नॉट अटैण्ड १७.९,सौ दिन से अधिक ५.९ तथा निम्न गुणवत्ता के साथ बंद ९.६ फीसदी रही। इससे जिले का वेटेज ५५.७ रहा। यह स्थिति ५५.७ फीसदी होने पर प्रदेश में २३वीं रैंकिंग रही। इस स्थिति से साफ है कि डायल १८१ से मांगी जा रही शिकायतों के प्रति विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं है। जबकि हर टीएल की बैठक में कलेक्टर कड़ी फटकार लगाते हैं। फिर भी सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।
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समाधान एक दिन में तुरंत निराकरण
राज्य शासन द्वारा ३० से अधिक विभागीय सेवाओं को तुरंत देने की योजना समाधान एक दिन के बेहतर रिजल्ट मिल रहे हैं। जून माह में छिंदवाड़ा जिले के लोकसेवा केन्द्रो के माध्यम से अब तक ११२०८ आवेदन प्राप्त हुए। इनमें उसी दिन १०४५४ का निराकरण किया गया। दूसरे दिन ६५२ हितग्राहियों को खसरा-नकल,प्रमाणपत्र समेत अन्य सेवाएं दी गई। इस सेवा का रिकार्ड से छिंदवाड़ा प्रदेश के टॉप जिलों में आ गया है। फिलहाल इस सेवा से तहसील कार्यालयों में भटकने वाले भी कम हो गए हैं। लोग लोक सेवा केन्द्रों में ये सेवाएं पा रहे हैं।
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नामांतरण-बंटवारा से भी मिली राहत
नामांतरण,बंटवारा,अतिक्रमण और जमीन के डायवर्सन केस के त्वरित निराकरण के लिए राज्य शासन द्वारा आरसीएमएस साफ्टवेयर बनाया गया है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से तहसीलदार और एसडीएम द्वारा निराकृत किए जा रहे केस की निगरानी की जा रही है। डैश बोर्ड की माने तो २३ मई १६ से लेकर १२ जून १८ तक छिंदवाड़ा में ७१७०४ केस निराकृत किए गए जबकि पैंडिंग केस की संख्या १६९५९ रही। इस सॉफ्टवेयर के आने के बाद अविवादित नामांतरण और बंटवारा जैसे केस नाममात्र के रह गए हैं। इससे ग्रामीण जनता को काफी राहत मिली है।

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