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बदलाव...एक क्लिक पर स्क्रीन के सामने आ जाएगी पुरानी रजिस्ट्री

locationछिंदवाड़ाPublished: Feb 02, 2024 11:51:28 am

Submitted by:

manohar soni


-पिछले सात माह में तीन साल की संपत्ति के रिकार्ड डिजीटल,पहले चरण मेें 15 साल के दस्तावेजों की स्कैनिंग का लक्ष्य

बदलाव...एक क्लिक पर स्क्रीन के सामने आ जाएगी पुरानी रजिस्ट्री
बदलाव...एक क्लिक पर स्क्रीन के सामने आ जाएगी पुरानी रजिस्ट्री
छिंदवाड़ा.भविष्य में कम्प्यूटर पर एक क्लिक करते ही पुरानी रजिस्ट्री स्क्रीन के सामने आ जाएगी। पंजीयन विभाग ने वर्ष 2015 से पहले के संपत्ति खरीदी-बिक्री के रिकार्ड का डिजीटलाइजेशन शुरू कर दिया है। पहले चरण में 15 साल के दस्तावेजों की स्कैनिंग का लक्ष्य रखा गया है।
विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 के बाद से पूरे प्रदेश में संपदा सॉफ्टवेयर के माध्यम से मकान, प्लॉट, कृषि भूमि समेत अन्य संपत्तियों की डिजीटल रजिस्ट्री हो रही है। इससे पहले संपत्ति के सौदों का हस्तलिखित रजिस्ट्री का चलन था। पंजीयन विभाग में ऐसे दस्तावेज देखरेख के अभाव में कहीं दीमक के शिकार हो रहे हैं तो कहीं उनका रिकार्ड खराब हो रहा है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने ऐसे रिकार्ड को स्कैन कर कम्प्यूटर की सॉफ़्ट कापी में में लाने का निर्णय लिया। उसके बाद छिंदवाड़ा का ठेका चेन्नई की एक कंपनी को दिया गया है। पिछले सात माह से प्रतिदिन वर्ष 2015 के पहले के रिकार्ड की स्कैनिंग की जा रही है। फिर से एमपी आईजीआर की वेबसाइट में अपलोड किया जाएगा।
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2500 से अधिक रिकार्ड की स्कैनिंग
इस डिजीटलाइजेशन के काम मेें लगे कर्मचारियों की मांने तो वर्ष 2015, 14 और 2013 के करीब 2500 से अधिक संपत्ति की रजिस्ट्री के दस्तावेजों की स्कैनिंग हो गई है। वर्ष 2012 के रिकार्ड की स्कैनिंग शुरू की जा रही है। कंपनी को वर्ष 2000 तक का रिकार्ड स्कैन करने का लक्ष्य दिया गया है।
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धोखाधड़ी की संभावना कम, कम्प्यूटर पर सीधे रिकार्ड
पुरानी रजिस्ट्री के कम्प्यूटर पर एमपी आईजीआर की वेबसाइट पर अपलोड होने पर कोई भी खरीददार संपत्ति खरीदने से पहले इसे खुद देख सकेगा। इसके साथ ही जांच पड़ताल कर सकेगा। इससे संपत्ति की बिक्री में होनेवाली धोखाधड़ी रुक जाएगी। फिलहाल इसके अभाव में एक संपत्ति कई बार बिक जाती है और खरीददार धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं।
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इनका कहना है...
पंजीयन विभाग की ओर से लगातार पुराने दस्तावेजों का डिजीटलाइजेशन कराया जा रहा है। इससे भविष्य में ये रिकार्ड एमपी आईजीआर की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा।
-उपेन्द्र झा, जिला पंजीयक।
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