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chaturmas 2022: 10 जुलाई से चातुर्मास, चार माह शुभ कार्यों पर रहेगी पाबंदी

किसी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।

छिंदवाड़ा

Updated: June 26, 2022 02:00:28 pm

छिंदवाड़ा. देवशयनी एकादशी 10 जुलाई को प्रारंभ हो जाएगा और इस दिन से सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु पाताल लोक में योग निद्रा में चले जाएंगे। मान्यता के अनुसार चार माह तक देव निद्रा में रहेंगे। इस चार माह की अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस दौरान मांगलिक कार्य विवाह संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध रहेंगे। मान्यता है कि चातुर्मास आरंभ होने के कारण किसी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। 4 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के दिन चातुर्मास समाप्त होगा। कार्तिक मास में देवोत्थान एकादशी पर जब भगवान विष्णु योग निद्रा से जागकर पुन: इस लोक में आएंगे और तुलसी जी के साथ उनका विवाह होगा, उसके बाद से सारे मांगलिक कार्य पुन: प्रारंभ होंगे और चातुर्मास खत्म होगा। मान्यता है कि इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथो में होता है। प्राचीन काल में साधु संन्यासी इन 4 महीनों में यात्रा नहीं करते थे। जहां पर रहते थे वहीं पर 4 माह टिक कर भगवान का भजन कीर्तन और धार्मिक क्रियाओं को संपन्न किया करते थे। इसलिए चतुर्मास को धार्मिक कार्यों और साधना के लिए उत्तम माना जाता है, लेकिन सांसारिक कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। पंडितों के अनुसार धार्मिक मत यह कहता है कि इस समय शादी, मुंडन, जनेऊ जैसे सांसारिक कार्यों को करने से भगवान का आशीर्वाद नहीं मिल पाता है। जबकि व्यवहारिक दृष्टि से देखें तो इस समय वर्षा ऋतु होने से हर जगह जलभराव रहता है ऐसे में यात्रा करना और सांसारिक कार्यों का आयोजन करना कठिन और संकटकारी हो सकता है इसलिए यह समय संयमित भाव से रहने का होता है।
Chaturmas and shiv
Chaturmas 2021 with special shiv puja days
4 महीने नहीं है शादी की तिथि
देवशयनी एकादशी 10 जुलाई को होने से चतुर्मास आरंभ हो जाने की वजह से 10 जुलाई से अगले 4 महीने तक शादी की कोई तिथि नहीं रहेगी, विवाह तिथि का आरंभ 4 नवंबर को हरिप्रबोधिनी एकादशी के दिन होगा।
चातुर्मास में तीर्थ यात्रा
चतुर्मास लग जाने पर ऐसा माना जाता है कि धरती पर मौजूद सभी तीर्थ व्रज भूमि में आकर कान्हा की सेवा करते हैं इसलिए चतुर्मास के दौरान सभी तीर्थों का पुण्य एक मात्र व्रज की यात्रा और दर्शन से मिल जाता है। इसलिए इस दौरान तीर्थयात्रा करना चाहते हैं तो व्रज भूमि की यात्रा करना उत्तम रहेगा।
मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास में भगवान विष्णु की पूजा अत्यंत लाभकारी है। इससे मां लक्ष्मी का आगमन होता है। इस माह लोगों को किसी से लड़ाई-झगड़ा करने से बचना चाहिए और झूठ नहीं बोलना चाहिए। चातुर्मास की अवधि के दौरान तुलसी पूजा करनी चाहिए। शाम को तुलसी पौधे पर घी दीपक जलाएं।

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