क्रांतिकारियों के लिए लूट लिया था बैंक

क्रांतिकारियों के लिए लूट लिया था बैंक
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Akhilesh Thakur | Updated: 14 Aug 2016, 06:46:00 PM (IST) Chhindwara, Madhya Pradesh, India

अंग्रेजों के इस जुल्म को देखकर आजादी का सिपाही बनने की ठान ली।... फिर क्या था सन 1941 में नागपुर के क्रांतिकारी व मजदूर नेता मगनलाल ने क्रांतिकारियों को आर्थिक मदद देने के लिए हमने बैंक लूटने की योजना बनाई।

छिंदवाड़ा. तब मेरी उम्र करीब दस वर्ष रही होगी। घर के बाहर खड़ा था। कुछ अंग्रेज अपनी बग्गियों में सवार होकर गुजर रहे थे। इन बग्गियों को खींचने के लिए घोड़े की बजाय भारतीय मजदूरों को लगाया गया था। मैंने देखा कि एक दुबला पतला मजदूर बग्गी को खींचकर अधमरा हो रहा था। कुछ दूर बाद वह बेहोश हो गया। अंग्रेज सिपाहियों ने उस पर कोड़े बरसाए।  लेकिन वह होश में नहीं आया।

इसके बाद अंग्रेजों ने उस मजदूर को वहीं छोड़ दिया। दूसरे मजदूर से बग्गी खिंचवाते हुए चले गए। ये बात मेरे मन में घर कर गई।  मैंने अंग्रेजों के इस जुल्म को देखकर आजादी का सिपाही बनने की ठान ली। धीरे-धीरे दोस्तों की मदद से समाचार पत्र निकाला और ब्रिटिश सरकार की नीतियों का विरोध शुरू कर दिया। जब हमारा दमन किया जाने लगा तो हमने चूने और गेरू से घरों की दीवारों पर अंग्रेजों के अत्याचारों की दास्तां लिखनी शुरू कर दी।

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जब मैं नौवीं कक्षा में पढ़ रहा था तो एक दिन स्कूल में तिरंगा लहरा दिया। फिर क्या था मुझे स्कूल से निकाल दिया गया, जबकि मेरे साथी भगतदेव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके बाद मैंने ब्रिटिश सरकार के विरोध का कोई भी मौका नहीं छोड़ा। 

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सन 1941 में नागपुर के क्रांतिकारी व मजदूर नेता मगनलाल ने क्रांतिकारियों को आर्थिक मदद देने के लिए बैंक लूटने की योजना बनाई। 500 मजदूरों के साथ हमने नागपुर के सेंट्रल बैंक को लूट लिया।  तीन दिनों तक हम क्रांतिकारियों का बैंक पर कब्जा रहा। अलग-अलग टोलियां बनाकर चार जोन उत्तर प्रदेश, कलकत्ता, महाराष्ट्र व गुजरात के क्रांतिकारियों को बोरे में पैसे भरकर भेजे गए।

उत्तर प्रदेश में क्रांतिकारी सरदार भगत सिंह की टोली को पैसा पहुंचाने मंै खुद गया। इसके बाद नाम बदलकर पूना में पांच वर्ष तक फिल्मों में काम किया। इस बीच अन्य शहरों में रहकर अंग्रेजों को चकमा देता रहा। देश आजाद होने के बाद छिंदवाड़ा लौटा। आजादी के बाद मुझे एक शासकीय स्कूल में कक्षा 11वीं में प्रवेश मिल गया। इसके बाद मैंने अपनी पढ़ाई पूरी की।
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