चुनावी साल में युवा नेता की ये चाल प्रतिद्वंद्वी को कर रही बेहाल

मजबूरी में उसी स्थान से नेताजी को शहर से किनारे आयोजन की घोषणा करनी पड़ी

By: manohar soni

Published: 11 Dec 2017, 10:02 AM IST

छिंदवाड़ा. नेताजी बनना है तो जनता की नब्ज पकडऩी ही पड़ेगी। राज करने के लिए तंत्र को साथ लेकर चलना ही पड़ेगा। कुछ इसी राह पर शहर के एक युवा नेता चल रहे हैं। सतारूढ़ दल के वरिष्ठ एवं अनुभवी से मंत्र मिलते ही उन्होंने नेताजी बनने की तैयार शुरू कर दी है। दाव भी गजब का चला है, शहर के मध्य धार्मिक आयोजन से शक्ति प्रदर्शन का। इसी बहाने जनता के मूड का भी पता चल जाएगा। वर्तमान नेताजी हर साल यहां धार्मिक आयोजन कराते आ रहे हैं, लेकिन चुनावी साल में युवा नेता ने पहले ही चाल चल दी है। मजबूरी में उसी स्थान से नेताजी को शहर से किनारे आयोजन की घोषणा करनी पड़ी।
‘हाथ’ में आया ‘कमल’
राजनीति में विरोधी की चाल पर तीखी नजर न रखी जाए तो वह मुस्कराते हुए उलझन में तो कहीं न कहीं फंसा ही देगा। खेल महोत्सव के समापन समारोह पर एेसा ही हुआ। अपने ‘नेताजी’ ऊंची-ऊंची फेंकते और मुस्कराते हुए विपक्षी पार्टी के दो पदाधिकारियों को स्मृति चिह्न में ‘कमल’ थमा गए। उन्हें जैसे ही इसका एहसास हुआ तो हालत सांप छछूंदर जैसी हो गई। तत्काल नजरें झुकाकर उसे वहीं छोड़ दिया। जैसे-तैसे मामला संभला, तब तक नेताजी अपनी ‘दिमागी’ दवा बेच चुके थे। इस घटनाक्रम को दूर से देख रहे राजनीतिक समझ वाले लोग मुस्कराए बिना नहीं रह सके। बोल उठे-भई! राजनीति तो आखिर राजनीति है।

कौन गया ‘साहब’ के बंगले
राजनीतिक बिरादरी से कोई दिल्ली गया तो यह अंदाजा जगजाहिर है कि ‘साहब’ के बंगले में पहुंचकर जरूर कोई शिकायत की होगी या फिर मदद मांगी होगी। पार्टी का हो तो ठीक है, लेकिन विधानसभा चुनाव के एक साल पहले विपक्ष के तीन दिग्गज बंगले से होकर आ गए तो संदेह होना स्वाभाविक है। आखिर बातचीत में क्या खिचड़ी पकी होगी। इस मुलाकात के क्या मायने हैं, जैसे सवालों पर कार्यकर्ता यही अनुमान लगा रहे हैं कि 2019 के लिए पार्टी की अंदरुनी तैयारी की जानकारी लीक की जा रही है। फिलहाल उनके नाम बंगले के रजिस्टर में होने से चर्चा का विषय है।

दफ्तर में ‘रतजगा’ कामकाज
कलेक्ट्रेट परिसर के एक दफ्तर में अक्सर ‘रतजगा’ कामकाज हो रहा है। इसके चलते कभी कक्ष की लाइट दस बजे के बाद ही बंद होती है तो कभी अधिक समय लग जाता है। दिन में देखो तो सन्नाटा छाया रहता है। आखिर रात में यहां कौन सा काम होता होगा। इसकी खोजबीन की गई तो पता चला कि ‘साहब’ को अकेले में ‘फाइल’ देखने का शौक है। ऑफिस के कर्मचारी से पूछो तो नजरें नीचे कर मुस्कराकर चल देते हैं। इस मौन में भी समझदार को इशारा काफी है।

manohar soni Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned