चंद पैसों के लिए पत्ती बेच रहा स्कूली बच्चों का बचपन, जानें वजह

- सिर पर ढोते है वजन, मोहल्ला क्लास में बच्चे और शिक्षकों की है कम रुचि

By: Dinesh Sahu

Published: 11 Jan 2021, 09:18 AM IST

छिंदवाड़ा/ खेलने कूदने और पढऩे-लिखने की उम्र में छोटे बच्चों पर परिवार की आर्थिक कमजोरी को सुदृढ़ करने की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। इसके लिए बच्चे कई किलोमीटर दूरी तय कर हर दिन बाजार में मवेशियों के लिए उपयोगी पत्ती बेचने शहर आना पड़ता है। उम्र की जिसे दौर से वे गुजर रहे है, उन्हें पता भी नहीं यह समय दोबारा लौटकर नहीं आएगा। बच्चों ने बताया कि वे पढऩा तो चाहते है, पैसा भी जरूरी है। मां-बाप के कहने पर ही वे हर दिन पत्ती बेचने बाजार आते है।

कोरोना संक्रमण की वजह से परिवार को कई तरह की समस्याओं से गुजरना पड़ा, स्कूल भी बंद है। गांव में मोहल्ला क्लास लगाने के लिए शिक्षक कभी-कभी आते है तथा बच्चों के नहीं मिलने पर धीरे-धीरे उनकी भी रुचि कम हो गई है। जुन्नारदेव विकासखंड के अंतर्गत ग्राम चिकलमउ, विशाला, टाटरवाड़ा आदि जगह से दर्जनों बच्चे शहरी क्षेत्रों में हर दिन पत्ती बेचने सिर पर पत्तियों का गठ्ठा लेकर पहुंचते है। प्रत्येक गठ्ठे की कीमत उन्हें 15 से 20 रुपए मिलती है।


शिक्षा और श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल -


शिक्षा का अधिकार अधिनियम और बालश्रम पर लगाम लगाने के लिए कई गतिविधियां संचालित की जाती है तथा बच्चों और पालकों को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार भी किया जाता है, जिसके बाद भी स्थिति में अब तक बहुत कम बदलाव देखने को मिलते है। जानकार इसकी वजह गरीबी और परिस्थिति बताते है। साथ ही जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों द्वारा बरती जाने वाली उदासीनता भी बताई जाती है।


प्रवासी बच्चों को ही खोज नहीं सका विभाग -


जिले के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में एक लाख 73 हजार से अधिक बच्चों के नाम दर्ज है तथा कोरोना महामारी के दौरान प्रवासी श्रमिकों के 595 बच्चे जिले में आए, जिनकी उम्र 14 वर्ष से कम है। इन्हें खोजने में विभाग सुस्त है, ऐसे में दर्ज बच्चों की शिक्षा को लेकर जिम्मेदार कितने सजग होंगे अंदाजा लगाया जा सकता है।


शिक्षकों की कमी भी एक बड़ी समस्या -


जिले के प्राथमिक-माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी एक समस्या है। विभागीय सूचना के मुताबिक यूडाइस वर्ष 2019-20 में जिले में 189 शिक्षकों के पद रिक्त है। इनमें प्राथमिक के 66 तो माध्यमिक के 123 पद शामिल है। सबसे ज्यादा स्थिति जुन्नारदेव विकासखंड की हैं, यहां प्राथमिक के 29 व माध्यमिक के 51 पद रिक्त है। इसी तरह हर्रई में प्राथमिक के 22 तो माध्यमिक के 41 और तामिया में प्राथमिक के 15 और माध्यमिक के 26 पद रिक्त है।


मामले की कराएंगे जांच -


सर्व शिक्षा अभियान के तहत चल रही गतिविधियां और मोहल्ला क्लास में शिक्षकों की मौजूदगी के संदर्भ में जांच कराएंगे। बच्चों के बालश्रम को रोकने और शिक्षा से जोडऩे के निर्देश दिए जाएंगे।


- सौरभ कुमार सुमन, कलेक्टर

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