फैक्ट्रियों तक पहुंच रहा चोरी का कोयला, देखें वीडियो

Rajendra Sharma | Publish: Aug, 12 2018 05:33:08 PM (IST) Chhindwara, Madhya Pradesh, India

कोयले की तस्करी: रिंग रोड से गुजरते हैं वाहन

छिंदवाड़ा. कोयलांचल की खदानों से कोयला चोरी छिपे शिवपुरी, झुर्रे, मोठार होते हुए शहर और आसपास के क्षेत्रों में संचालित ईंट भट्टों और फैक्ट्रियों तक पहुंच रहा है। कोयले की खेप ट्रैक्टर के जरिए रात तीन बजे से सुबह पांच बजे के बीच ही पहुंचाई जाती है। सूत्रों की मानें तो इस दौरान अधिकारी और पुलिस कर्मी दोनों ही नदारद रहते हैं। इसी वजह से बड़ी ही आसानी से यह अवैध कारोबार इन दिनों फल-फूल रहा है।
सेठिया ओपनकॉस्ट के समीप पेचिस बंद खदान क्षेत्र में कोल डस्ट डम्प किया जाता है। इसी कोल डस्ट में कुछ प्रतिशत कोयला और चूरा भी होता है। इसी कोयले को बीनकर बोरियों में भरा जाता है। बीते दिनों सीआइएसएफ ने समीप के नाले से ही कोयले का अवैध भंडार भी पकड़ा था। यह कोयला अन्य स्थानों पर सप्लाई किया जाना था। शिवपुरी क्षेत्र से कोयला चोरी छिपे मंडला मंडली , पलटवाड़ा होते हुए मोठार, खजरी और आसपास के क्षेत्र में पहुंचता है। भाला, पिंडरई तथा कोसमी होते हुए भी कोयले की तस्करी की जाती है। पूर्व में रावनवाड़ा पुलिस ने कार्रवाई की, लेकिन लम्बे समय से कार्रवाई न होने से तस्करी फिर बढऩे लगी है।

तेज रफ्तार में निकलते है वाहन

मोठार निवासी रतन सूर्यवंशी ने बताया कि सप्ताह में किसी भी दिन तीन से चार गाडि़यों का काफिला तेज रफ्तार में निकलता है। इनमें कोयला भरा होता है। इन चौपहिया वाहनों के सामने दो से तीन दोपहिया दौड़ती हैं जो आगे की स्थिति साफ होने की सूचना कोयले से लदे वाहन के चालकों देती है। आमतौर पर रात्रि में तीन से सुबह पांच बजे के बीच कोयले की तस्करी होती है। शहर से लगे क्षेत्रों में स्टॉक कर अगले दिन ऑर्डर पर कोयला सप्लाई किया जाता है। सबसे ज्यादा सप्लाई देहात थाना क्षेत्र के गांगीवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में संचालित सैकड़ों ईंट भट्टों में होता है। इनकी बिक्री 15000 रुपए प्रति ट्रॉली के हिसाब से की जाती है।

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