College: छतरपुर की तरह कहीं इस जिले में भी न हो जाए ऐसा निर्णय, खत्म हो जाएगा वर्षों पुराना अस्तित्व

छतरपुर में 9 वर्ष पहले छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी।

By: ashish mishra

Published: 17 Sep 2021, 12:26 PM IST


छिंदवाड़ा. छतरपुर में बीते दिनों महाराजा कॉलेज के छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में संविलियन का प्रस्ताव कैबिनेट में पास होने के बाद अब पीजी कॉलेज, छिंदवाड़ा पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। दरअसल छतरपुर में 9 वर्ष पहले छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। इस विश्वविद्यालय के प्रारंभिक कार्य का संचालन छतरपुर के महाराजा कॉलेज में शुरु किया गया। तब से अब तक कॉलेज में ही विश्वविद्यालय संचालित किया जा रहा था। इस दौरान विश्वविद्यालय केवल परीक्षा के आयोजन कराने एवं परिणाम देने तक सीमित रहा। इसी बीच उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव दिसंबर 2020 में छतरपुर पहुंचे। उनके निर्देश पर छतरपुर में स्थित महाराजा कॉलेज को छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में विलय किए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। जिसे बीते दिनों कैबिनेट में पास कर दिया गया। हालांकि इस बात का विरोध छतरपुर में स्थानीय लोग, पूर्व छात्र एवं कांग्रेस कर रही है। उनका कहना है कि कॉलेज का वर्षो पुराना अस्तित्व खत्म हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि कैबिनेट में प्रस्ताव के पास होने के बाद महाराजा कॉलेज का विलय छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में तय है। यह बात जगजाहिर है कि शासन के फैसला लेने के बाद निर्णय बदलना मुश्किल होता है। दूसरी तरफ 14 अगस्त 2019 को विधानसभा का विशेष संकल्प पारित कर छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। विश्वविद्यालय के भवन के लिए ग्राम सारना में लगभग125 एकड़ भूमि का आवंटन एवं 486.45 करोड़ का बजट आवंटन भी किया गया था। इस भवन की डिजाइन सहित अन्य कार्य भी हो चुके हैं एवं भवन निर्माण के लिए टेंडर भी हो चुका है। विश्वविद्यालय के लिए 325 पदों की स्वीकृति भी शासन द्वारा दी जा चुकी है, लेकिन अब तक भवन निर्माण का कार्य शुरु नहीं हुआ है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि कहीं पीजी कॉलेज, छिंदवाड़ा का विलय छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय में न हो जाए। अगर ऐसा हुआ तो पीजी कॉलेज का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।


परिसर में संचालित हो रहा छिंदवाड़ा विवि
छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय भी शासकीय स्वशासी पीजी कॉलेज के लाइब्रेरी भवन में संचालित हो रहा है। सभी स्थिति छतरपुर की तरह ही है। बस अंतर इतना है कि वहां नौ साल गुजर चुके थे और छिंदवाड़ा में अभी दो साल ही बीते हैं। अगर जल्द ही छिंदवाड़ा में छात्र संगठन, राजनीतिक दल छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय के भवन निर्माण के लिए तेजी से आवाज नहीं उठाता है तो आने वाले दिनों में परिणाम छतरपुर की तरह ही हो सकते हैं। शासन छतरपुर की तरह भविष्य में पीजी कॉलेज का विलय भी छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय में कर सकती है।


क्या होगा नुकसान
वर्ष 1961 में छिंदवाड़ा में शासकीय स्वशासी पीजी कॉलेज की स्थापना की गई थी। इसके लिए लगभग 40 एकड़ जमीन भी आवंटित है। कॉलेज का अपना अस्तित्व है। शिक्षाविदे का कहना है कि अगर किसी कॉलेज का विलय विश्वविद्यालय में कर दिया जाए तो विश्वविद्यालय का वास्तव में जो स्वरूप होता है वह नहीं हो पाएगा। अकादमिक उत्थान नहीं हो पाएगा। अधिक से अधिक लोगों को रोजगार नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा कॉलेज के स्टॉफ भी विश्वविद्यालय के कहलाएंगे। इसमें भी पेंच फंसेगा।

ashish mishra Desk
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