College: इस परिणाम से नाखुश कॉलेज छात्राओं ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

बीएससी मैथ में दाखिला लिया था।

By: ashish mishra

Published: 06 Jan 2020, 12:10 PM IST

छिंदवाड़ा. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणाम से नाखुश राजमाता सिंधिया गल्र्स कॉलेज की बीएससी मैथ की छात्राएं रविवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ से गुहार लगाने पहुंची। छात्राओं का कहना था कि हमने वर्ष 2018-19 में वार्षिक प्रणाली से बीएससी मैथ में दाखिला लिया था। हमारी परीक्षा अप्रैल-मई माह में आयोजित की गई। अक्टूबर 2019 में जब रिजल्ट आया तो काफी छात्राओं को सप्लीमेंट्री आई। हैरानी की बात यह थी कि अधिकतर छात्राओं को या तो शुन्य या फिर तीन से चार नंबर ही मिले थे। इसके बाद छात्राओं ने नवंबर में सप्लीमेंट्री परीक्षा दी। इस बार वह दूसरे विषय में फेल हो गई। छात्राओं का कहना है कि इतनी अधिक संख्या में छात्राओं के नंबर कैसे कम हो सकते हैं। छात्राओं ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के उत्तर पुस्तिका की जांच पर सवाल उठाए। छात्रासंघ अध्यक्ष रेशमा खान ने बताया कि छात्राओं के उत्तर पुस्तिका की पुन: जांच एवं उन्हें बीएससी द्वितीय वर्ष की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दिलाने का आग्रह किया गया है। हालांकि रविवार को छात्राओं की मुलाकात मुख्यमंत्री से नहीं हो पाई। उन्होंने ओएसडी को ज्ञापन सौंपा।

द्वितीय वर्ष में ले चुकी हैं दाखिला, कर रही पढ़ाई
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा परिणाम में देरी की वजह से अधिकतर छात्राओं ने बीएससी मैथ द्वितीय वर्ष में प्रोविजनल दाखिला भी ले लिया था। छात्राओं का कहना है कि हमने द्वितीय वर्ष की किताब खरीद ली, चार से पांच माह की पढ़ाई भी हो गई। अब हमसे कहा जा रहा है कि आपको फिर से प्रथम वर्ष में पढऩा होगा। अगर समय पर परीक्षा और परीणाम विश्वविद्यालय दे देता तो यह नौबत नहीं आती।


गल्र्स कॉलेज ने मांगी अनुमति
वहीं दूसरी तरफ एक अन्य मामले में राजमाता सिंधिया गल्र्स कॉलेज ने छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर एमएचएससी में प्रोविजनल दाखिला ले चुकी छात्राओं को परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी है। वहीं छात्राओं ने भी कुलसचिव से मुलाकात कर समस्या से अवगत कराया। गौरतलब है कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय द्वारा बीएचएससी द्वितीय एवं तृतीय सेमेस्टर एटीकेटी परीक्षा काफी समय से आयोजित नहीं की गई है। छात्राओं ने एमएचएससी में प्रोविजनल दाखिला ले लिया था। जबकि नियम के अनुसार जब तक छात्राओं को स्नातक की डिग्री नहीं मिल जाती वह स्नातकोत्तर की परीक्षा नहीं दे सकती हैं।

ashish mishra Desk
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