भाजपा को लगे थे चार माह, सीएम ने 14 दिन में बना दिया रेकॉर्ड

भाजपा को लगे थे चार माह, सीएम ने 14 दिन में बना दिया रेकॉर्ड
Congress created record in 14 days

Prabha Shankar Giri | Updated: 29 May 2019, 12:21:11 PM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

छिंदवाड़ा में दोहराया पांच साल पुराना इतिहास

छिंदवाड़ा. पांच साल पहले तत्कालीन शिवराज सरकार द्वारा कलेक्टर के स्थानांतरण के पश्चात वापस पदस्थापना करने के फैसले का इतिहास उसी तर्ज पर कमलनाथ सरकार ने दोहरा दिया। बस अंतर यह है कि भाजपा ने महेशचंद्र चौधरी को वापस लाने में चार माह का समय लिया था। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त होते ही 14 दिन के अंदर ही यह रेकॉर्ड बना दिया। एक-दूसरे को पटकनी देने में प्रशासनिक मुखिया को हथियार बनाने की इस राजनीति की गूंज सोमवार को कलेक्ट्रेट समेत हर दफ्तर में हुई। अधिकारी-कर्मचारी इस परम्परा से दुखी नजर आए।
इस लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हेलीकाप्टर की अनुमति शाम पांच बजे के बाद न दिए जाने के मामले में कलेक्टर डॉ.श्रीनिवास शर्मा को 13 मई को हटा दिया गया था। उस समय निर्वाचन आयोग की अनुशंसा पर मुख्य सचिव ने इसके आदेश जारी किए थे। जैसे ही लोकसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त हुई। उसी दिन 27 मई को प्रभाव में आते ही प्रदेश सरकार ने डॉ.शर्मा को पुराने स्थान पर पहुंचा दिया। यह ठीक वैसी ही प्रतिक्रिया थी, जैसी शिवराज सरकार ने पांच साल पहले महेश चंद्र चौधरी के मामले में किया था। तब सांसद का चुनाव लड़ रहे कमलनाथ ने निर्वाचन आयोग को तत्कालीन कलेक्टर रहे चौधरी की शिकायत की थी। उसके बाद निर्वाचन आयोग के आदेश पर छह अप्रैल 2014 को चौधरी को मंत्रालय अटैच कर दिया था। उसके चार माह बाद पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने आठ अगस्त 14 को चौधरी को वापस छिंदवाड़ा भेज दिया था। उसके बाद का राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास अधिकारी-कर्मचारियों से लेकर नेताओं से छिपा नहीं है। इस वापसी के बाद की उठापटक के अलग रेकॉर्ड बनेंगे।
इस प्रशासनिक स्थानांतरण की प्रक्रिया पर कर्मचारियों का एक वर्ग यही प्रतिक्रिया देता रहा कि भाजपा-कांग्रेस के बीच एक दूसरे को निपटाने में प्रशासन को हथियार बनाने की गलत परम्परा का आगाज छिंदवाड़ा में हो गया है। आने वाले समय मेें इसके परिणाम अधिकारी-कर्मचारियों को ही भुगतने होंगे। चौधरी की इस सरकार के कार्यकाल में हो रही पदस्थापना से सब कुछ समझा जा सकता है। हर लोकसभा और विधानसभा चुनाव में शिकवा शिकायतों के बाद तबादलों का यह स्वरूप देखने को अवश्य मिलेगा।

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