Corona effect: बुखार आया तो बच्चे को दी यह दवा, 15 दिन बाद सामने आई चौंकाने वाली बीमारी, सावधान

आंखों में सूजन आने, तेज बुखार और पेट दर्द

By: ashish mishra

Updated: 20 May 2021, 01:27 PM IST

छिंदवाड़ा. हर समय खुद को अपडेट और जागरूक कराना जरूरी है अगर ऐसा नहीं करते हैं तो फिर हम भीड़ में खो जाएंगे। जानकारी का अभाव भी कभी-कभी बड़ी परेशानी खड़ी कर देती है। छिंदवाड़ा में एक पिता अपने 7 वर्षीय बेटे के आंखों में सूजन आने, तेज बुखार और पेट दर्द होने पर 9 दिनों तक छिंदवाड़ा में अलग-अलग अस्पताल में इलाज कराता रहा, लेकिन कही भी राहत नहीं मिली, स्थिति गंभीर होती गई। पिता ने नागपुर अस्पताल रूख किया और वहां बेटे की बीमारी की वजह सामने आई। बच्चा पोस्ट कोविड मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेशन सिंड्रोम से पीडि़त था। डॉक्टरों ने इलाज किया और 8 दिन में बच्चा स्वस्थ्य होकर घर लौट आया। माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है। इस पूरे मामले में पिता को जो बात समझ में आई वह यह थी कि अभी भी कई ऐसे डॉक्टर है जो बीमारियों के सामने आ रहे नए लक्षण को लेकर जागरूक नहीं है। इसके अलावा पैरेंट्स भी लापरवाही कर रहे हैं। यही वजह थी कि उनके बेटे की बीमारी सही समय पर पता नहीं चल पाई। दरअसल चंदनगांव निवासी 40 वर्षीय निखिल माकोड़े और उनकी पत्नी कविता माकोड़े मार्च माह में कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। इसी दौरान उनके 7 वर्षीय बेटे तनिष्क माकोड़े को बुखार आया। निखिल ने बेटे को बुखार की दवा दे दी और वह एक दिन में स्वस्थ्य हो गया। माता-पिता भी पन्द्रह दिन में फिट हो गए। लगभग पन्द्रह दिन बाद घर में स्थिति सामान्य हुई ही थी कि बेटे तनिष्क के आंख में सूजन और पेट दर्द होने लगा। साथ ही बुखार भी आने लगा। निखिल ने जिला अस्पताल की ई-संजीवनी ओपीडी में संपर्क किया तो उन्होंने होम्योपैथी डॉक्टर से संपर्क करने का सुझाव दिया। दो दिन होम्योपैथी डॉक्टर से इलाज कराया, लेकिन तबीयत वैसी ही रही। इसके बाद शहर के ही दो अलग-अलग निजी अस्पताल में तनिष्क का इलाज हुआ। एक डॉक्टर ने पेन किलर एवं एंटीबॉयोटीक इंजेक्शन दिया। सुधार नहीं हुआ तो पिता तड़प हुआ। उसने दूसरे अस्पताल की तरफ रुख किया। यहां भी डॉक्टर ने सोनोग्राफी कराने के बाद अपेंडिक्स की बीमारी बताकर इलाज शुरु किया। बात नहीं बनी। बच्चे की स्थिति गंभीर होते देख निखिल अपने बेटे को लेकर नागपुर में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण खापेकर के पास पहुंच गए। जांच के बाद बीमारी का पता चला और इलाज के बाद बच्चा 8 दिन में स्वस्थ्य हो गया। निखिल ने बताया कि बेटे के इलाज में बड़ी गलती मेरी ही थी। जब उसे शुरुआत में बुखार आया था उसी समय बेटे का कोरोना टेस्ट कराना चाहिए था। इसके बाद छिंदवाड़ा में डॉक्टरों को भी बीमारी समझ में नहीं आई।

लक्षण, जांच और ऐसे किया इलाज
नागपुर के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण खापेकर ने बताया कि अगर आपके बच्चे को कुछ समय पहले कोविड के हल्के लक्षण थे या कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव थी या बच्चे ऐसे व्यक्ति के संपर्क में थे जो कोविड पॉजिटिव थे या हो सकता है कि उस समय बच्चे में कोई लक्षण न हो और दो से छह हफ्ते बाद अचानक बुखार आना, आंखों का अचानक लाल होना, शरीर में दाने आना, गले में गठान या सुजन आना, पेट दर्द, उल्टी, दस्त, सांस की गति तेज चलना, सुस्ती आना ऐसे कई लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है। उन्होंने बताया कि बच्चे के ब्लड में कोरोना ऐन्टीबॉटी टेस्ट करने पर ही पता चलता है कि उसे कोरोना इन्फेक्शन हुआ है। साथ में इन्प्लेमेटरी मार्कर, हार्ट की जांच एवं जरुरत के हिसाब से अन्य अंग की जांच कर सकते हैं। इन जांच से ही पता चलेगा कि बच्चे को पिडीयाट्रिक मल्टी सिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम बीमारी है या नहीं। इस बीमारी के इलाज के लिए मुख्य दवा स्टीरॉईड एवं इम्यूनीग्लोबिन इस्तेमाल की जाती है। साधारण इलाज के बाद 95 प्रतिशत बच्चे ठीक हो जाते हैं।

बच्चे को अलग रखने की जरूरत नहीं
डॉ. प्रवीण ने बताया कि बच्चों में यह बीमारी कोरोना संक्रमण के बाद हो रही है इसलिए इलाज के लिए कोविड अस्पताल की जरूरत नहीं है। यह बीमारी फैलती नहीं है इसलिए बच्चे को अलग रखने की भी जरूरत नहीं है।

ashish mishra Desk
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