Corona Pension: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे नियमों ने बढ़ाई चिंता, रिकॉर्ड का खेल पड़ेगा भारी

मुख्यमंत्री कोविड-19 जनकल्याण योजना के नियम वायरल होते ही समाज में चिंता, छिंदवाड़ा में कोरोना पॉजिटिव से 118 मौत ही दर्ज, गैर सरकारी आंकड़ा 1329 पहुंचा, मुख्यालय के बाहर मृत्यु अलग

By: prabha shankar

Published: 20 May 2021, 11:00 AM IST

छिंदवाड़ा। श्मशान घाट के रिकॉर्ड से अगर कोरोना महामारी में अपने माता-पिता से बिछड़े अनाथ बच्चों को पांच हजार रुपए पेंशन की पात्रता मिल जाती तो न जाने कितने परिवारों का भला हो जाता लेकिन मुख्यमंत्री कोविड-19 जनकल्याण योजना के सोशल मीडिया में वायरल नियम को देखकर ऐसा नहीं हो पाएगा। इस योजना में कोरोना पॉजिटिव होकर मृत होने के सबूत मांगे जा रहे हैं। इससे पूरे जिले में सौ से कम पात्र परिवारों को ही इसका लाभ मिल पाएगा।
समाज में बेहद संवेदनशील इस विषय को पत्रिका पहले भी उठा चुका है। यह सर्वज्ञात है कि स्वास्थ्य विभाग के सरकारी रिकॉर्ड में केवल 118 व्यक्तियों को ही कोरोना पॉजिटिव होने के बाद मृत होना माना गया है। जबकि कोरोना प्रोटोकॉल के तहत 48 दिन में अकेले जिला मुख्यालय में 1329 मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया है। इन असामायिक मौतों से अधिकांश परिवारों ने अपना मुखिया या अभिभावक खोया है। उनका आश्रित परिवार रोजी-रोटी का मोहताज हो गया है। यह विडम्बना है कि ऐसे परिवारों के बच्चों के पालन पोषण के लिए पांच हजार रुपए प्रतिमाह की पेंशन पाना है तो उन्हें मृत परिजन के कोरोना पॉजिटिव होने के सबूत लाने होंगे। मुख्यमंत्री कोविड-19 जनकल्याण योजना पेंशन, शिक्षा और राशन के सोशल मीडिया में वायरल नियम देखकर यहीं लग रहा है। नियम के दायरे में अधिकांश परिवार वंचित हो जाएंगे।

पेंशन योजना के ये प्रावधान पड़ेंगे भारी
1.कोविड-19 से मृत्यु की परिभाषा में यह नियम कि आरटीपीसीआर टेस्ट या आरएटी या सिटी स्केन या किसी अन्य टेस्ट में अधिकृत चिकित्सक द्वारा कोविड से आक्रांत पाया गया हो मृतक।
2.माता-पिता की मृत्यु कोविड-19 के कारण होने का मेडिकल बोर्ड का प्रमाणपत्र संलग्न करना होगा।

असमंजस में प्रशासन
मुख्यमंत्री कोविड-19 जनकल्याण योजना के अधिकारिक आदेश अभी जिला मुख्यालय या सामाजिक न्याय विभाग नहीं पहुंचे हैं, लेकिन सोशल मीडिया में नियम वायरल होते ही यह विषय चर्चा में आ गया है। प्रशासनिक स्तर पर भी यह कहा जा रहा है कि जिलेभर में कोरोना पॉजिटिव से अधिकारिक मौत का आंकड़ा कम है जबकि श्मशान घाट की मौतें ज्यादा हैं। इन मौतों से बेशक संबंधित परिवार आर्थिक रूप से टूटे हैं, बच्चे अनाथ हुए हैं। इस स्थिति में योजना के दो नियम भारी पड़ सकते हैं। इस पर सरकार संशोधन कर दें तो अधिकांश शोक संतप्त परिवारों को इसका लाभ दिलाया जा सकता है।

नियम न आने से सर्वेक्षण भी नहीं कराया
प्रशासन के पास इस समय ऐसे परिवारों की संख्या भी नहीं है, जिनके मुखिया कोरोना से मृत हुए और उनके बच्चे अनाथ हो गए हो। इसका शहर समेत पूरे जिले में सर्वेक्षण भी शुरू नहीं कराया गया है। जबकि घर-घर सर्वेक्षण से ऐसे परिवारों की संख्या जुटाई जा सकती है। इसका कारण पेंशन योजना के अधिकारिक नियम पहुंचना नहीं बताया गया है। सामाजिक न्याय विभाग के उपसंचालक सुशील गुप्ता का कहना है कि इस योजना के अधिकारिक आदेश का इंतजार है। फिर नियम अनुसार कदम उठाए जाएंगे।

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