Corona war: एक तरफ शव और एक तरफ उखड़ती सांसों के बीच राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक ने ऐसी जीती जंग

चर्चित लेखक एवं राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक दिनेश भट्ट

By: ashish mishra

Published: 11 May 2021, 06:56 PM IST



छिंदवाड़ा. किसी ने सच ही कहा है परिवार अगर साथ है तो फिर आप हर जंग जीत सकते हैं। न्यू पहाड़े कॉलोनी, गुलाबरा निवासी चर्चित लेखक एवं राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक दिनेश भट्ट 21 दिन में कोरोना से जंग जीतकर वापस लौट आए हैं। दिनेश भट्ट कलेक्ट्रेट के पास स्थित शासकीय जवाहर कन्या हाईस्कूल में पदस्थ हैं। उन्होंने बताया कि 21 दिन पहले उन्हें बुखार आया था। डॉक्टरों ने सिटी स्कैन की राय दी। ऑक्सीजन लेबल मेरा 90 से नीचे आ गया था। फेफड़े भी संक्रमित हो गए थे। डॉक्टरों ने मुझे अस्पताल में भर्ती होने का सुझाव दिया। उस समय छिंदवाड़ा के किसी अस्पताल में बेड नहीं मिल पा रहा था। शिक्षक ने बताया कि मेरी चार बेटियां हैं। चारों ने तत्काल ही मेरे रिश्तेदारों की सहायता से मुझे जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। बेटियों ने खाने-पीने की पूरी व्यवस्था संभाली। रिश्तेदारों ने भी पूरा साथ दिया। इसी का नतीजा था कि शिक्षक दिनेश भट्टा कभी घबड़ाए नहीं। दृढ़ इच्छा शक्ति, सकारात्मकता, बेटियों का परिश्रम और सेवा, खूब भोजन, परिजनों और मित्रों का हौंसला उनके काफी काम आया और उन्होंने 21 दिनों तक कोरोना से जंग लड़ा और आखिरकार उसे हरा दिया और स्वस्थ्य होकर घर लौट आए हैं। शिक्षक ने मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर एवं स्टॉफ का भी आभार जताया।


एक तरफ शव और एक तरफ उखड़ रही थी सांस
शिक्षक दिनेश भट्ट ने कहा कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने के दौरान अपने सामने लगभग 30 उखड़ती सांसों को मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब मेरे बेड के एक तरफ शव पड़ा था और एक तरफ दूसरे मरीज की सांस उखड़ रही थी। ऐसा दृश्य देखकर आत्मा हिल गई, लेकिन मैंने अपने आपको संभाला। कोविड वार्ड का वातावरण आए दिन तनाव भरा रहता था, लेकि मैंने सब कुछ सामान्य ढंग से लिया। अपने ऊपर नकारात्मकता हावी नहीं होने दिन। अच्छा इलाज और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर जंग जीत ली। शिक्षक ने सभी से अपील की कि वे कोरोना से बचाव को लेकर गाइडालनइ का पालन करें। अपने परिवार के साथ सुरक्षित स्वस्थ रहें। घबड़ाए नहीं।

मोबाइल बहुत काम आया
शिक्षक ने बताया कि अस्पताल में भर्ती होने पर मोबाइल बहुत काम आया। वे हमेशा कॉमेडी धारावाहिक, कॉमेडी मूवी और मनपसंद किताब पढ़ते रहे। इससे उन्हें अच्छा फील होता था।

ashish mishra Desk
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